गुरुवार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के 12% और 28% स्लैब को हटाने के प्रस्ताव पर मंत्रिसमूह (जीओएम) में चर्चा हुई. जानकारी के मुताबिक इस चर्चा में जीएमओ ने कुछ सुझावों का समर्थन किया, जिसके बाद अब इस से जुड़ा अंतिम प्रस्ताव विचार के लिए GST council के पास जाएगा. आपको बता दें, ये बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को युक्तिसंगत बनाने की घोषणा के बाद हुई.
अब जब एक बार जब यह कदम जीएसटी परिषद द्वारा पास हो जाएगा, तो मौजूदा चार स्लैब में से केवल 5% और 18% ही जीएसटी रहेगा. इसके अलावा अल्ट्रा-लक्जरी वस्तुओं के लिए 40% का नया स्लैब पेश किया जा सकता है.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण है GST council की अध्यक्ष
जीएसटी परिषद, जिसका नेतृत्व केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कर रही हैं और जिसमें सभी राज्यों के मंत्री सदस्य हैं, राज्यों के हिस्से और राजस्व हानि के मुआवजे से संबंधित प्रश्नों सहित फीडबैक पर विचार करेगी.
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “सभी ने केंद्र द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर सुझाव दिए. कुछ राज्यों ने कुछ टिप्पणियां कीं। इसे जीएसटी परिषद को भेज दिया गया है.” चौधरी जीएसटी परिषद द्वारा गठित क्षतिपूर्ति उपकर, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा तथा दर युक्तिकरण पर मंत्री समूह के संयोजक हैं.
‘राजस्व हानि और राज्यों को मुआवज़ा’ पर स्पष्टता नहीं
एक अन्य सदस्य, पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने संवाददाताओं से कहा, “मैंने बैठक में यह मुद्दा उठाया कि अगर राज्यों को राजस्व का नुकसान हो रहा है… तो हम जानना चाहते हैं कि हमें मुआवज़ा कैसे मिलेगा. मंत्री समूह अब हमारी चिंताओं के साथ जीएसटी परिषद को अपनी रिपोर्ट भेजेगा.”
उन्होंने आगे कहा, “हमें नहीं पता कि जीएसटी दर में इस कटौती से राजस्व का कितना नुकसान होगा. उन्होंने अभी तक इसका आकलन नहीं किया है. जीएसटी परिषद में हमें इसकी जानकारी मिल जाएगी.”
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने भी पीटीआई-भाषा से कहा, “केंद्र में दिए गए प्रेजेंटेशन में यह नहीं बताया गया कि कितना नुकसान हो रहा है. लेकिन हमारा कहना है कि आम लोगों को इसका लाभ मिलना चाहिए.”
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 15 अगस्त को लाल किले से की गई घोषणा के अनुसार, 12% और 28% की कर दरों को समाप्त करने का कदम कर व्यवस्था को सरल बनाने तथा विवादों को कम करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है.

