Saturday, February 22, 2025

तेजप्रताप यादव की भविष्यवाणी पर गिरिराज सिंह की दो टूक-ख्याली पुए बनाने से कौन रोक सकता है …

Bihar VidhanSabha : (संजय कुमार, पटना ) : बिहार में मौसम के साथ-साथ राजनीति में भी गरमी बढ़ने लगी है. बिहार में विधानसभा के चुनाव की घोषणा होने में अभी 7-8 महीने से ज्यादा का समय बाकी है लेकिन राजनीतिक पार्टियों ने हार जीत की भविष्यवाणियां करना शुरु कर दिया. राजद के प्रमुख लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने राज्य के अगले मुख्यमंत्री को लेकर भविष्यवाणी की है. तेज प्रताप यादव का कहना है कि  छोटे भाई यानी तेजस्वी यादव इस बार  चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनेंगें. वहीं तेज प्रताप यादव ने ये भी  कहा कि पलटू राम यानी चाचा नीतीश की गद्दी इस बार बस छूटने  ही वाली है. ललन सिंह की भविष्यवाणी फेल होने वाली है.

Bihar VidhanSabha : Tej Pratap Yadav की भविष्यवाणी पर भड़के गिरिराज सिंह 

तेज प्रताप यादव की भविष्यवाणी एक तरफ  है लेकिन बिहार में राजनीतिक समीकरण काफी उलझे हुए हैं. राज्य में भले ही इस समय जेडीयू -बीजेपी की सरकार है लेकिन इस बार बीजेपी अपने बूते सरकार बनाने की कोशिश में लगी है. यही कारण है कि भाजपा के नेता विपक्ष की हर बात को सिरे से नकार रहे हैं. तेजप्रताप यादव की भविष्यवाणी के सवाल के जवाब में बीजेपी के तेजतर्रार नेता गिरिराज सिंह का कहना है कि अगर कोई ख्याली पुए बना रहो हो तो उसे कौन रोक सकता है. अपने मन से सरकार बनाना हो तो तेजस्वी बना लें सरकार. गिरीराज ने इसे आरजेडी का ख्याली पुआ बता कर बात को उड़ा दिया लेकिन तब बात राज्य में भाजपा के गुट में दरार को सामने आई तो गिरिराज सिंह संभल गये और उन्होने मीडिया के सामने कहा राज्य में किसी तरह की गुटबाजी नहीं है. भाजपा एक है.

 बिहार विधानसभा चुनाव भाजपा रहेगी एकजुट ? 

गिरिराज सिंह ने प्रदेश में बीजेपी खेमें में गुटबाजी की बात को सिरे से खारिज कर दिया लेकिन ये भी सच ही है कि बिहार बीजेपी में बड़े कद के नेताओं की कमी नहीं है. चाहे वो नित्यानंद राय हो, गिरिराज सिंह हो, अश्विनी चौबे, सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा हों या कई और नाम हों. ऐसे में पार्टी की गुटबाजी की बातें कोई नई बात नहीं है. वर्तमान स्थिति को अगर देखा जाये तो ऐसा लग रहा है कि साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा के चुनाव इसबार काफी दिलचस्प होंगे. चुनाव सभी पार्टियों के खास होने वाले हैं.

विधानसभा चुनाव में राजद -जेडीयू की चुनौतियां 

इस विधानसभा चुनाव में जहां तेजस्वी के लिए ये अपनी पार्टी और अपने नेतृत्व की परिक्षा है वहीं, बीजेपी के लिए अपने दम पर सत्ता तक पहुंचने की एक और कोशिश. लेकिन सिर्फ आरजेडी और बीजेपी नहीं इस बार जेडीयू के लिए भी ये आर-पार की लड़ाई होगी. नीतीश कुमार के लिए इस बार सिर्फ सरकार बनाने की नहीं, पार्टी बचाने की भी लड़ाई होगी. उनके अपने ही सिपहसालार ललन सिंह बीजेपी के सगे हो गए है. ललन सिंह अगर बिहार में एकनाथ शिंदे हो जायें तो किसी को आश्चर्य नहीं होगा.

नीतीश कुमार के लिए मैदान में उतरे बेटे निशांत की अपील  

नीतीश कुमार के स्वस्थ को लेकर भी काफी चर्चाएं चल रही हैं, हलांकि उनके बेटे निशांत कुमार ने इस चिंताओं को खारिज करते हुए अपने पिता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए जनता से अपील की.अब तक मीडिया से दूर रहने वाले निशांत कुमार अब अपने पिता के आगे कवच बनकर सामने आये हैं और जनता को भरोसा दिला रहे है कि उनका स्वास्थ अच्छा है.किसी तरह की कोई समस्या नहीं है. जनता को उनको वोट देना चाहिये.

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दरअसल बीजेपी के चाणक्य अमित शाह की नजर पिछले कई सालों से बिहार पर हैं. बीजेपी किसी भी तरह से राज्य मे अपने बूते पर सरकार बनाने के लिए प्रयोग करती नजर आ रही है. कभी चिराग के जरिए जेडीयू को डाउन करने की कोशिश की तो इस बार ललन सिंह के कंधे पर सवार होकर नीतीश कुमार पर ही होने का प्रयास है. कुल मिलाकर देखा जाये तो बिहार में हाने वाला विधानसभा चुनाव जितना तेजस्वी यादव के लिए साख का टेस्ट का है, उससे कहीं ज्यादा नीतीश कुमार के लिए राजनीतिक अस्तित्व बचाने की लड़ाई होने वाली है.

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