बिहार में कांग्रेस-आरजेडी के बीच बढ़ी दूरी, विधान परिषद चुनाव में अलग-अलग लड़ने के संकेत

पटना।  बिहार की राजनीति में महागठबंधन के प्रमुख घटक दल कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के बीच दूरी बढ़ती दिखाई दे रही है। दोनों दलों के बीच अब विधान परिषद चुनाव को लेकर भी तालमेल नहीं बन पाया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस और आरजेडी इस चुनाव में साथ मिलकर उम्मीदवार उतारने के बजाय अलग-अलग चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
विधान परिषद चुनाव में सीटों और उम्मीदवारों को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति नहीं बन पाना विपक्षी गठबंधन के लिए अहम राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे पहले भी बिहार में कांग्रेस और आरजेडी के बीच सीट बंटवारे और राजनीतिक रणनीति को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं।
आरजेडी बिहार में विपक्षी राजनीति की प्रमुख ताकत है, जबकि कांग्रेस भी महागठबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। विधानसभा में दोनों दलों के विधायक विपक्षी खेमे का हिस्सा हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक बिहार विधानसभा में आरजेडी के 25 और कांग्रेस के 6 विधायक हैं।
विधान परिषद चुनाव में दोनों दलों का अलग-अलग मैदान में उतरना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे महागठबंधन के भीतर आपसी तालमेल को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। राजनीतिक जानकार इसे भविष्य की चुनावी रणनीति के संकेत के तौर पर भी देख रहे हैं।
हालांकि, दोनों दलों के बीच दूरी का मतलब तत्काल गठबंधन टूटना नहीं माना जा सकता। बिहार की राजनीति में चुनाव दर चुनाव सीटों और उम्मीदवारों को लेकर सहयोगी दलों के बीच खींचतान होती रही है। ऐसे में विधान परिषद चुनाव को लेकर अलग रणनीति अपनाना स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और उम्मीदवार चयन से भी जुड़ा हो सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विधान परिषद चुनाव में अलग राह अपनाने का असर कांग्रेस और आरजेडी के व्यापक राजनीतिक संबंधों पर पड़ेगा। आने वाले दिनों में दोनों दलों के नेताओं के बयान और सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा से तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

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