इलाज या जान का खतरा? मोकामा रेफरल अस्पताल की जर्जर छत बनी मुसीबत

मोकामा: बिहार सरकार की लाख दावों के बावजूद राज्य के सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत बेहद दयनीय बनी हुई है और कई अस्पताल चिकित्सा केंद्र कम बल्कि खतरे का घर अधिक प्रतीत होते हैं। मौजूदा स्थिति यह है कि अस्पतालों की जर्जर इमारतों से आए दिन छत की परतें, प्लास्टर और छज्जे टूटकर मरीजों तथा वहां कार्यरत डॉक्टरों के ऊपर गिर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के तमाम वादे और दावे पूरी तरह से कटघरे में खड़े नजर आ रहे हैं, जहां मरीज अपना इलाज कराने और स्वास्थ्यकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर अपनी ड्यूटी निभाने को विवश हैं। ऐसा ही एक ताजा और गंभीर मामला मोकामा के रेफरल अस्पताल से सामने आया है, जिसकी पूरी इमारत अपनी बदहाली के आंसू बहा रही है।

एक साल पहले दी गई चेतावनी के बावजूद नहीं जागा विभाग

मोकामा रेफरल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. वैद्यनाथ कुमार ने इस बात का खुलासा किया है कि उन्होंने लगभग एक साल पहले ही लिखित रूप से उच्चाधिकारियों को इस भवन की अत्यंत जर्जर और खतरनाक स्थिति से अवगत करा दिया था। उन्होंने पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जब पूर्व में एक स्थानीय मुखिया के परिजन अस्पताल में इलाज कराने आए थे, तब अचानक उनके ऊपर ही छत का छज्जा टूटकर गिर गया था। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर आज तक कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया, जिससे प्रशासनिक सुस्ती साफ तौर पर उजागर होती है।

मरीजों और अस्पताल कर्मियों पर गिर रहा छतों का प्लास्टर

अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के अनुसार स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि आए दिन छत का प्लास्टर उखड़कर वहां आने वाले मरीजों और अंदर काम करने वाले कर्मचारियों के ऊपर गिरता रहता है। हाल ही में हुई एक ऐसी ही दुर्घटना में अस्पताल का एक एक्स-रे टेक्नीशियन भी गंभीर रूप से घायल हो गया था। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अस्पताल के वेटिंग एरिया में हमेशा मरीजों

Latest news

Related news