3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा, 5 तारीख तक खाते में आएगी सैलरी,40 लाख तक बीमा कवर

UP Outsource Service Corporation लखनऊ ( 2 सितंबर) :  उत्तर प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बुधवार को बड़ा कदम उठाया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ किया. इसके साथ ही यूपीकॉस (UPCOS) पोर्टल और वेबसाइट लॉन्च की गई तथा निगम के लोगो का अनावरण किया गया.

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आउटसोर्स कर्मचारियों को बढ़े हुए पारिश्रमिक के चेक वितरित किए. सरकार के मुताबिक नई व्यवस्था का सीधा लाभ प्रदेश के 3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को मिलेगा. उनके परिवारों को जोड़ें तो करीब 17 से 20 लाख लोगों तक सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का लाभ पहुंचने का दावा किया गया है.

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UP Outsource Service Corporation:एजेंसी की मर्जी पर निर्भर नहीं होगा आउटसोर्स कर्मचारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले आउटसोर्स व्यवस्था में कर्मचारी, एजेंसी और सरकारी विभाग के बीच उलझा रहता था. कर्मचारी अपनी समस्या लेकर अलग-अलग जगह जाता था, लेकिन कई बार उसकी सुनवाई नहीं होती थी.

नई व्यवस्था में कर्मचारी की भर्ती, पोस्टिंग, उपस्थिति, पारिश्रमिक, EPF, ESI, बीमा और अन्य सेवा लाभों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी. कर्मचारी अपने सेवा संबंधी विवरण और भुगतान की जानकारी ऑनलाइन देख सकेगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब अधिकार किसी व्यक्ति की कृपा पर नहीं, बल्कि श्रेणी और शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप निर्धारित व्यवस्था के आधार पर सुनिश्चित होगा.

हर महीने 5 तारीख तक खाते में पहुंचेगा पैसा

नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत सीधे बैंक खाते में पारिश्रमिक भुगतान है. मुख्यमंत्री के मुताबिक हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच आउटसोर्स कर्मचारियों का पारिश्रमिक सीधे उनके बैंक खाते में भेजा जाएगा.

इसके साथ ही EPF और ESI का अंशदान भी नियमित रूप से जमा होगा. खास बात यह है कि सरकार आउटसोर्स एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, इसलिए कर्मचारी के पारिश्रमिक से एजेंसी सर्विस चार्ज के नाम पर कटौती नहीं कर सकेगी.

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नौकरी से निकालने में भी एजेंसी की मनमानी नहीं चलेगी

योगी सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा को लेकर भी बड़ा प्रावधान बताया है.अब कोई आउटसोर्स एजेंसी अपनी मर्जी से कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाल सकेगी.

अगर किसी कर्मचारी को हटाने की जरूरत बताई जाती है तो पहले सरकार को इसकी जानकारी देनी होगी. इसके बाद मामले की जांच होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि एजेंसी की रिपोर्ट गलत पाई जाती है तो कर्मचारी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा.

40 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा

उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के जरिए कर्मचारियों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा देने की बात कही गई है. मुख्यमंत्री के मुताबिक SBI के साथ हुए समझौते के तहत घटना, दुर्घटना या आपदा की स्थिति में निर्धारित श्रेणी के अनुसार परिवार को 20 से 40 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा.

इसके अलावा योजना में कई अन्य सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया है—

  • अग्निकांड की स्थिति में 10 लाख रुपये तक
  • आकस्मिक दवा के लिए 5 लाख रुपये तक
  • आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपये तक
  • बेटे की शिक्षा के लिए 8 लाख रुपये तक
  • बेटी की शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक
  • दो पुत्रियों के विवाह के लिए 8 से 10 लाख रुपये तक
  • कर्मचारी की मृत्यु पर परिजनों को बैंक के माध्यम से तत्काल 50 हजार रुपये
  • जीरो बैलेंस पर बैंक खाता
  • परिवार के चार सदस्यों के लिए विशेष बैंकिंग सुविधाएं
परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा भी

मुख्यमंत्री ने कहा कि ESI के माध्यम से कर्मचारियों और उनके परिवार को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी,जहां ESI अस्पताल में उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, वहां आयुष्मान भारत योजना से भी जोड़ा जायेगा.

