ATF Price Hike : भारतीय विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA), जिसमें Air India, IndiGo और SpiceJet जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं, ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को एक ‘अर्जेंट’ पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. एयरलाइंस का कहना है कि अगर जल्द ही राहत नहीं मिली, तो उन्हें अपनी उड़ानें रद्द करनी पड़ सकती हैं और विमानों को जमीन पर खड़ा (Grounding) करना पड़ सकता है.
ATF Price Hike: ATF की कीमतों में 295% का भारी उछाल
FIA के पत्र के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध (West Asia War) ने ईंधन की कीमतों में आग लगा दी है. ब्रेंट क्रूड, जो पहले 72 डॉलर प्रति बैरल पर था, अब उछलकर 118 डॉलर पर पहुंच गया है. इसका सबसे घातक असर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर पड़ा है. ATF की कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 260 डॉलर के पार चली गई है, जो कि लगभग 295 फीसदी की बढ़ोतरी है. वर्तमान में यह 235 डॉलर के आसपास बना हुआ है.
तेल कंपनियों का मुनाफा और एयरलाइंस का घाटा
एयरलाइंस ने तेल कंपनियों के मुनाफे पर भी सवाल उठाए हैं. क्रूड और ATF के बीच का ‘क्रैक स्प्रेड’ (तेल शोधन का मुनाफा), जो पहले 11 से 18 डॉलर प्रति बैरल होता था, अब बढ़कर 132 डॉलर प्रति बैरल हो गया है. FIA का तर्क है कि इस भारी मुनाफे को किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता. इस स्थिति के कारण भारत की अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पूरी तरह से घाटे में चली गई हैं.
लागत में भारी बढ़ोतरी और रुपये की गिरावट
सामान्य तौर पर, किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का 30 से 40 फीसदी हिस्सा ईंधन (ATF) पर खर्च होता है लेकिन मौजूदा संकट के कारण यह अब 55 से 60 फीसदी तक पहुंच गया है. इसके साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपये के अपने सबसे निचले स्तर पर होने के कारण एयरलाइंस पर ‘दोहरी मार’ पड़ रही है, जिससे उनके लिए ऑपरेशन जारी रखना मुश्किल हो गया है.
सरकार से FIA की तीन बड़ी मांगें
संकट से उबरने के लिए FIA ने सरकार के सामने तीन मुख्य प्रस्ताव रखे हैं:
क्रैक बैंड मैकेनिज्म की बहाली: अक्टूबर 2022 में लागू हुए क्रैक बैंड मैकेनिज्म को फिर से शुरू किया जाए (जो दिसंबर 2024 में बंद हो गया था), ताकि क्रूड और ATF की कीमतों के बीच के अंतर को नियंत्रित किया जा सके.
एक्साइज ड्यूटी में राहत: घरेलू उड़ानों के लिए ATF पर लगने वाली 11 फीसदी एक्साइज ड्यूटी को अस्थायी रूप से हटाया या टाल दिया जाए.
VAT में कटौती: प्रमुख राज्यों में वैट (VAT) कम किया जाए. दिल्ली (25%) और तमिलनाडु (29%) जैसे राज्यों में टैक्स बहुत अधिक है. चूंकि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे 6 शहर देश के 50% एयरलाइन ऑपरेशन को संभालते हैं, इसलिए यहां राहत मिलना अनिवार्य है.
यदि सरकार इन मांगों पर जल्द विचार नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में न केवल हवाई किराया महंगा हो सकता है, बल्कि उड़ानों की संख्या में भी भारी कटौती देखने को मिल सकती है.

