जमाना बदल रहा है और बदल रहा है देश का युवा. जहां पहले पढ़ाई के बाद नौकरी का मिल जाना सबसे बड़ी सफलता होती थी वहीं अब युवा पढ़ाई के बाद रिस्क लेने के लिए आतुर दिखाई देते हैं .वो कुछ अलग और अपना करना चाहते हैं. ऐसे ही एक युवा की कहानी हम आज आप तक लेकर आए हैं. इस कहानी के लिए हम ‘आवाज़ द वॉयस’ का धन्यवाद देते है. इस वेबसाइट पर कई ऐसी कहानियां है जो प्रेरणा का स्रोत हैं. खासकर मुस्लिम युवाओं के सफलता की कहानियां. ये वेबसाइट कश्मीर और वहां के लोगों की सफलताओं और कोशिशों पर फोकस करता है.अभी आप जो कहानी पढ रहे हैं, वो इसी वेबसाइट ’आवाज द वॉयस’
से ली गई है.हम बात कर रहे हैं ,हैदराबाद के होनहार माज़ अहमद खान की.ये कहानी एक ऐसे मुस्लिम युवा की कहानी है जो देश में रहकर ही देश को बदलने के सपनों के साथ जी रहा है.
पिछले कुछ सालों से इलेक्ट्रिक स्कूटर प्रचलन में हैं. तेल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण की चिंता कई लोगों को इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. लोग स्कूटर खरीदने की सोचते हैं तो पहले इलेक्ट्रिक स्कूटर का ख्याल आता है. लेकिन इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत उनके उत्साह को ठंडा कर देती है. ऐसे ही लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं हैदराबाद के एक इंजीनियर माज़ अहमद खान.
माज़ का स्टार्ट-अप टॉक इलेक्ट्रिक लोगों की पुरानी बाइक और तेल से चलने वाले स्कूटर को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलकर उनकी और पर्यावरण की मदद कर रहा है.
आवाज-द वॉयस
के साथ बात करते हुए,इंजीनियर माज़ खान ने कहा,“जब मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था, तो मेरे मन में हमेशा नियमित वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने का विचार रहता था.अब बड़ी संख्या में लोग अपने दोपहिया पेट्रोल वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलवा रहे हैं.”
माज़ ने कहा, “मैं मेथोडिस्ट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश नहीं करना चाहता था. मैंने अक्टूबर 2021 में मसाब टैंक इलाके में टॉक इलेक्ट्रिक स्टार्ट-अप शुरू किया था.
शुरू में, लोगों ने मेरे विचार को नज़रअंदाज कर दिया, लेकिन जब से सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर देने की घोषणा की है, बड़ी संख्या में लोग अपने स्कूटर और बाइक को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने के लिए ला रहे हैं.
उनका कहना है कि उनके ग्राहक अपनी बाइक को इलेक्ट्रिक करा कर प्रति माह हजारों रुपये बचा रहे हैं.
माज़ खान का दावा है कि पेट्रोल बाइक को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने से गाड़ी चलाने की लागत 3,000 रुपये से कम होकर 500 रुपये हो जाती है. इस तरह, लोग हर महीने कम से कम 2,500 रुपये की बचत करते हैं.
माज़ के स्टार्टअप को विदेशी कंपनियों के साथ काम करने के लिए ऑफर भी आ रहे है,लेकिन माज़ खान को इस तरह के टाई-अप्स् में कोई दिलचस्पी नहीं है. वह भारत में रहना और आम लोगों के लिए काम करना पसंद करते हैं. माज़ कहते हैं कि शुरू में मैं लोगों तक पहुंचता था लेकिन अब मुझे दिल्ली, कोलकाता, केरल और अहमदाबाद जैसे शहरों से अपनी बाइक या स्कूटर को इलेक्ट्रिक में बदलने के इच्छुक लोगों के फोन आते हैं. माज़ पूरे भारत में अपने स्टार्ट-अप की शाखाएं शुरू करने की योजना बना रहा है. यानी जल्द ही कम पैसे में माज़ के हुनर से आप अपनी बाइक को इलेक्ट्रिक में बदल न सिर्फ पैसे बचा सकेंगे बल्कि पर्यावरण को बचाने में मददगार भी साबित हो सकते है. एक बार फिर आवाज़ द वॉयस
का शुक्रिया की उनकी मदद से हम भी अपने पाठकों तक ऐसी सकारात्मक ख़बर पहुंचा पा रहे हैं.