इससे आउटसोर्स कर्मचारी और उनके परिवार को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलने का दावा किया गया है. इसके अलावा मातृत्व अवकाश सहित अन्य वैधानिक सेवा लाभ भी सुनिश्चित करने की बात कही गई.

भर्ती प्रक्रिया होगी ऑनलाइन और पारदर्शी

निगम के माध्यम से आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया को भी डिजिटल और पारदर्शी बनाने की योजना है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आरक्षण नीति के अनुरूप योग्यता और मेरिट के आधार पर ऑनलाइन भर्ती होगी.

भर्ती से लेकर पोस्टिंग और उपस्थिति तक की जानकारी डिजिटल सिस्टम में दर्ज होगी. कर्मचारी अपने अकाउंट, उपस्थिति, भुगतान और कटौती की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर देख सकेगा.

शिकायत दर्ज कराने और उसके निस्तारण के लिए भी ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की गई है.

‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ के बाद एजेंसियों पर प्रहार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों की आउटसोर्स व्यवस्था पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 से पहले आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बनाई गई व्यवस्था में सत्ताधारी लोगों के करीबियों की कंपनियों का प्रभाव था और कर्मचारियों का शोषण होता था.

योगी ने कहा कि सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों को बोझ नहीं बल्कि मानव संसाधन के रूप में संपत्ति माना है. उनके मुताबिक अब एजेंसियों के माध्यम से होने वाले शोषण पर भी प्रहार किया जाएगा.

उन्होंने इसे ‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ के बाद आउटसोर्स व्यवस्था में मौजूद कथित तीसरे सिंडिकेट पर कार्रवाई के रूप में पेश किया.

‘मानव श्रम की गरिमा कभी खत्म नहीं होगी’

मुख्यमंत्री ने कहा कि AI, ऑटोमेशन और नई अर्थव्यवस्था के दौर में काम करने का तरीका बदल रहा है, लेकिन मानव श्रम की गरिमा कभी खत्म नहीं होगी.

उन्होंने कहा कि तकनीक जितनी आगे जाएगी, शासन को उतना ही मानवीय होना पड़ेगा. आउटसोर्स सेवा निगम इसी सोच के तहत कर्मचारियों को संगठित, कुशल, सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यबल में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को नौकरी का दावा

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रोजगार को लेकर भी बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि अगले छह महीने में एक लाख नए युवाओं को सरकारी नौकरी देने की दिशा में काम किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि 2017 से पहले भर्ती प्रक्रिया पेपर लीक जैसी समस्याओं से प्रभावित होती थी, लेकिन अब भर्ती बोर्ड और आयोगों में बदलाव कर पारदर्शी व्यवस्था विकसित की गई है.

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में अब तक यूपी पुलिस में 2.25 लाख भर्तियां की गई हैं. 2017 से पहले पुलिस में करीब 10 हजार महिला कार्मिक थीं, जबकि अब यह संख्या करीब 44 हजार हो गई है.

96 लाख MSME यूनिट और 3.15 करोड़ रोजगार का दावा

योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में करीब 96 लाख MSME इकाइयां हैं, जिनसे 3.15 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं. सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम और निवेश के लिए नई व्यवस्थाएं लागू की हैं.

उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में करीब 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं और बड़े उद्योगों की संख्या में भी वृद्धि हुई है.

उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम की शुरुआत को योगी सरकार ने प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सेवा अधिकारों की दिशा में बड़ा सुधार बताया है. सीधे बैंक खाते में पारिश्रमिक, EPF-ESI, बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा, डिजिटल सेवा रिकॉर्ड और नौकरी से हटाने में एजेंसियों की मनमानी पर रोक जैसे प्रावधान इस नई व्यवस्था के प्रमुख बिंदु हैं.

अब बड़ा सवाल इसके जमीनी स्तर पर प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन का होगा. यदि घोषित व्यवस्थाएं उसी तरह लागू होती हैं जैसा सरकार ने बताया है, तो प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मियों की वर्षों पुरानी वेतन, सुरक्षा और एजेंसी संबंधी शिकायतों में बड़ा बदलाव आ सकता है.

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