मुंबई। भारतीय सिनेमा जगत के इतिहास में पहले 'सुपरस्टार' का खिताब अपने नाम करने वाले दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के जीवन के अंतिम दिनों से जुड़े कई अनछुए पहलुओं पर प्रसिद्ध फिल्मकार केसी बोकाडिया ने खुलकर बात की है। अपने करियर के स्वर्णिम काल में अपार सफलता और लोकप्रियता हासिल करने वाले राजेश खन्ना के साथ एक समय ऐसा भी था जब फिल्म निर्माता और निर्देशक उनके घर के बाहर कतार लगाकर खड़े रहते थे, परंतु उनके फिल्मी करियर के ढलान के साथ ही उनके जीवन में एकाकीपन और संघर्ष का दौर शुरू हो गया था।
करियर के अंतिम दिनों का अकेलापन और अपनी भूल का अहसास
फिल्म निर्माता केसी बोकाडिया ने एक साक्षात्कार में राजेश खन्ना के अंतिम समय को याद करते हुए बताया कि एक दौर का वह बेताज बादशाह अभिनेता अपने जीवन के आखिरी चरण में किस कदर अकेलेपन और काम की भारी कमी से जूझ रहा था। बोकाडिया के अनुसार, अपने शुरुआती और शीर्ष दौर में राजेश खन्ना ने कई नए फिल्म निर्माताओं को नजरअंदाज कर दिया था, जिसका मलाल उन्हें बाद में जिंदगीभर रहा। उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि यह उन्हीं की गलती थी कि उन्होंने समय रहते निर्माताओं को तवज्जो नहीं दी, और उसी का परिणाम उन्हें अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर भुगतना पड़ा। मुंबई के प्रसिद्ध लिंकिंग रोड स्थित उनके कार्यालय में कभी चहल-पहल हुआ करती थी, लेकिन फिल्में फ्लॉप होने के बाद धीरे-धीरे लोगों ने उनसे दूरी बना ली और वह अपने दफ्तर में अकेले बैठकर लंबे समय तक सिगरेट पीते रहते थे।
भोजन के शौकीन और कढ़ी-गट्टे की दावत का दिलचस्प किस्सा
सिनेमा के परदे पर अपनी अदाकारी से लाखों दिलों पर राज करने वाले 'काका' यानी राजेश खन्ना को लजीज व्यंजन बनाने और खाने का बेहद शौक था। उनके इस शौक को याद करते हुए केसी बोकाडिया ने एक प्यारा सा संस्मरण साझा किया कि एक बार सुपरस्टार ने उन्हें बेहद आदर के साथ खाने पर आमंत्रित किया था और खुद अपने हाथों से कढ़ी तथा गट्टे की सब्जी तैयार कर उन्हें परोसी थी। हालांकि वे अपने दौर में भव्य पार्टियों के आयोजन के लिए भी खासे जाने जाते थे, लेकिन काम की कमी के उन दिनों में उनके भीतर का सरल और घरेलू इंसान खुलकर सामने आता था। बोकाडिया ने उनके साथ ‘मैं तेरा दुश्मन’, ‘पाप का अंत’ और ‘प्यार जिंदगी है’ जैसी फिल्मों में काम किया था, जिसमें वर्ष 2001 में आई फिल्म 'प्यार जिंदगी है' में उनके द्वारा निभाया गया एक संवेदनशील पिता का किरदार काफी सराहा गया था।
अभिनेत्री रेखा की बहादुरी और शूटिंग का वह भयानक हादसा
बातचीत के दौरान केसी बोकाडिया ने वर्ष 1991 में रिलीज हुई अपनी सुपरहिट फिल्म ‘फूल बने अंगारे’ से जुड़ा एक रोंगटे खड़े कर देने वाला किस्सा भी साझा किया। फिल्म के क्लाइमैक्स दृश्य की शूटिंग उदयपुर के एक विशाल स्टेडियम में चल रही थी, जहाँ लगभग पचास हजार दर्शकों की भीड़ के सामने अभिनेत्री रेखा को घोड़े पर सवार होकर खलनायक प्रेम चोपड़ा पर हमला करना था। उसी दौरान घोड़ा अचानक अनियंत्रित होकर भीड़ के बीच चला गया और रेखा घोड़े से नीचे जमीन पर आ गिरीं। इस भयानक हादसे से सेट पर मौजूद सभी लोग बुरी तरह घबरा गए और सन्नाटा पसर गया, लेकिन अभिनेत्री रेखा ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए पल भर में ही खुद को संभाला और बिना किसी डर के तुरंत अपने पैरों पर खड़ी होकर निर्देशक से दोबारा शॉट लेने के लिए कह दिया। रेखा के इसी पेशेवर समर्पण और निडरता की तारीफ करते हुए बोकाडिया ने कहा कि आज के दौर में ऐसा जोखिम उठाने का साहस बहुत कम कलाकारों में देखने को मिलता है, और यही बात उन्हें अद्वितीय बनाती है।

