Thursday, January 22, 2026

शंकराचार्य विवाद के बीच याद आया ‘कालनेमी’, सीएम योगी ने बताया क्या होना चाहिये संतो का आचरण

Shankaracharya controversy :  प्रयागराज मे संगम के किनारे चल रहे माघ मेले के बीच शुरु हुए ‘शंकराचार्य कौन’  विवाद के बीच सीएम योगी ने एक बड़ा बयान दिया है. सीएम योगी ने कहा कि किसी साधु-संत के लिए धर्म से बड़ा कुछ और नहीं होता है. एक साधु  संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ और नहीं होना चाहिये, उनकी व्यक्तिगत कोई संपत्ति नहीं होती है बल्कि यही उसके जीवन के ध्येय होना चाहिये. धर्म ही उनकी संपत्ति और राष्ट्र ही उनका स्वाभिमान होना चाहिये.

 अपने भाषण के बीच सीएम योगी ने रामायण काल के एक राक्षस कालनेमी का जिक्र किया और कहा कि “ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे, हमें उनसे सावधान रहना होगा…’

Shankaracharya controversy : बिना नाम लिये योगी ने दिया कड़ा संदेश

सीएम योगी ने हालांकि किसी का नाम नहीं लिया, ना ही किसी विवाद की चर्चा की लेकिन उन्होंने जो कुछ कहा उसे शंकराचार्य विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है. सीएम योगी ने धर्म, राष्ट्र और सनातन पर तीखा और स्पष्ट संदेश दिया है. उन्होने कहा कि धर्म की आड़ लेकर सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं और समाज को ऐसे लोगों से सतर्क रहना चाहिये. योगी ने समाज में मौजूद ऐसे तत्वों को इस काल का ‘कालनेमि’ करार देते हुए कहा कि ऐसे लोग बाहर से धार्मिक दिखते तो हैं, लेकिन भीतर से धर्मविरोधी एजेंडे पर काम करते हैं.

सीएम योगी ने कहा कि जो व्यक्ति धर्म के खिलाफ आचरण करता है, चाहे वो किसी भी रूप में क्यों न हो, उसे सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता.

 स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद से जुड़ा है विवाद 

दरअसल सीएम योगी के इस बयान को स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद के बयानों और उनके धरना प्रदर्शन से जोड़ कर देखा जा रहा है.माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान के समय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों  के साथ हुई मारपीट के बाद जो विवाद शुरु हुआ है वो शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद ने सीएम योगी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और लगातार बयान दे रहे हैं कि उन्हें सरकार के इशारे पर परेशान किया जा रहा है.

ऐसे में सीएम योगी ने बिना नाम लिये साधु संतो के कार्यो के बारे में कहा कि धर्म उनके आचरण में दिखना चाहिए. सीएम योगी ने लोगों से अपील की कि लोगों से सावधान रहना चाहिये जो साधु संतों के वेश में रहकर धर्म विरोधी आचरण करते हैं.  उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने हमेशा सत्य, संयम और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है और इसी मार्ग पर चलना ही उसकी सच्ची सेवा है.

कौन था कालनेमी,क्यों योगी ने किया उसका जिक्र ?

सीएम योगी ने उन साधु संतो को कालनेमी करार दिया जो आवरण तो धर्म का ओढ़कर रखे हैं लेकिन वास्तव में धर्म के मुताबिक आचरण नहीं करते हैं.कालनेमी त्रेतायुग में एक ऐसा राक्षस था, जो एक मायावी था. वो उपर से तो साधु की तरह रहता था लेकिन था उसका व्यवहार में असुर था. उसने साधु का वेश धारण करके भगवान हनुमान को भी भ्रमित करने की कोशिश की थी. उसका वेश तो धर्मात्मा की तरह का था लेकिन उसका असल काम भगवान श्रीराम के राम के कार्य में बाधा डालना था. अंततः हनुमानजी ने एक महात्मा के वेश मे छिपे असुर को पहचान लिया और उसका वध कर दिया.

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