UP Panchayat Election : उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में हुई देरी पर गंभीर चिंता जताते हुए सरकार से पूरा रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए पंचायत चुनाव की तैयारी कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम दो वर्ष पहले शुरू कर दी जानी चाहिए, ताकि संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव संपन्न कराए जा सकें.
UP Panchayat Election : सरकार से मांगा पूरा रिकॉर्ड
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव क्यों नहीं कराए जा सके.
अदालत यह भी जानना चाहती है कि क्या चुनाव में देरी के पीछे ऐसी परिस्थितियां थीं जो सरकार के नियंत्रण से बाहर थीं, या फिर सरकार समय पर चुनाव कराने के अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करने में विफल रही.
संविधान का हवाला देकर कोर्ट की टिप्पणी
पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और इसके समाप्त होने से पहले नए प्रतिनिधियों का चुनाव कराया जाना आवश्यक है.
अदालत ने कहा कि इस संवैधानिक व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने के लिए चुनाव प्रक्रिया समय रहते शुरू की जानी चाहिए, ताकि प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से चुनाव टालने की नौबत न आए.
26 मई को समाप्त हो चुका है पंचायतों का कार्यकाल
उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है. इसके बावजूद अभी तक नई पंचायतों के गठन के लिए चुनाव नहीं कराए जा सके हैं, जिस पर अदालत ने गंभीर सवाल उठाए हैं.
इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी पेश करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने बताया कि उसने चुनाव प्रक्रिया में देरी से जुड़े कुछ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का अवलोकन किया है. अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई के दौरान ये रिकॉर्ड दोबारा पेश किए जाएं.
कोर्ट यह भी जांच करेगी कि मई 2025 में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद निर्धारित समय के भीतर चुनाव क्यों नहीं कराए जा सके.
11 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को तय की गई है। उस दिन राज्य सरकार को रिकॉर्ड के साथ अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा.
पहले मई-जून में प्रस्तावित थे चुनाव
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव पहले मई-जून में प्रस्तावित थे, लेकिन कई प्रशासनिक कारणों से प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी।
मुख्य वजहों में—
- अंतिम मतदाता सूची समय पर तैयार न होना.
- 10 जून को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होना.
- ओबीसी आयोग द्वारा जिलावार सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन की समीक्षा.
- आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होने में देरी.
इन्हीं कारणों से पंचायत चुनाव की अधिसूचना समय पर जारी नहीं हो सकी.
अब क्या होगा?
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब राज्य सरकार को यह बताना होगा कि चुनाव में हुई देरी किन कारणों से हुई और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे. 11 अगस्त की सुनवाई में सरकार के जवाब और अदालत की आगे की टिप्पणी पर सभी की नजर रहेगी.

