रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की बहुचर्चित कनीय विद्युत अभियंता नियुक्ति परीक्षा के पेपर लीक मामले में पुलिस अनुसंधान के दौरान एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। झारखंड डिप्लोमा स्तर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के बहुप्रतीक्षित प्रश्नपत्र लीक कांड का मुख्य मास्टरमाइंड और सूत्रधार कोई और नहीं, बल्कि परीक्षा संचालन की कमान संभालने वाली निजी एजेंसी मेसर्स बिंसिस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड का पूर्व निदेशक अरुण कुमार उर्फ अरुण शर्मा निकला है। प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुका अरुण इस पूरे षड्यंत्र में प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर डिजिटल डेटा लीक करने वाले शातिर सिंडिकेट का संचालन कर रहा था।
मुंबई से हुई थी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
रांची पुलिस द्वारा अपर न्यायायुक्त की विशेष अदालत में प्रस्तुत की गई विस्तृत केस डायरी में इस पूरे हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट की परते उधेड़ दी गई हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, इस मामले के मुख्य आरोपी अरुण कुमार को गत सात अगस्त को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के दौरान जब जांच का दायरा बढ़ा तो यह बात भी सामने आई कि आरोपी ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में भी प्रश्नपत्र लीक कराने, ओएमआर शीट से छेड़छाड़ करने और गंभीर अनियमितताएं बरतने में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इन तमाम तथ्यों के प्रकाश में सीआईडी ने भी जेपीएससी से जुड़े मामलों में उसे आरोपी बनाया और रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की, जिसमें यह बात साबित हुई कि उसने कथित तौर पर अनुचित तरीकों का इस्तेमाल कर अपनी ही एजेंसी को जेपीएससी की परीक्षाओं के संचालन का ठेका दिलवाया था।
इस्तीफे का नाटक और पर्दे के पीछे से एजेंसी का संचालन
रांची के नामकुम थाने में वर्ष 2022 के दौरान दर्ज कराए गए मुकदमे की केस डायरी में अरुण कुमार की संलिप्तता का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोला गया है। पुलिस अनुसंधान में यह तथ्यात्मक जानकारी मिली है कि अरुण कुमार ने 26 अगस्त 2019 को ही आधिकारिक कागजों में बिंसिस टेक्नोलॉजी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था, परंतु उसका यह त्यागपत्र महज एक दिखावा साबित हुआ। पद छोड़ने के पश्चात भी कंपनी के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज पर उसी का वर्चस्व और नियंत्रण बना हुआ था। इस बात की पुष्टि जेएसएससी के तत्कालीन सचिव अशोक कुमार खेतान और परीक्षा नियंत्रक सह उप सचिव मधुमिता कुमारी द्वारा दर्ज कराए गए बयानों से भी होती है। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने बयानों में स्पष्ट किया कि कनीय विद्युत अभियंता परीक्षा से संबंधित हर एक अति-गोपनीय बैठक में अरुण कुमार ही एजेंसी के तत्कालीन आधिकारिक निदेशक अजित कुमार के साथ बैठक में सम्मिलित होता था।
प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर परिणाम तक का नियंत्रण
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा उक्त एजेंसी को परीक्षा प्रक्रिया के कई अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण कार्य सौंपे गए थे, जिसमें मुख्य रूप से प्रश्नपत्रों की छपाई, परीक्षा केंद्रों पर आने वाले अभ्यर्थियों की बायोमीट्रिक और फोटोग्राफिक उपस्थिति दर्ज करना, ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, डेटा प्रोसेसिंग और अंत में मेरिट लिस्ट तैयार करना शामिल था। पुलिस के अनुसार, अरुण कुमार की इन सभी गोपनीय और तकनीकी प्रक्रियाओं तक सीधी पहुंच थी। इसी विशेषाधिकार का दुरुपयोग करते हुए उसने तीन जुलाई 2022 को निर्धारित परीक्षा से पहले ही सीलबंद प्रश्नपत्र को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप के माध्यम से लीक कर दिया, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था तार-तार हो गई।
गुप्त ठिकानों पर अभ्यर्थियों को रटवाए गए थे उत्तर
इस आपराधिक षड्यंत्र में लिप्त अन्य गिरफ्तार आरोपियों, जिनमें अभिषेक कुमार और अभ्यर्थी पंकज कुमार मंडल शामिल हैं, ने पुलिस की पूछताछ के दौरान कई सनसनीखेज खुलासे किए। उनके बयनों से यह बात स्पष्ट हुई कि अरुण कुमार और उसके सहयोगियों ने विभिन्न अभ्यर्थियों से पंद्रह-पंद्रह लाख रुपये या उससे भी अधिक की भारी-भरकम रकम वसूल कर उन्हें हल किए हुए प्रश्नपत्र मुहैया कराए थे। योजना के तहत परीक्षा से ठीक पहले अभ्यर्थियों को अलग-अलग गोपनीय ठिकानों पर ले जाया जाता था और उन्हें लीक हुए प्रश्नपत्रों के सटीक उत्तर रटवाए जाते थे ताकि वे परीक्षा हॉल में आसानी से सफलता प्राप्त कर सकें। पुलिस ने इन सभी ठोस साक्ष्यों और बयानों को आधार बनाते हुए अपनी केस डायरी में अरुण कुमार को इस संगठित पेपर लीक सिंडिकेट का मुख्य सरगना करार दिया है।

