Wednesday, January 28, 2026

Article 370: सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 370 से जुड़ी याचिकाओं पर 2 अगस्त से सुनवाई करेगा

2 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट धारा 370 हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी. मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली ये पीठ सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर 2 अगस्त से इस मामले की रोजाना सुनवाई करेगी

मंगलवार को धारा 370 पर कोर्ट में हुई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 को कमजोर करने और पूर्ववर्ती राज्य जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा छीनने को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई के लिए 2 अगस्त, 2023 की तारीख तय की. इन याचिकाओं में में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को भी चुनौती दी गई है. जिसने जम्मू-कश्मीर को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया है.
मंगलवार को ये मामला सुनवाई पूर्व औपचारिकताओं को पूरा करने के निर्देश के लिए सूचीबद्ध किया गया था. पीठासीन न्यायाधीश भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर 2 अगस्त से मामलों की रोजाना सुनवाई की जाएगी.

5 सदस्य संविधान पीठ में कौन-कौन है शामिल

धारा 370 हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की पीठ करेगी. इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, बीआर गवई और सूर्यकांत पीठ के अन्य सदस्य हैं.

जम्मु-कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर केंद्र ने दायर किया हलफनामा

सुनवाई के दौरान जस्टिस कौल ने पूछा कि क्या इस मामले में कोई अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने की जरूरत है, क्योंकि यह मुद्दा पूरी तरह से फैसलों की संवैधानिकता से जुड़ा है. कल केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म होने के बाद उसकी मौजूदा स्थिति को लेकर हलफनामा दाखिल किया था. जस्टिस कौल ने कहा कि अब दूसरा पक्ष जवाबी हलफनामा दायर करेगा और प्रक्रिया जारी रहेगी.

हम 2019 से इस दिन का इंतजार कर रहे है- उमर अब्दुल्ला

उधर मामले की सुनवाई 2 अगस्त से शुरु होने की खबर पर नेशनल कांफ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने खुशी जाहिर की. उमर अब्दुल्ला ने कहा, “हम 2019 से इस दिन का इंतजार करते आए हैं क्योकिं हमें लगता है कि हमारा केस मजबूत है. हम सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद भी रखेंगे और गुजारिश करेंगे कि इसमें जल्द से जल्द सुनवाई हो. हम न्याय की उम्मीद करते हैं, जो नाइंसाफी जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ 5 अगस्त 2019 को हुई, जो धोखा हुआ, कानून का धज्जियां उड़ाई गई उसका जवाब सुप्रीम कोर्ट से मिले.”

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