Ravi Tamta Flying Car : नई दिल्ली/अल्मोड़ा : अगर दृढ़ संकल्प, मेहनत और जुनून हो तो सीमित संसाधन भी बड़ी उपलब्धियों के रास्ते में बाधा नहीं बनते. उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने इसे सच साबित कर दिखाया है. करीब 10 वर्षों की लगातार मेहनत के बाद उन्होंने HAPIDA SKYNeX नाम की एक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल (Personal Flying Vehicle) विकसित की है. रवि का दावा है कि यह भारत में अपनी तरह की पहली पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल है.
बधाई उत्तराखंड!
अल्मोड़ा के युवा नवप्रवर्तक रवि टम्टा और उनकी टीम ने HAPIDA SKYNeX के प्रोटोटाइप का सफल प्रारंभिक परीक्षण कर एक बड़ा संदेश दिया है—सपनों की उड़ान संसाधनों से नहीं, संकल्प से तय होती है।
कम संसाधनों में Personal Sky Mobility की दिशा में यह प्रयास सराहनीय है। यदि… pic.twitter.com/OJsrktA5jL
— Ramesh Bhatt (@Rameshbhimtal) August 7, 2026
हाल ही में उन्होंने अल्मोड़ा के एक मैदान में इसका सफल प्रारंभिक परीक्षण भी किया। इस उपलब्धि के बाद रवि और उनकी टीम की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है।
Ravi Tamta Flying Car:10 साल की मेहनत के बाद मिली सफलता
रवि टम्टा ने बताया कि फ्लाइंग कार बनाने का सपना उन्होंने करीब एक दशक पहले देखा था. सीमित संसाधनों और कई तकनीकी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार प्रयोग, डिजाइन में बदलाव और परीक्षण के बाद आखिरकार उनकी टीम इस प्रोटोटाइप को तैयार करने में सफल रही.
उनका कहना है कि यह सफलता केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरी टीम की मेहनत और विश्वास का परिणाम है.
40 किलोमीटर का सफर सिर्फ 12 मिनट में
एक मीडिया प्लेटफॉर्म से बातचीत में रवि टम्टा ने बताया कि अल्मोड़ा के जिस मैदान में परीक्षण किया गया, वहां से उनके घर की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है.
उन्होंने कहा कि यदि सड़क मार्ग से यात्रा की जाए तो यह दूरी तय करने में करीब डेढ़ घंटा लगता है, लेकिन इस पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल की मदद से वही दूरी लगभग 12 मिनट में तय की जा सकती है.
रवि के मुताबिक, अभी यह शुरुआती चरण में है और कई तकनीकी परीक्षण तथा सरकारी स्वीकृतियां बाकी हैं.
अभी लेनी होगी जरूरी अनुमति
रवि टम्टा ने बताया कि फिलहाल उन्होंने केवल सीमित स्तर पर परीक्षण किया है. नियमित उड़ान शुरू करने से पहले नागरिक उड्डयन से जुड़ी आवश्यक मंजूरियां और सुरक्षा मानकों को पूरा करना जरूरी होगा.
उन्होंने कहा कि हवा में सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना जमीन पर वाहन चलाने की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है. इसलिए प्रत्येक परीक्षण बेहद सावधानी के साथ किया जा रहा है.
मेडिकल इमरजेंसी और ट्रैफिक जाम का समाधान बन सकती है तकनीक
रवि टम्टा का मानना है कि भविष्य में पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल आम लोगों के जीवन का हिस्सा बन सकती है. उन्होंने कहा कि इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा मेडिकल इमरजेंसी, पहाड़ी क्षेत्रों में तेज आवाजाही और भारी ट्रैफिक जाम जैसी परिस्थितियों में मिलेगा.
उनके अनुसार, यदि तकनीक पूरी तरह सफल होती है तो आने वाले वर्षों में लोगों के यात्रा करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है.
हर घर तक पहुंचाने का है सपना
रवि टम्टा का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल एक प्रोटोटाइप बनाना नहीं, बल्कि इस तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाना है.
उन्होंने विश्वास जताया कि अगले 8 से 10 वर्षों में पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल उतनी ही सामान्य हो सकती है, जितनी आज कार या दोपहिया वाहन हैं. उनकी टीम इसे किफायती बनाने और बड़े स्तर पर विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है.
परिवहन क्षेत्र में आ सकती है नई क्रांति
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि HAPIDA SKYNeX सभी तकनीकी और सुरक्षा परीक्षणों में सफल रहती है तथा नियामकीय मंजूरी प्राप्त कर लेती है, तो यह भारत में पर्सनल एयर मोबिलिटी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
रवि टम्टा की यह उपलब्धि न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है. यह साबित करती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर वैश्विक स्तर की तकनीक विकसित की जा सकती है.

