पटना
ब्यूरो चीफ अभिषेक झा की खास रिपोर्ट
फ्रॉड आदित्य अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद बिहार का पूरा पुलिस महकमा उसकी कारस्तानी से हैरान है.’दोस्त’ को चीफ-जस्टिस बताकर DGP को फोन कराने के खुलासे पर धुर-विरोधी IG ने पोस्ट किया ‘‘सत्य की जीत होती है”
गया के पूर्व एसएसपी आदित्य कुमार की पूरी पोल-पट्टी खुल गई है.पहले शराब कांड में मुकदमा हुआ,फिर उन्होंने केस में पैरवी में जो तरीका अपनाया उससे तो पूरा पुलिस महकमा चकित है.पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अफसर भी इस हरकत से सकते में हैं कि किस तरह से आईपीएस अफसर ने अपने आप को बचाने के लिए नटवरलाल दोस्त का सहारा लिया. उस नटवरलाल ने पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज बनकर डीजीपी एस.के. सिंघल को बार-बार फोन किया. संयोग देखिए कि आरोपी गया के तत्कालीन एसएसपी को क्लीन चिट भी मिल गई. वैसे डीजीपी कैसे एक नटवरलाल के झांसे में आ गये यह तो वही बता सकते हैं.
गया के तत्कालीन एसएसपी आदित्य कुमार और तत्कालीन आईजी अमित लोढा की लड़ाई से पूरा बिहार वाकिफ है.आईजी ने तत्कालीन एसएसपी के कारनामों की पोल खोली थी. आईजी अमित लोढा ने जांच कराई तो एसएसपी के शराब माफिया और उसको बचाने वाले थानेदार से सांठगांठ की बात सामने आई थी. इसके बाद उन्होंने आगे की कार्रवाई की थी. बताया जाता है कि इससे गुस्से में आकर एसएसपी आदित्य कुमार ने आईजी के खास रीडर को ही पुलिस मुख्यालय में सेट कर ट्रांसफर करवा दिया था. विवाद बढ़ने और कंई गंभीर आरोप लगने के बाद नीतीश सरकार ने दोनों आईपीएस अफसरों को आनन-फानन में एक ही दिन 2 फरवरी 2022 को हटा दिया था. दोनों को मुख्यालय में वेटिंग फॉर पोस्टिंग रखा गया.सरकार के आदेश पर तत्कालीन एसएसपी आदित्य कुमार के खिलाफ शराब मामले में गया के फतेहपुर थाने में केस दर्ज हुआ. वहीं आईजी अमित लोढ़ा के खिलाफ भी जांच बिठाई गई. तीन एडीजी स्तर के अधिकारियों को अमित लोढा के खिलाफ आरोप की जांच का जिम्मा दिया गया. आईजी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही चलाने की भी बात सामने आई.
अब नया मामला सामने आ गया है. गया के तत्कालीन एसएसपी आदित्य कुमार ने फ्रॉड की सारी हदें पार कर दीं. उसने अपने एक खास नटवरलाल को पटना हाईकोर्ट का सीनियर जज(चीफ जस्टिंस) बना दिया. इसके लिए फर्जी कागजात पर साइन लिये गये. फिर उस नटवर लाल अभिषेक अग्रवाल ने बिहार के डीजीपी एस.के. सिंघल को बार-बार फोन किया और आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार केस को खत्म करने को कहा. फर्जी जज के बारे में डीजीपी को भनक तक नहीं लगी.
पुलिस के विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि आरोपी आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार के खिलाफ फतेहपुर थाने में जो केस दर्ज हुआ था, उस मामले में उन्हें क्लीन चिट मिल गई है. बताया जाता है कि डीजीपी के आदेश पर ही जांच हुई और फिर गया के तत्कालीन एसएसपी को बरी किया गया. लेकिन मामला छुप नहीं सका और ऊपर तक पहुंच गया. ऊपर के आदेश पर आर्थिक अपराध इकाई को जांच का जिम्मा दिया गया . आर्थिक अपराध शाखा(EOW) ने रिकार्ड 24 घंटे में ही पूरी साजिश से पर्दा उठा दिया. आरोपी एसएसपी आदित्य कुमार के फर्जीवाडे से पर्दा उठ गया और वो बेनकाब हो गया. अब ईओयू के डर से आरोपी आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार का मोबाईल फोन बंद है और वे फरार हैं. इधर, इनके खास नटवरलाल अभिषेक अग्रवाल जो जज बनकर डीजीपी को फोन करता था उसे और अन्य तीन साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. वहीं आईपीएस आदित्य कुमार के खिलाफ भी EOW थाने में केस दर्ज किया गया है. इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा और उसमें गया के तत्कालीन एसएसपी की भूमिका सामने आने के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय समेत नौकरशाहों और ज्यूडिशियरी तक में हड़कंप मच गया. दरअसल,जिस नटवरलाल की गिरफ्तारी हुई है उसके कई आईपीएस अफसरों के गहरे रिश्ते रहे हैं. वह उन अधिकारियों के साथ तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट किये हुए हैं.
इधर, इस खुलासे के बाद गया के तत्कालीन आईजी अमित लोढा ने एक फेसबुक पोस्ट किया है. पोस्ट में उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है लेकिन बहुत कुछ बयां किया है. अमित लोढा ने लिखा है- ”सत्य की हमेशा जीत होती है….हालांकि कभी-कभी सही के साथ खड़े रहने की बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ती है.





