दुनिया में भारतीय विचार और संस्कृति का डंका बज रहा है. 26 जून 2023 यानी सोमवार के दिन ब्रिटेन की संसद में भी भारतियों के सम्मान का दिन था. सोमवार को ब्रिटिश संसद भवन में क्रांतिकारी राष्ट्र संत जैन मुनि श्री तरूण सागर जी महाराज की एक प्रतिमा का लोकार्पण किया गया. इस मौके पर उनकी प्रसिद्ध किताब कड़वे प्रवचन का अंग्रेज़ी में दर्शन अवलोकन भी हुआ. गुरु के आशीर्वाद तौर पर पर्वसागरजी महाराज ने ब्रिटिश सरकार के मंत्री और अनेक सासदों को जैन मुनि श्री तरूण सागर जी महाराज की किताब कड़वे प्रवचन बांटी.

ब्रिटिश सरकार ने दिया पर्वसागरजी महाराज को अवार्ड
तरुणोत्सव नाम के समारोह में ब्रिटिश सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए सरकार के मंत्री व सांसद ग्रेथ थॉमश ने पर्वसागरजी महाराज को उनकी विश्वमैत्री अहिंसा धर्म प्रभावना यात्रा को यूके की उपलब्धि बताई और तरूण सागर जी महाराज के 56वें जन्म जयंती पर शुभकामनाएँ दी. मंत्री व सांसद ग्रेथ थॉमश ने ब्रिटेन के इतिहास में प्रथम जैन संत की पहली यात्रा की ख़ुशी ज़ाहिर की और पर्वसागरजी महाराज के जैन धर्म और मानवता के लिए किए गए काम की प्रशंसा करते हुए उन्हें सरकार की ओर से सम्मान स्वरूप एक आवार्ड भी दिया. इस मौके पर हिंदू संस्कृति का प्रचार प्रसार में समर्पित सिद्ध श्रम प्रमुख संत राज राजेश्वर जी भी मौजूद थे.


तरूण सागर जी महाराज प्रगतिशील जैन मुनि माने जाते थे
26 जून 1967 को मध्य प्रदेश के दाहो जिले में जन्मे तरुण सागर का मूल नाम पवन कुमार जैन था. प्रसिद्ध दिगंबर जैन भिक्षु की जैन समुदाय में काफी प्रसिद्ध थे और उनके अनुयायियों की संख्या भी विशाल थी. वर्ष 1981 में उन्होंने ब्रह्मचर्य स्वीकार कर, एक भिक्षु का जीवन जीने का फैसला किया. तरूण सागर जी महाराज को ‘कड़वे प्रवचन’ नामक उनके उपदेशों के लिए जाना जाता था. तरुण सागर जी एक प्रगतिशील जैन मुनि माने जाते थे. वे हिंसा, भ्रष्टाचार और रूढ़िवाद की अपने प्रवचनों के माध्यम से कड़ी आलोचना करते थे. इस वजह से उनके प्रवचनों को ‘कटु प्रवचन’ या ‘कड़वे वचन’ कहा जाता था.
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