RG Kar Hospital Doctor Case : कोलकाता के आरजी कार अस्पताल में 31 साल की लेडी डॉक्टर के साथ जघन्य कांड के मामले में आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार से लेकर अस्पताल प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर कड़े सवाल किये. मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रटूड़, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस जेबही पारदीवाला की बेंच ने आज लाइव स्ट्रीमिंग के जरिये केस की सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के ममले की लीपापोती की कोशिश और लेट लतीफी पर जमकर फटकार लगाई. सीजेआई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने सीबीआई को गुरुवार तक इस इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.
RG Kar Hospital Doctor Case का संज्ञान लेते हुए नेशलन टास्क फोर्स के गठन की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कार्यस्थल पर डाक्टरों का सुरक्षा के लिए नेशनल टास्ट फोर्स का गठन किया गया है. इस फोर्स में डॉक्टर शामिल हैं जो अपने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे देश में इस किस तरह से लागू किया जायेगा, इसके बारे में हमें जानकारी देंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूछे सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि प्रिंसिपल संदीप घोष को दूसरे कॉलेज मे क्यों ज्वाइन कराया गया ?
सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता की पहचान उजागर किये जाने पर भी चिंता व्यक्त की . कोर्ट ने कहा हम पीडिता की पहचान उजागर होने से चिंतित हैं. पीडिता के पोस्टमार्टम के बाद उसकी बॉड़ी दिखाया जाना भी चिंताजनक बात है. सोशल मीडिया से लेकर हर जगह पीडिता की पहचान उजागर हुई ये चिंताजनक बात है ऐसा नहीं होना चाहिये था.
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूछा कि क्या प्रिंसिपल ने हत्या को आत्महत्या बताया था ?
पीडिता के माता पिता को देर से जानकारी दी गई, क्या उन्हें मिलने नहीं दिया गया ?
कोर्ट ने पूछा पुलिस से सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में FIR देर से दर्ज होने के मामले में पुलिस प्रशासन को जम कर फटकार लगाई. कोर्ट ने पूछा की शुरु में ही मामले मे एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई ? पुलिस क्या कर रही थी ?
इतना गंभीर अपराध हुआ फिर उग्रवादियों को अस्पताल के अंदर कैसे घुसने दिया गया ? हजारों लोगों को अंदर क्यों आने दिया गया ?
क्राइम सीन को प्रोटेक्ट क्यों नहीं किया गया ?
पुलिस का पहला काम अपराध की जगह को सुरक्षित करना होता है.
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