Saturday, February 14, 2026

Uttarakhand Tunnel Rescue: अब हाथ से होगी ड्रिलिंग, अधिकारी ने बचाव में देरी की वजह बताई, टूट रहा है फंसे मज़दूरों का हौसला

उत्तरकाशी में आंशिक रूप से ध्वस्त सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को निकालने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे अधिकारियों ने शनिवार सुबह क्षतिग्रस्त ऑगर मशीन को बाहर निकाला. बताया जा रहा है कि ऑगर मशीन की मरम्मत नहीं की जा सकती है इसलिए अब बचाव अभियान जो आज 14वें दिन में प्रवेश कर गया अब मैनुअल ड्रिलिंग के जरिए पूरा किया जाएगा. ऑगर मशीन के क्षतिग्रस्त ब्लेडों को सुरंग से बाहर निकाला गया.

अब हाथ से होगी ड्रिलिंग

रात को अमेरिकी ऑगर मशीन में तीसरी बार आई खराबी के चलते काम रुक गया था. माइक्रो टनलिंग के विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स का कहना है कि, “किसी को चोट नहीं आई है, हर कोई ठीक है. फिलहाल सब कुछ ठीक है. आप अब ऑगरिंग नहीं देख पाएंगे, ऑगर (मशीन) खत्म हो गई है, टूट गई है. यह मरम्मत योग्य नहीं है, ऑगर से अब कोई काम नहीं होगा.”

क्यों हो रही है बचाव के काम में देरी

एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी को बताया कि ऑगर मशीन में बार-बार खराबी के कारण फंसे हुए श्रमिकों को निकालने में देरी हो रही है. वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हर बार जब मशीन किसी रुकावट से टकराती है, तो उसे 50 मीटर पीछे खींचना पड़ता है और मरम्मत के बाद पीछे धकेलना पड़ता है. पूरी प्रक्रिया में बचावकर्मियों को 5-7 घंटे का समय लगता है.

बचाव दल के एक अधिकारी ने कहा, “बचाव दल ने अब निर्णय लिया है कि पाइपलाइन को अब छोटी-छोटी दूरी पर मैन्युअल ड्रिलिंग के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा. यहां तक कि अगर हम आगे किसी बाधा से टकराते हैं, तो समस्या को मैन्युअल रूप से हल किया जा सकता है और कीमती समय बर्बाद किए बिना पाइपलाइन को आगे बढ़ाया जा सकता है. “

सीएम धामी शनिवार फिर पहुंचे उत्तरकाशी

इस बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पीएस धामी सिल्कयारा सुरंग में चल रहे बचाव अभियान का जायजा लेने के लिए उत्तरकाशी पहुंच गए हैं.

हौसला खो रहे है मज़दूर

इस बीच खबर ये भी है कि टनल में फंसे तीन मज़दूरों की तबीयत बिगड़ गई है. समाचार चैनल एबीपी न्यूज़ के मुताबिक टनल के अंदर तीन मजदूरों की तबीयत खराब हो गई है, पाइप के जरिए डॉक्टर ने उन्हें जरूरी दवाएं भेजी है, तीनों मजदूरों को सिरदर्द उल्टी और सीने में दर्द की शिकायत बताई जा रही है. जबकि कुछ मजदूर खाना नहीं खा रहे है. अपने परिजनों से बातचीत के दौरान वो काफी भावुक भी हो गए. प्रशासन ने मज़दूरों का हौसला बढ़ाने दुर्घटना स्थल पर तीन मनोचिकित्सक को बुलाया है.

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