Trikut Hill Ropeway Accident: दो साल पहले झारखंड के देवघर में त्रिकूट पहाड़ी पर हुए केबकार हादसा के मामले में झारखंड सरकार ने रोपवे चलाने वाली कम्पनी दामोदर रोपवेज एंड इंफ्रा (DRIL) को 5 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है. सरकार ने DRIL पर 9 करोड़ 11 लाख का जुर्माना भी ठोका है.
Trikut Hill Ropeway Accident : 46 घंटे तक फंसे थे 60 लोग, 3 की हो गई थी मौत
आपको बता दें कि झारखंड के प्रसिद्ध त्रिकूट पड़ाड़ी पर दो साल पहले 10 अप्रैल 2022 को केबलकार उपर ही अटक गई थी. इस केबलकार में सवार पर्यटक 60 पर्यटक करीब दो दिन तक उपर हवा में ही लटके रह गये थे. इस दौरान 3 लोगों की घबराहट के कारण जान चली गई थी. हवा में दो पहाडियों के बीच अटकी केबलकार को NDRF और एयरफोर्स के जवानों ने स्थानीय प्रशासन की मदद से उतारा था. देवघर की त्रिकूट पहाड़ी पर बना ये 766 मीटर लंबा रोपवे भारत का सबसे उंचा वर्टिकल रोपवे है.
दुर्घटना की जांच के लिए बनाई गई थी कमिटी
इस दिलदहला देने वाली बड़ी केबल कार दुर्घटना ने लोगों को हिलाकर रख दिया था. कोर्ट के आदेश पर झारखंड सरकार ने इस दुर्घटना की जांच के लिए एक कमिटी बनाई थी.जांच के आधार पर रोपवे चलाने वाली कंपनी DRIL पर लापरवाही के आरोप लगे थे, लेकिन उस समय कंपनी ने सभी आरोपों से इंकार कर दिया था. अब जांच पूरी होने के बाद सरकार ने आरोपी कंपनी पर कार्रवाई की है.
कार्रवाई के बारे में पर्यटन सचिव मनोज कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) ने कंपनी की लापरवाही को देखते हुए उसे 5 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है वहीं 9 करोड़ से अधिक का जुर्माना भी लगाया है. कंपनी को 9 करोड़ 11 लाख रुपये जमा करने के लिए कहा गया है.JTDC की तरफ से भेजे गये पत्र में कहा गया है कि अगर कंपनी ने जुर्माना नहीं भरा तो सरकार इस मामले में सिविल मुकदमा दायर करेगी.
सरकार के फैासले के खिलाफ कोर्ट जायेगा DRIL
हलांकि इस मामले में DRIL के एमडी आदित्य चमारिया का कहना है कि JTDC का उनके खिलाफ ये फैसला न्याय के सिद्धांत और प्रकृतिक न्याय के खिलाफ है. उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नही दिया गया. अब DRIL ने झारखंड सरकार के आदेश को उपरी अदालत मे चुनौती देने की बात कही है. DRIL के प्रबंध निदेशक आदित्य चमारिया का कहना है कि उनकी कंपनी देश में 14 जगहों पर रोपव चला रही है. जांच में सरकार के फैसले में इस घटना को दुर्लभ से दुर्लभतम कहा गया है. दुर्लभतम की श्रेणी के आधार पर किसी को ब्लैकलिस्ट कैसे किया जा सकता है ? आदित्य चमारिया का कहना है जुर्मान का भी कोई आधार नही है. 9 करोड़ में 5 करोड़ मरम्मत और रखरखाव का शुल्क है.
आपको बता दें कि 10 अप्रैल 2022 को हुए इस भीषण केबलकार एक्सीडेट को लेकर झारखंड हाइकोर्ट ने स्वतह संज्ञान लिया था और जांच के लिए आदश दिये थे.अब दो साल बाद झारखंड सरकार ने आरोपी कंपनी को लापरवाही और रोपवे के रखरखाव में कमी का दोषी पाते हुए सजा सुनाई है.

