Monday, January 26, 2026

पैसे की तंगी ने नहीं पढ़ने दिया इंजीनियरिंग फिर भी जुगाड़ से बना दिया फाइटर प्लेन, ये है ग्रामीण भारत का टैलेंट

मुजफ्फरपुर : कहते हैं ना जहां चाह वहीं राह..कई बार ये बातें सुनने में अच्छी नहीं लगती है क्योंकि कमियो का रोना रोने वालों की कमी नहीं है. लेकिन इसी दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपनी कमी को कभी अपने रास्ते का रोड़ा नहीं बनने दिया. हम आज आपको एक ऐसे युवक के कारनामें से रु-ब-रु कराने जा रहे हैं , जिसके पास भले ही इंजनीनियरिंग की डिग्री नहीं हो लेकिन उसके पास जो दिमाग ,जो समझ है वो किसी पढ़े लिखे एरोनॉटिकल इंजीनियर से कम नहीं है.  हम बात कर रहे हैं बिहार के मुजफ्फरपुर के रिक्की की. 21 साल का रिक्की एक गरीब परिवार का लड़का है लेकिन उसने जो कर दिखाया (fighter plane )है वो किसी बड़े इजीनियर को भी हैरत में डाल सकता है.

रिक्की ने अपन गांव में ही मिले सामानों से देशी जुगाड़ के साथ वो बना दिया जिसे बनाने के लिए बड़े बड़े कांट्रेक्ट किये जाते हैं, करोड़ों के डील किये जाते हैं.  मुजफ्फरपुर के सुजावलपुर गाँव के रहने वाले रिक्की ने देशी जुगाड़ से एक ऐसा फाइटर प्लेन (fighter plane )का माडल तैयार किया है जो जमीन से 30 फीट उपर तक उड़ सकता है. रिक्की ने मछली के डब्बे में प्रयोग होने वाले थर्मोकोल से F22 रैपटर मॉडल फाइटर प्लेन बनाया है. ये फाइटर प्लेन 30 फ़ीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है .

रिक्की के गांव के लोग उसके इस अविष्कार को देखकर हैरान हैं. जब रिक्की अपने हाथ से बने माडल फाइटर विमान को उड़ाता है तो गांव के लोग उसे देखने के लिए जमा हो जाते हैं.

रिक्की BA का छात्र है. उसके पिता गांव में ही साधारण लकड़ी का काम और साउंड सिस्टम का काम करते हैं. रिक्की 9वीं क्लास से ही कुछ नया बनाने का सोच रहा था, आखिरकार जब सोचा तो केवल एक सप्ताह में फायटर प्लेन बना डाला. इस माडल को बनाने में रिक्की के 7 से 8 हजार रूपये खर्च हुए हैं.

इस देशी इंजीनियर का परिवार अपने बच्चे के टेलैंट से खुश है लेकिन उन्हें अफसोस भी है कि पैसों की कमी के कारण वे लोग रिक्की तो इंजीनियरिंग की पढ़ाई नहीं करा पाये.   आर्थिक स्थिति ठीक नही थी इसलिए इंजीनियरिंग नहीं कर पाया. लेकिन कहते है ना कि सूरज की रौशनी को कौन दबा सकता है. अंघेरा छंटता है तो रौशनी आसमान पर छा ही जाती है. इस तरह रिक्की के परिवार, दोस्तो और खुद रिक्की को उम्मीद है कि एक दिन कुछ ऐसा होगा कि उसे कुछ बड़ा करने का अवसर मिलेगा और वो अपने टेलैंट से देश का नाम रौशन कर सकेगा.

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