बक्सर में किसानों के घर में आधी रात घुस कर लाठीचार्ज (Buxar violence) करने वाली पुलिस पर आखिरकार कुछ कार्रवाई हुई है. DIG के आदेश पर बक्सर के थानेदार अमित कुमार को सस्पेंड कर लाइन हाजिर किया गया है. इसके साथ ही थाने की जिम्मेदारी निर्मल कुमार को सौंप दी गई हैं
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बीजेपी नेता सुशील कुमार ने की थी पुलिसकर्मियों के बर्खास्तगी की मांग
बक्सर हिंसा (Buxar violence) पर BJP नेता सुशील मोदी ने कहा, “रात 12 बजे किसी के घर जाकर लाठी चार्ज करना, जो कि कोई अपराधी नहीं थे सामान्य किसान थे, हो सकता है कि उनकी पुलिस के झड़प हुई हो लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि किसी की घर में पटाई कर दें. ऐसे पुलिसकर्मियों का तबादला नहीं उन्हें बर्खास्त करना चाहिए.”
इसके साथ ही सुशील मोदी ने कहा कि, “किसानों ने ही 600 एकड़ जमीन सरकार को दी है बाकी जमीन के लिए तत्काल के रेट अनुसार भुगतान हुआ है तो 2022 में 2013 के रेट पर क्यों भुगतान होगा?.”
कब और क्या है बक्सर हिंसा का मामला
बक्सर हिंसा (Buxar violence) की घटना मंगलवार रात (10 जनवरी) की है. बक्सर के मुफसिल थाना क्षेत्र के बनारपुर गांव में पुलिस किसान आंदोलनकारियों के घरों में घुसी और वहां मौजूद लोगों पर लाठियां बरसाना शुरु कर दिया. पुलिस ने महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शा. पुलिस पर आरोप है कि वो दरवाजे से नहीं दीवारें फांद कर घर में घुसी. पुलिस की कार्रवाई का निशाना थे वह किसान जो अपनी जमीन के उचित मुआवज़े के लिए चौसा थर्मल पावर पर प्रदर्शन कर रहे थे.
मंगलवार रात पुलिस कार्रवाई पर बुधवार (11 जनवरी ) लोगों का गुस्सा फूटा और बनारपुर गांव में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. ग्रामीण ने पुलिस पर पथराव किया और पुलिस की गाड़ियों को भी आग लगाई.

