CEC/ EC की नियुक्ति को ज्यादा पारदर्शिता बनाने को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. 2018 में दायर इस याचिका में मांग की गई थी कि चुनाव आयुक्त का चयन चीफ जस्टिस, पीएम और नेता विपक्ष की कमेटी को मिलकर करना चाहिए. इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर सरकार द्वारा सीधी नियुक्ति सही नहीं है.
5 जजों की संविधान पीठ ने 4 दिन तक मामले की सुनवाई की. जस्टिस के एम जोसफ की अध्यक्षता वाली बेंच के बाकी 4 सदस्य, सी टी रविकुमार, जस्टिस अजय रस्तोगी, अनिरुद्ध बोस और ऋषिकेश रॉय हैं. सुनवाई पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कोर्ट ने सभी पक्षों से 5 दिन में संक्षेप में लिख कर अपनी दलीलें कोर्ट में जमा करवाने को कहा.
2004 के बाद CEC के छोटे कार्यकाल पर उठाए सवाल
5 जजों की बेंच ने आज सरकार से पूछा कि ऐसा क्यों है कि 2004 के बाद किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 साल का नहीं रहा है. जबकि 1991 में बना ‘चीफ इलेक्शन कमिश्नर और इलेक्शन कमिश्नर (कंडीशंस ऑफ सर्विस) एक्ट, CEC का कार्यकाल 6 साल होने की बात कहता है. इसपर सरकार ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि CEC की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष है. जब तक कोई अधिकारी इस पद पर पहुंचता है, उसके रिटायरमेंट आयु में पहुंचने में 6 साल से काफी कम समय बचता है.
बुधवार को अरुण गोयल की नियुक्ति फाइल कोर्ट ने मंगवाई थी
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने 19 नवंबर को नियुक्त हुए चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति से जुड़ी फाइल केंद्र सरकार को कोर्ट में पेश करने को कहा था. फाइल को देखने के बाद कोर्ट ने सरकार से कई सवाल पूछे, कोर्ट ने जानना चाहा कि “ऐसा क्यों हुआ कि जो पद 15 मई से पद खाली पड़ा था. उसे अचानक 24 घंटे से भी कम समय में भरा गया. कोर्ट ने कहा इतनी क्या जल्दी थी की 18 नवंबर को नाम भेजे जाने से लेकर उसे 19 नवंबर को नियुक्ति तक कि पूरी प्रक्रिया कर दी गई. 15 मई से 18 नवंबर के बीच क्या हुआ?”
बेंच ने यह सवाल भी पूछे कि, “कानून मंत्री ने जो 4 नाम भेजे. वो चार नाम ही क्यों भेजे गए? कहीं सरकार ने सिर्फ उन अधिकारियों के नाम तो नहीं भेजे जो उसकी पसंद थे? उन 4 नामों में से भी सबसे जूनियर अधिकारी को कैसे और क्यों चुना गया. चुने गए अधिकारी ने रिटायर होने से पहले VRS क्यों लिया. क्या ये जो भी हमें दिख रहा है वो सिर्फ संयोग है?”
सरकार ने कहा नियुक्ति प्रक्रिया में कुछ गलत नहीं हुआ
संविधान पीठ के सवालों के जवाब में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने कहा, ” पहले भी 12 से 24 घंटे में नियुक्ति हुई हैं. नियुक्ति प्रक्रिया में कुछ गलत नहीं हुआ. जो 4 नाम भेजे गए, वह कार्मिक विभाग (DoPT) के डेटाबेस से लिए गए. वह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है. अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से पूछा कि क्या अब न्यायपालिका कार्यपालिका की छोटी-छोटी बातों की समीक्षा करेगी. उन्होंने कहा कि अधिकारी की वरिष्ठता उसकी जन्मतिथि से नहीं वो किस बैच का अधिकारी है इस बात से तय होती है.”
59-60 साल के ही अधिकारी चुनाव आयोग क्यों भेजे जा रहे हैं?-याचिकाकर्ता
अधिकारी की वरिष्ठता को लेकर दिए गए सरकार की सपाई पर याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा, “अगर वरिष्ठता बैच से तय होती है , और बात 1985 बैच की थी तो इस बैच के 150 से ज्यादा अधिकारी उपलब्ध थे. जिसमें से कई ऐसे हैं, जिनका अगर चुनाव किया जाता तो वह अरुण गोयल से ज्यादा समय तक पद पर रहते. याचिकाकर्ता ने एक बार फिर पूछा कि आखिर इतने महत्वपूर्ण पद के चुनाव का अधिकार सिर्फ सरकार के पास क्यों होना चाहिए.”

