रांची (Jharkhand): गढ़वा से पूर्व विधायक गिरिनाथ सिंह झारखंड में महागठबंधन के लिए गले की हड्डी बन गए हैं. एक तरफ गिरिनाथ सिंह को लेकर सिर्फ कांग्रेस और आरजेडी में टकराव हो रहा है, अब इसमें जेएममए भी शामिल हो गया है. गठबंधन के तीनों दलों के बीच गिरिनाथ सिंह त्रिशंकु बने हुए हैं. आखिर गिरिनाथ को चतरा से लड़ाने के लिए जेएमएम की ओर से भी आरजेडी और कांग्रेस पर क्यों दवाब बनाया जा रहा है, तो इसका जवाब चतरा लोकसभा क्षेत्र का समीकरण नहीं बल्कि साल के अंत में होने वाला गढ़वा विधानसभा चुनाव का चुनाव है.
2014 के चुनाव में गिरिनाथ सिंह के चुनाव मैदान में आने से मिथिलेश ठाकुर चुनाव हार गए थे
गढ़वा से अभी जेएमएम के मिथिलेश ठाकुर विधायक है और वो सरकार में मंत्री भी है. उनके विधानसभा क्षेत्र से ही गिरिनाथ चार बार विधायक रह चुके है. 2014 के चुनाव में गिरिनाथ सिंह के चुनाव मैदान में आने से मिथिलेश ठाकुर चुनाव हार गए थे और बीजेपी उम्मीदवार सतेंद्रनाथ तिवारी की जीत हो गई थी. 2019 लोकसभा से ठीक पहले गिरिनाथ सिंह आरजेडी छोड़कर बीजेपी में चले गए और उन्होने 2019 का विधानसभा चुनाव गढ़वा से नहीं लड़ा, जिसका फायदा मिथिलेश ठाकुर को हुआ और वो विधायक का चुनाव जीतकर झारखंड सरकार में मंत्री बने.
गिरिनाथ के फिर आरजेडी में आने से मिथिलेश ठाकुर की बढ़ी धड़कने
अब जब गिरिनाथ एक बार फिर आरजेडी में आ गए तो मिथिलेश ठाकुर की धड़कने बढ़ गई. उन्होने अपनी राह आसान करने के लिए गिरिनाथ सिंह को गठबंधन में लाने का फैसला किया. पहले मिथिलेश ठाकुर ने गिरिनाथ सिंह को कांग्रेस में शामिल करने का प्रस्ताव प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व को दिया लेकिन जब बात नहीं बनी तो आरजेडी में उनकी घर वापसी हुई. उधर गिरिनाथ सिंह भी बीजेपी से उम्मीद लगाये बैठे थे कि उन्हे लोकसभा का टिकट मिलेगा.
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चतरा में सांसद सुनील सिंह को लेकर नाराजगी को देखते हुए गिरिनाथ बीजेपी के साथ खड़े रहे, लेकिन जब बीजेपी ने वहां कालीचरण सिंह को टिकट दे दिया तो गिरिनाथ के सामने महागठबंधन ही एक रास्ता बचा. गठबंधन के तहत चतरा की सीट कांग्रेस के खाते में है, ऐसे में मिथिलेश ठाकुर के माध्यम से उन्होनें भी कांग्रेस का दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलने पर वो फिर से आरजेडी में चले गए.
Jharkhand: गिरिनाथ ने झारखंड प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर से की मुलाकात
आरजेडी के संस्थापक सदस्य में गिरिनाथ सिंह को लेकर लालू यादव ने भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर से फोन पर बात की, लेकिन राजेश ठाकुर ने अपने हाथ खड़े कर दिये और पार्टी आलाकमान द्वारा ही अंतिम फैसला लिये जाने की दुहाई दी. वही दूसरी ओर गिरिनाथ सिंह दिल्ली में डेरा जमाये हुए है. कांग्रेस नेतृत्व से अपने लिए चतरा की सीट मांग रहे है. वो चाहते है कि कांग्रेस चतरा में कोई उम्मीदवार नहीं दे और गठबंधन की ओर से वो ही उम्मीदवार हो. इसको लेकर गिरिनाथ ने झारखंड प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर से भी मुलाकात की.
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कुल मिलाकर देखा जाए तो गठबंधन के अंदर गिरिनाथ सिंह की हालत फुटबॉल जैसे हो गई है. तीनों राजनीतिक दल एक दूसरे के पाले में मामले को डाल रहे है. जेएमएम चाहती है कि गिरिनाथ गढ़वा की राजनीति से दूर चतरा में कांग्रेस या आरजेडी के टिकट पर चुनाव मैदान में चले जाए. कांग्रेस का मानना है कि गिरिनाथ सिंह आरजेडी और जेएमएम के बीच का मामला है. उनको सेट करना कांग्रेस की जिम्मेदारी नहीं है. कांग्रेस समीकरण के आधार पर अपना उम्मीदवार देगी. वही आरजेडी चाहती है कि गिरिनाथ सिंह को कांग्रेस बड़ा दिल दिखाते हुए चतरा से गठबंधन का उम्मीदवार बनने दें और ऐसी कोई स्थिति पैदा न हो जिसमें दोस्ताना संघर्ष करना पड़े. ऐसे में कहा जा सकता है कि गिरिनाथ सिंह जिनकी जाति का बोलबाला चतरा लोकसभा सीट पर अच्छा खासा है, वर्तमान सांसद भी उसी जाति से है.

