Wednesday, March 4, 2026

NCR में पड़ रही है कड़ाके की ठंड, गुरुग्राम में तापमान 0.8°C दर्ज किया गया

इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) के मुताबिक, बुधवार को गुरुग्राम में ठंड का प्रकोप cold wave और बढ़ गया और शहर का न्यूनतम तापमान 0.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे यह उत्तर भारत की सबसे ठंडी जगहों में से एक बन गया.

टूट रहा है 5 दश्कों का रिकॉर्ड

सोमवार को गुरुग्राम में तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था , जबकि मंगलवार और बुधवार को भी लोग कड़ाके की ठंड से परेशान रहे, जो पिछले लगभग पांच दशकों में सबसे कम तापमान था और कई हिमालयी हिल स्टेशनों से भी ज़्यादा ठंडा था.
IMD के ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन ने सोमवार को 0.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया, जो शहर में 22 जनवरी, 1977 के सबसे कम तापमान के बराबर था. शहर में रिकॉर्ड के अनुसार सिर्फ़ तीन बार इससे ज़्यादा ठंड पड़ी है – 5 दिसंबर, 1966 को माइनस 0.4 डिग्री सेल्सियस, 11 जनवरी, 1970 को 0 डिग्री सेल्सियस और 22 जनवरी, 1979 को 0.3 डिग्री सेल्सियस.

cold wave, पहाड़ियों से ज़्यादा ठंडे मैदान

ठंड की लहर नेशनल कैपिटल रीजन और उत्तर-पश्चिम भारत के ज़्यादातर हिस्सों में फैल गई है. दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन पर बुधवार को 3.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया, जबकि दूसरे मैदानी इलाकों में भी तापमान फ्रीजिंग पॉइंट के करीब रहा.
इसके उलट, हिल स्टेशन काफी गर्म थे, मसूरी में तापमान 7.7 डिग्री सेल्सियस और शिमला में 8.8 डिग्री सेल्सियस था.
इस असामान्य पैटर्न के बारे में बताते हुए, IMD के डायरेक्टर जनरल एम मोहपात्रा ने कहा कि एक्टिव वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से पहाड़ियों पर बादल छाए रहने से रात में गर्मी बाहर नहीं निकल पाई. उन्होंने कहा, “ऊंचाई वाले इलाकों में रात में बादल छाए हुए थे, इसीलिए वहां न्यूनतम तापमान ज़्यादा रहा.” हालांकि, मैदानी इलाकों में साफ आसमान और लगातार चलने वाली ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण ज़बरदस्त रेडिएटिव कूलिंग हुई, जिससे तापमान तेज़ी से नीचे गिर गया.

पाला, कोहरा और खतरनाक हालात

कड़ाके की ठंड के निशान गुरुग्राम और उसके आस-पास के इलाकों में साफ दिखे, फसलों, घास के मैदानों और कारों के विंडशील्ड पर पाला जम गया था.
सेक्टर 66 के 22 साल के साइट इंजीनियर जीवा थवासिराज ने कहा कि ऐसी ठंड उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं की. उन्होंने कहा, “मैं तमिलनाडु से हूं और मैंने इस तरह की ठंड कभी महसूस नहीं की. भारी सेफ्टी शूज़ पहनने के बाद भी हमारे पैर सुन्न हो जाते हैं.”
सोहना से रोज़ आने-जाने वाली सुनीता देवी ने कहा कि घने कोहरे और पाले की वजह से यात्रा करना खतरनाक हो गया है. उन्होंने कहा, “हमारी बस के विंडशील्ड और खेतों में फसलों पर पाला जमा हुआ था. एलिवेटेड सड़कों पर विजिबिलिटी बहुत कम थी, और गाड़ियों को धीरे चलना पड़ रहा था.”

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