Bihari laborers Migration पटना: गुजरात से बिहार के लाखों मजदूरों की वापसी के मुद्दे पर बिहार में सियासत तेज हो गई है. बिहार कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को रोजगार के सवाल से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल और राज्य की एनडीए सरकार पर निशाना साधा है. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और मीडिया एवं प्रचार विभाग के चेयरमैन डॉ. अजय कुमार पासवान ने आरोप लगाया कि बिहार में पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों में काम करने के लिए मजबूर हैं.

कांग्रेस नेता ने गुजरात से 10 लाख बिहारी मजदूरों के संभावित लौटने को लेकर चल रही चर्चा का हवाला देते हुए कहा कि यह स्थिति विकास और रोजगार से जुड़े दावों पर सवाल खड़े करती है. हालांकि, मजदूरों की वापसी की संख्या और इसके पीछे के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है.
Bihari laborers Migration:’गुजरात मॉडल की हकीकत सामने आई’: कांग्रेस
डॉ. अजय कुमार पासवान ने अपने बयान में गुजरात के विकास मॉडल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात की आर्थिक चमक-दमक को देशभर में विकास के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया, लेकिन वहां काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की परिस्थितियां अलग तस्वीर दिखाती हैं.
कांग्रेस प्रवक्ता के मुताबिक, गुजरात से मजदूरों के बिहार लौटने के लिए कथित तौर पर चलाए जा रहे ‘गांव चलो अभियान’ का मुद्दा रोजगार, वेतन और काम के घंटों से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि यदि मजदूरों को उचित वेतन और बेहतर कामकाजी परिस्थितियां नहीं मिलती हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है.
20 साल के एनडीए शासन पर रोजगार को लेकर सवाल
बिहार कांग्रेस ने राज्य में करीब दो दशक से एनडीए शासन का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा नहीं किए गए. पार्टी का कहना है कि इसी वजह से बिहार के लाखों लोगों को गुजरात सहित दूसरे राज्यों में काम की तलाश में जाना पड़ा.
डॉ. पासवान ने भाजपा और जदयू को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि राज्य में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने के लिए गंभीर पहल नहीं की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों में फैक्ट्रियों में काम करने वाले बिहार के मजदूरों को शोषण और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.
लौटने वाले मजदूरों के लिए बिहार में रोजगार की मांग
कांग्रेस ने बिहार सरकार से मांग की कि दूसरे राज्यों से वापस लौटने वाले मजदूरों के लिए रोजगार की व्यवस्था की जाए. पार्टी का कहना है कि यदि मजदूर अपने गांव और राज्य लौटते हैं, तो उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है.
डॉ. अजय कुमार पासवान ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अब तक ऐसे मजदूरों के पुनर्वास और रोजगार को लेकर पर्याप्त तैयारी नहीं दिखाई है. उन्होंने सरकार से ऐसी योजनाएं बनाने की मांग की, जिनके जरिए लौटने वाले मजदूरों को स्थानीय स्तर पर काम मिल सके और उन्हें दोबारा पलायन के लिए मजबूर न होना पड़े.
मोदी और सम्राट चौधरी पर भी साधा निशाना
कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों में काम करने वाले बिहार के मजदूरों की समस्याओं को लेकर सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही है.
उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को अपने ही राज्य में रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए. कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी लगातार रोजगार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं,क्योंकि पार्टी के अनुसार मौजूदा सरकारों की नीतियों का असर आम लोगों के भविष्य पर पड़ता है.
पलायन और रोजगार बना राजनीतिक बहस का मुद्दा
गुजरात से बिहार लौटने वाले मजदूरों का मुद्दा अब रोजगार, वेतन और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है. कांग्रेस इसे एनडीए सरकार की रोजगार नीति की विफलता बता रही है, जबकि इस मामले की पूरी तस्वीर समझने के लिए मजदूरों की वापसी के वास्तविक आंकड़ों, उनके लौटने के कारणों और संबंधित राज्यों की रोजगार नीतियों से जुड़ी जानकारी जरूरी है.
फिलहाल, बिहार कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं. अब देखना होगा कि बिहार सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और दूसरे राज्यों से लौटने वाले श्रमिकों के लिए रोजगार एवं पुनर्वास की क्या व्यवस्था करती है.

