नवंबर में RSS की अहम बैठक इंदौर में होगी, संरचनात्मक परिवर्तन लागू करने के साथ SIR पर भी होगी चर्चा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कार्यकारी परिषद की बैठक नवंबर में इंदौर में शुरू होगी, जिसमें संघ की संरचना में किए जा रहे बदलावों को लागू किया जाएगा. साथ ही संगठन के शताब्दी समारोह का जायजा लिया जाएगा और वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा, जिसमें चल रहे विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) पर केंद्र पर विपक्ष के तीखे हमले भी शामिल हैं, मामले से अवगत लोगों ने बताया.

क्यों अहम है इस साल होने वाली RSS कार्यकारी परिषद की बैठक

तीन दिन की मीटिंग, जिसे अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल (ABKM) के नाम से जाना जाता है, 2 नवंबर से शुरू हो रही है. यह हर साल होती है, लेकिन इस बार इसका एजेंडा ज़्यादा अहम है क्योंकि यह अगले साल मार्च में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) में होने वाले ऑर्गेनाइज़ेशनल चुनावों से चार महीने पहले हो रही है. ABPS संघ की सबसे बड़ी फ़ैसले लेने वाली बॉडी है और इसके चुनाव हर तीन साल में होते हैं.

संघ प्रांत प्रचारकों की जगह डिवीजन प्रचारकों को ला रहा है

एक पदाधिकारी ने कहा, “हम शताब्दी समारोह और प्लान किए गए आउटरीच के असर का जायज़ा लेंगे. लेकिन क्योंकि यह मीटिंग ABPS और नए सरकार्यवाह (जनरल सेक्रेटरी) चुनने के चुनावों से पहले हो रही है, इसलिए मीटिंग में प्रांतों की जगह संभागों (डिवीज़न) के नए ऑर्गेनाइज़ेशनल स्ट्रक्चर को रोल आउट किया जाएगा.”
अपनी पहुंच बढ़ाने और ज़मीन पर लोगों की संख्या बढ़ाने के लिए, संघ प्रांत प्रचारकों की जगह संभाग (डिवीजन) प्रचारकों को ला रहा है. नए स्ट्रक्चर में प्रचारकों की संख्या 46 से बढ़कर 85 हो जाएगी, लेकिन केंद्र (स्टेट लेवल) 11 से घटकर नौ हो जाएंगे.

अगले साल होगा नए जनरल सेक्रेटरी का चुनाव

नवंबर में मीटिंग के बाद, स्टेट यूनिट नए कार्यकर्ता (स्टेट लेवल पर एग्जीक्यूटिव बॉडी), संभाग संघचालक (डिवीजन हेड), और क्षेत्र संघचालकों का चुनाव करेंगी, जो बदले में नए जनरल सेक्रेटरी का चुनाव करेंगे. पिछला चुनाव 2024 में हुआ था, जब मौजूदा दत्तात्रेय होसबोले दूसरे टर्म के लिए चुने गए थे.
हर टर्म तीन साल का होता है और किसी व्यक्ति को कितने भी टर्म मिल सकते हैं, इस पर कोई रोक नहीं है.

SIR और इलेक्शन कमीशन से जुड़ा विवाद पर भी होगी चर्चा

संघ के बड़े नेता मौजूदा राजनीतिक और पॉलिसी मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जैसे SIR और इलेक्शन कमीशन से जुड़ा विवाद और यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू करने को लेकर चिंताएं, जिनकी ज़मीनी स्तर पर ज़्यादा अहमियत है.

यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड देशभर में चाहता है संघ

संघ ने समय-समय पर एक जैसी आबादी की पॉलिसी और गैर-कानूनी नागरिकों की पहचान करने की मांग की है.
मंगलवार को, संघ के आउटरीच प्रमुख सुनील आंबेकर ने UCC और गैर-कानूनी निवासियों की पहचान करने के लिए नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स जैसे सिस्टम की ज़रूरत दोहराई.
राजधानी में एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं हो सकता जो एक वर्ग को चार बार शादी करने और दूसरे वर्ग पर इसके लिए मुकदमा चलाने की अनुमति दे.

संघ ने किया चुनाव आयोग और सरकार का बचाव

एसआईआर पर विवाद के बीच, आंबेकर ने कहा कि अगर मतदाता सूची में कुछ लोग मानदंडों का उल्लंघन करते हुए पाए जाते हैं, तो कार्रवाई करने और विसंगतियों को दूर करने के लिए कानूनी रूप से ठोस नीति होनी चाहिए.
उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में, अन्याय के खिलाफ रास्ता तलाशने के रास्ते हैं…लेकिन अगर चुनावी सूची में गलत लोग हैं, तो किसी के राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें इस देश के नागरिक के रूप में स्वीकार करना गलत है.”
यह टिप्पणी एसआईआर के संचालन के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं के बारे में मतदाताओं की शिकायतों और विपक्ष के आरोपों के मद्देनजर आई है कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार से प्रभावित है.

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