तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गूगल की मूल संस्था अल्फाबेट ने अपने खर्चों को सीमित करने और कर्मचारियों की संख्या को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती लागत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में भारी निवेश के बीच गूगल ने कई देशों में अपने कर्मचारियों को स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने (वीआरएस या एग्जिट पैकेज) का विकल्प प्रदान किया है। इस विशेष योजना के तहत कंपनी अपनी नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को आकर्षक आर्थिक मुआवजा और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, ताकि भविष्य की प्राथमिकताओं और महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
कई देशों में लागू की गई स्वैच्छिक एग्जिट योजना
विश्वसनीय मीडिया सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गूगल ने इस वर्ष जून के महीने में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड जैसे चुनिंदा देशों में कुछ विशेष टीमों के लिए इस स्वेच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना का विस्तार किया था। कंपनी के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने इसकी पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्ष 2025 में ही कुछ चुनिंदा विभागों में इसकी शुरुआत कर दी गई थी, जिसे बाद में अन्य देशों तक बढ़ाया गया। हालांकि, कंपनी की ओर से अभी तक यह आधिकारिक आंकड़ा साझा नहीं किया गया है कि कुल कितने कर्मचारियों ने इस वित्तीय पैकेज के प्रस्ताव को स्वीकार किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक कुछ टीमों में कर्मचारियों ने इसका लाभ उठाया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भारी निवेश और खर्च कटौती
गूगल का यह रणनीतिक कदम ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक और उससे जुड़े अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास पर पानी की तरह पैसा बहा रही हैं। एआई तकनीक की दौड़ में टिके रहने के लिए हो रहे इस भारी-भरकम खर्च का असर कंपनियों के वित्तीय संतुलन और निवेशकों की प्रतिक्रियाओं पर भी देखा जा रहा है। अल्फाबेट अपने संसाधनों और कार्यबल को कम प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से हटाकर भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकी परियोजनाओं की ओर केंद्रित करना चाहती है, जिसके तहत कार्यबल को युक्तिसंगत बनाया जा रहा है।
स्विट्जरलैंड में मिला बारह महीने की सैलरी तक का प्रस्ताव
यूरोपीय देशों में इस योजना के तहत कर्मचारियों को दिए जा रहे मुआवजे के स्पष्ट प्रावधान सामने आए हैं। उदाहरण के लिए, स्विट्जरलैंड में जहाँ गूगल के लगभग पाँच हजार कर्मचारी कार्यरत हैं, वहाँ कंपनी ने कई विभागों के कर्मियों को स्वैच्छिक रूप से पद छोड़ने का विकल्प दिया। इस पैकेज के नियमों के अनुसार, कर्मचारियों को कंपनी में सेवा के प्रत्येक वर्ष के बदले एक महीने के वेतन के बराबर मुआवजा दिए जाने का प्रावधान रखा गया था। इस मुआवजे की अधिकतम सीमा बारह महीने की सैलरी तय की गई थी, जिसका अर्थ है कि बारह वर्ष या उससे अधिक समय से सेवारत कर्मचारियों को भी अधिकतम एक वर्ष के वेतन के बराबर आर्थिक लाभ मिलना तय किया गया था।
माइक्रोसॉफ्ट की तर्ज पर अन्य टेक दिग्गजों का कदम
केवल गूगल ही नहीं, बल्कि अन्य बड़ी सॉफ्टवेयर और टेक कंपनियाँ भी अपने बढ़ते खर्चों पर लगाम लगाने के लिए इसी तरह के उपाय अपना रही हैं। कुछ समय पूर्व माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने कार्यबल और परिचालन लागत को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लगभग साठ हजार कर्मचारियों को इसी प्रकार के आर्थिक मुआवजे के साथ स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति या नौकरी छोड़ने का विकल्प दिया था। गूगल ने भी इससे पहले अमेरिका और ब्रिटेन के कुछ विशिष्ट विभागों में ऐसे विकल्प आजमाए थे। प्रबंधन का मानना है कि यह नीति उन कर्मियों के लिए एक सुगम मार्ग प्रदान करती है जो कंपनी के बदलते परिवेश, तीव्र कार्यसंस्कृति या भविष्य की कॉर्पोरेट दिशा के साथ खुद को पूरी तरह सहज महसूस नहीं कर पा रहे हैं।

