बागपत (UP ) Bagpat Lakshagriha kabristan महाभारत कालीन लाक्षागृह को लेकर उत्तर प्रदेश में पिछले 53 सालों से एक मामला चल रहा था, जिसमें हिंदु पक्ष का दावा था कि वो जगह महाभारत काल का लाक्षागृह है , वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा था कि वो एक कब्रिस्तान है. यहां की जमीन उनकी है.

Bagpat Lakshagriha kabristan पर 53 साल बाद आया फैसला
इस मामले में आज से 54 साल पहले 1970 में मुनीम खान नाम के व्यक्ति ने एक जमीन पर दावा करते हुए मुकदमा किया था कि जमीन कब्रिस्तान की है. उसे मुस्लिम पक्ष को दिया जाये. 1997 में सिविल कोर्ट का ये मामला बागपत सिविल कोर्ट पहुंचा और तब से हिंदु पक्ष और मुस्लिम पक्ष की तरफ से लगातार दावे किये जाते रहे. हिंदुपक्ष ने शुरु से कहा कि बागपत का उंचा टीलेनुमा जमीन का हिस्सा वही जगह है जहां महाभारत काल में पांडवों के खिलाफ षडयंत्र करके उन्हें लाक्षागृह में जलाने की कोशिश की गई थी. इस जमीन पर लाक्षागृह बनाया गया था.

1970 से ये मामला बागपत के कोर्ट में चल रहा था, अब इसमें फैसला आ गया है. खास बात ये है कि फैसला ऐसे समय में आया , जब देश के अलगअलग हिस्सों में कब्जे को लेकर अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं. इस मामले में अदालत में हिंदु पक्ष ने अलग अलग गवाहों और सबूतों से ये साबित किया कि हजारों साल पहले इसी जमीन पर लाक्षागृह बनाया गया था. हिंदुपक्ष की तरफ से उन तामाम सबूतों को इकट्ठा किया गया जो यहां और आसपास के इलाकों में अवशेष के रुप में मौजूद थे. उन प्रतीकों चिन्हों और कुछ दस्तावेजों से साबित हुआ कि ये जमीन माहाभारत काल का लाक्षागृह ही था.
दस्तावेजों में लाखामंडपम नम दर्ज
हिंदु पक्ष ने अदालत में ये दलील दी और साबित किया कि जब मुगल शासक आये तो उन्होने यहां राज करने के लिए यहां की मौलिकों चीजों को बर्बाद करके उस जगह पर अपने निशान बनाये. इस मामले में कोर्ट में लंबी गवाहियों की दौरा चला और साक्ष्य जुटाये गये, जिसमें पाया गया कि ये 108 बीघा जमीन वास्तव में कोई कब्रिस्तान नहीं बल्कि एक उंचाटीला थी, जिस पर पांडवो के लिए लाक्षागृह यानी लाख का घर बनाया गया था. हिंदु पक्ष ने वो दस्तावेज पेश किये जिसमें रेवेन्यू कोर्ट में इस जगह का नाम लाखामंडपम दर्ज है.

