Wednesday, February 11, 2026

कोड़े से लेकर पगड़ी उछालने तक, क्या है मुस्लिम मुल्कों में महिलाओं की लड़ाई का हाल ?

अफ़ग़ानिस्तान से लेकर ईरान तक महिलाएं पर्दे के खिलाफ सड़क पर मोर्चा खोले हुए है. कही वो पर्दे के खिलाफ प्रदर्शन में कोड़े खा रही है तो कही बीच सड़क पर मौलवियों की पगड़ी उछाल रही है.
लोकतंत्र, शिक्षा और आज़ादी ये वह मुद्दे है जो मुस्लिम मुल्कों की महिलाओं को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर रहे है. सोशल मीडिया पर जहां एक तरफ साऊदी अरब में (hallowing) हैलोवीन मनाए जानी कि खबर सुर्खियां बटौर रही हैं, वहीं ईरान और अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं के वीडियो भी छाए हुए है.

अफ़ग़ानिस्तान में शिक्षा के अधिकार को लेकर प्रदर्शन
खासकर अफ़ग़ानिस्तान के सबदख्शां यूनिवर्सिटी के बाहर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर छाया हुआ है. इस वीडियो में नौजवान लड़कियां बुर्का का विरोध करती नज़र आ रही है. साथ ही इन प्रदर्शनकारी लड़कियों पर बरसते कोड़े भी दिखाई दे रहे है. बताया जा रहा है कि ये राइट टु एजुकेशन को लेकर शुरु हुए प्रदर्शन का वीडियो है. जानकारी के मुताबिक तालिबान प्रशासन ने विश्वविद्यालय में बुर्का पहनकर नहीं आने वाली लड़कियों के क्लास रूम में जाने पर रोक लगा दी थी. जिसके बाद नाराज़ लड़कियों ने शिक्षा के अधिकार को लेकर प्रदर्शन शुरु किया. जिसका नतीजा आप देख सकते है कैसे तालिबानी अधिकारी लड़कियों का पीछा कर उनपर कोड़े बरसा रहा है.

ईरान में मौलवियों की पगड़ी उछालने का चैलेंज
वहीं ईरान में भी हिजाब को लेकर शुरु हुआ विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. ईरान में हिजाब जलाने और बाल काटने के बाद अब मौलवियों की पगड़ी उछालने का चैलेंज चल रहा है.
सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे है दो ऐसे वीडियो तेजी से वायरल हुए हैं, जिसमें गुस्साए लोग खास कर महिलाएं सड़क पर मौलवियों की पगड़ी उछाल रहे हैं. हालांकि ये वीडियो कब के हैं, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है.


हिजाब को सही से नहीं पहनने को लेकर हिरासत में ली गई मसहा अमिनी की मौत के बाद ईरान के इस्लामिक रिपब्लिक शासकों और मौलवियों को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है. अमिनी की मौत से शुरु हुआ विरोध प्रदर्शन का दौर ईरान के 30 शहरों में फैल गया है. गुस्सा इतना है कि महिलाएं जान की परवाह किए बिना मौलवियों के खिलाफ मार्च निकाल रही है. नारे लगा रही है.

ये अस्तित्व की लड़ाई है
अफ़ग़ानिस्तान से लेकर ईरान तक दिख रही संघर्ष कि तस्वीरें सिर्फ हिजाब या बुर्के के खिलाफ नहीं है. ये इन इस्लामिक मुल्कों में महिलाओं के अस्तित्व की भी लड़ाई है. एक ऐसी दुनिया की लड़ाई जहां वो आज़ाद हो, उसकी आवाज़ हो और उनके पास भी अपनी मर्जी से जीने का अधिकार हो. ये वो लड़ाई है जिसे आज से कई दशक पहले कैफी आज़मी ने अपनी एक कविता उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे में बयां कर दिया था. ये चार लाइने आपके लिए
गोशे गोशे में सुलगती है चिता तेरे लिए
फ़र्ज़ का भेस बदलती है क़ज़ा तेरे लिए
क़हर है तेरी हर इक नर्म अदा तेरे लिए
ज़हर ही ज़हर है दुनिया की हवा तेरे लिए
रुत बदल डाल अगर फूलना फलना है तुझे
उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे

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