सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा के आरोपियों के खिलाफ NSA का आदेश रद्द किया, यूपी सरकार पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नवंबर 2024 में हुई संभल मस्जिद हिंसा Sambhal violence से जुड़े एक व्यक्ति के खिलाफ नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत जारी प्रिवेंटिव डिटेंशन ऑर्डर को रद्द कर दिया और उत्तर प्रदेश सरकार पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया.

कबूली बयान प्रिवेंटिव डिटेंशन का एकमात्र आधार नहीं: कोर्ट

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने अक्टूबर 2025 में संभल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के जारी किए गए डिटेंशन ऑर्डर को रद्द कर दिया. बेंच ने कहा कि राज्य अधिकारियों द्वारा दिया गया कबूलनामा किसी नागरिक को प्रिवेंटिव डिटेंशन में रखने का एकमात्र कारण नहीं हो सकता.

यूपी सरकार पर लगाया 10 लाख का जुर्माना

बेंच ने कहा, “अधिकारियों ने डिटेंशन की शक्ति का गैर-कानूनी तरीके से इस्तेमाल किया. डिटेन करने वाले अधिकारियों ने सही बातों पर ध्यान नहीं दिया. 13 अक्टूबर, 2025 को जारी डिटेंशन का ऑर्डर रद्द किया जाता है और राज्य पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया जाता है.”

Sambhal violence: क्या है मुल्ला अफरोज की गिरफ्तारी से जुड़ा पूरा मामला

यह फैसला मुल्ला अफरोज की याचिका पर आया, जिन्हें 24 नवंबर, 2024 को संभल में शाही जामा मस्जिद के कोर्ट के आदेश पर हुए सर्वे के दौरान हुई हिंसा के बाद हिरासत में लिया गया था. सर्वे का आदेश हिंदू याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर एक मुकदमे में दिया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद एक मंदिर के ऊपर बनाई गई थी. इसके बाद हुई झड़पों में चार लोग मारे गए थे.
अफ़रोज़ की तरफ़ से पेश हुए वकील दिव्येश प्रताप सिंह ने कहा कि पिटीशनर को टॉर्चर किया गया और नकली एनकाउंटर की धमकी देकर पुलिस के सामने कबूलनामा करने के लिए मजबूर किया गया. पुलिस ने घटना के लगभग 54 दिन बाद अफ़रोज़ की गिरफ़्तारी दिखाई, और उसे सिर्फ़ पुलिस कस्टडी में दिए गए कथित कबूलनामे के आधार पर फंसाया. उन्होंने कहा कि पुलिस ने उसके पास से .32 बोर की पिस्तौल ज़ब्त करने का भी दावा किया.
लेकिन फ़ोरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार, जिस आदमी पर पिटीशनर पर हत्या का आरोप था, उसकी मौत .315 बोर की बंदूक से लगी चोटों के कारण हुई.
जब अफ़रोज़ कस्टडी में था, तब संभल के DM ने NSA, 1980 की धारा 3(2) के तहत डिटेंशन ऑर्डर पास किया. इस ऑर्डर को राज्य सरकार ने मंज़ूरी दे दी और डिटेंशन ऑर्डर को चुनौती देने वाली अफ़रोज़ की रिप्रेज़ेंटेशन को केंद्र सरकार समेत कई अधिकारियों ने खारिज कर दिया.

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