नई दिल्ली| अमेरिका में संपन्न हुए मिड-टर्म चुनावों के परिणामों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा किए गए भारी-भरकम निवेश तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के सकारात्मक रुझानों के चलते भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में भी शानदार तेजी का दौर जारी रहा। बुधवार को बाजार के शुरुआती कारोबार के दौरान प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए, जिससे दलाल स्ट्रीट का कारोबारी माहौल पूरी तरह उत्साहजनक बना हुआ है।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी की मजबूत चाल
सप्ताह के तीसरे दिन बुधवार को कारोबार की शुरुआत में तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 288 अंकों की मजबूती के साथ 77,185.35 के स्तर पर जा पहुँचा, जबकि पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी भी 77.25 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 23,890.85 के आसपास कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स के प्रमुख तीस शेयरों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटीसी, अदाणी पोर्ट्स, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों में शामिल रहे। इसके विपरीत, पावर ग्रिड, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और भारती एयरटेल के शेयरों में हल्की सुस्ती देखने को मिली। इसके साथ ही, वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 103.2 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर ट्रेड कर रहा था, और एक्सचेंज से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने पिछले सत्र में भारतीय बाजारों में 6,836.81 करोड़ रुपये के शेयरों की लिवाली की थी।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के राजनीतिक समीकरण और भारत पर प्रभाव
अमेरिका में हाल ही में संपन्न हुए मध्यावधि (मिड-टर्म) चुनावों के आ रहे परिणामों से अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता के समीकरण बदलते हुए स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों ही सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को कड़ी टक्कर देते हुए बढ़त बनाती नजर आ रही है। इन चुनावी नतीजों का सीधा असर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगामी विधायी एजेंडों और आर्थिक नीतियों पर पड़ना तय माना जा रहा है। सीनेट में डेमोक्रेट्स ने बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि प्रतिनिधि सभा में नियंत्रण पाने के लिए राजनीतिक खींचतान जारी है। इन भू-राजनीतिक बदलावों का भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर भी गहरा असर पड़ सकता है, जिसमें आयात शुल्क विवाद, रणनीतिक व्यापार समझौते, रक्षा सहयोग तथा भारतीय पेशेवरों से जुड़े एच-1बी वीजा जैसे आव्रजन मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल हैं।
वैश्विक कमोडिटी बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर
अमेरिकी चुनावों और वैश्विक राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी और वित्तीय बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। चुनाव परिणामों को लेकर निवेशकों के बीच बनी सतर्कता और अनिश्चितता के माहौल के बीच कीमती धातुओं और जिंस बाजारों में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में सत्ता संतुलन में बदलाव से वैश्विक लिक्विडिटी, अमेरिकी डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, इन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने अपनी घरेलू आर्थिक बुनियाद और विदेशी निवेशकों की वापसी के दम पर अल्पकालिक मजबूती का मजबूत प्रदर्शन किया है, जो आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

