Monday, July 6, 2026
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बिहार में 18वीं विधानसभा का पहला सत्र आज से शुरु, नये जोश में दिखे विधायक , सम्राट चौधरी ने सबसे पहले ली शपथ

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Bihar VidhanSabha Session Start
Bihar VidhanSabha Session Start

Bihar VidhanSabha Session Start :  बिहार में नई सरकार के गठन के बाद आज सोमवार को  18वीं विधानसभा का पहला सत्र शुरू हो गया है. सत्र की शुरुआत नये विधायकों के शपथ ग्रहण से शुरु हुई.सबसे पहले विधानसभा में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का संदेश पढ़ा गया , फिर राज्यपाल के निर्देशानुसार प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव ने नये विधानसभा सदस्यो को सदन के सदस्यता की शपथ दिलाई.

Bihar VidhanSabha Session Start : शपथ ग्रहण से हुई  शुरुआत

सबसे पहले प्रोटम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव ने सीएम नीतीश कुमार की मौजूदगी में उन विधायकों को शपथ ग्रहण कराया जिन्होने सीएम नीतीश कुमार के साथ शपथ सदन की सदस्यता की शपथ नहीं ली थी.

सबसे पहले उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को शपथ दिलाई गई , फिर दूसरे डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने शपथ लिया.सदन में शपथ ग्रहण वरीयता क्रम से  हुआ. सम्राट चौधरी,विजय सिन्हा के बाद तेजस्वी यादव ने भी शपथ लिया. तेजस्वी यादव के शपथ ग्रहण के बाद विधानसभा में एक खास नजारा दिखा जब भाजपा के नेता राम कृपाल यादव तेजस्वी यादव से मिलने उनकी सीट पर गये.

5 दिसंबर तक चलेगा विधानसभा का पहला सत्र  

आपको बता दें कि आज  सत्र के पहले दिन दिनभर नवनिर्वाचित 243 विधायकों में से जिन लोगो ने पहले शपथ नहीं लिया है ,उन सभी को शपथ दिलाई जायेगी. कल यानी सत्र के दूसरे दिन (2 दिसंबर)  नए विधानसभा अध्यक्ष का चयन होगा. फिर नीतीश कुमार की सरकार विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेगी और सरकार का कामकाज वैधानिक रुप से शुरु होगा. बिहार विधानसभा का ये सत्र 5 दिसंबर तक चलेगा. इस सत्र में विपक्ष के तेवर कड़े हैं, लेकिन बंपर बहुमत से जीत कर आई नीतीश सरकार इस बार विपक्ष को जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार दिखाई दे रही है.

नई बिहार विधानसभा है कई मायनों में है खास  

इस बार की बिहार विधानसभा कई मायनों में खास हैं. आजादी के बाद ये पहला मौके है जब बिहार में कोई पार्टी या गठबंधन ऐसे विशाल जनादेश के साथ सत्ता में आई है. जाहिर है इस सरकार से सत्ता की उम्मीदें भी अधिक है. इसलिए इस सत्र का महत्व केवल औपचारिक शपथ ग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि नई विधानसभा राजनीतिक समीकरण, सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और सरकार के विकास एजेंडे को परखने का पहला अवसर है.