Tuesday, February 10, 2026

ओवैसी ने हिमंत बिस्वा सरमा पर ‘₹2 की भीख’ देने की बात कह कसा तंज, असाम सीएम ने कही थी ‘मियां मुसलमानों’ को परेशान करने की बात

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी Asaduddin Owaisi के बीच मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भाजपा नेता की टिप्पणी को लेकर वाकयुद्ध छिड़ गया है.

मुझे पता है कि तुम ‘₹2’ के लिए भिखारी हो…-ओवैसी

ओवैसी ने ‘₹2’ का मज़ाक उड़ाते हुए सरमा को भिखारी कहा. “(सरमा) कहते हैं, ‘अगर कोई ऑटो ड्राइवर मिया मुस्लिम है, तो उसे असली किराए से कम दो; अगर किराया ₹5 है, तो उसे ₹4 दो’. हिमंत बिस्वा सरमा, मैं तुम्हें ये दो रुपये दे रहा हूँ, क्या तुम लोगे? मुझे पता है कि तुम दो रुपये के लिए भिखारी हो… क्या मुझे ये तुम्हारे अकाउंट में ट्रांसफर कर देने चाहिए?” ओवैसी ने शुक्रवार को निज़ामाबाद में एक पब्लिक रैली में ये बात कही.

संविधान से सबको बराबर हक़ किया है- Asaduddin Owaisi

ओवैसी ने आगे कहा कि संविधान ने सभी को बराबर अधिकार दिए हैं, क्योंकि उन्होंने सरमा पर मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव का आरोप लगाया.
ओवैसी ने कहा, “चाहे आप प्रधानमंत्री हों या मुख्यमंत्री, कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. लेकिन वह कहते हैं ‘हम मिया के साथ ऐसा करेंगे, वोट डालने के लिए बांग्लादेश जाएंगे’. आप क्या करना चाहते हैं?”

असम के CM के बयान पर मचा हुआ है बवाल

ओवैसी का यह हमला सरमा के गैर-कानूनी इमिग्रेशन पर लगातार हमलों और असम में बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले मिया मुस्लिम शब्द के इस्तेमाल के जवाब में आया है.
सरमा ने पहले भी अपने बयानों का बचाव करते हुए कहा है कि उन्होंने “मिया मुस्लिम” शब्द नहीं बनाया था और यह बांग्लादेश से आए समुदाय में खुद को बताने के लिए चलन में था.

असम चुनाव से पहले सरमा माहौल गरमाने की कोशिश कर रहे हैं

यह पॉलिटिकल लड़ाई असम में अगले कुछ महीनों में होने वाले असेंबली इलेक्शन से पहले हो रही है. जैसे-जैसे वहां सत्ता की लड़ाई तेज़ हो रही है, सरमा ने अपना तेवर और बढ़ा दिए हैं और ‘गैर-कानूनी बांग्लादेशी इमिग्रेंट्स’ को बाहर निकालने की अपनी बात फिर से दोहराई है. उन्होंने पिछले हफ़्ते कहा था कि उन्होंने उन्हें राज्य से बाहर निकालने के लिए एक ‘जंग’ शुरू कर दी है.
सरमा ने पिछले हफ़्ते एक पब्लिक मीटिंग में कहा, “मिया का मतलब बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं, और हमने तय किया है कि उनमें से हर एक को असम से वापस भेजने के लिए हम हर हद तक जाएंगे. यह एक जंग है और हमारे लिए ज़िंदगी और मौत का सवाल है.”
27 जनवरी को, उन्होंने असम के लोगों से मिया कम्युनिटी के लोगों के पीछे पड़ने और उन्हें “परेशान” करते रहने की अपील की. उन्होंने कहा, “अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो घुसपैठिए सोचेंगे कि असम के लोग कमज़ोर हैं. हम यह अपने होने के लिए कर रहे हैं.”

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