केंद्रीय मंत्री रेड्डी ने किया सात सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन, NIT रायपुर में नई शुरुआत

रायपुर। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री किशन रेड्डी ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के परिसर में तकनीकी शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को एक नई दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से सात अत्याधुनिक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का भव्य उद्घाटन किया है। इन नवनिर्मित शोध एवं उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना से छत्तीसगढ़ राज्य में उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ेगा। इन केंद्रों के माध्यम से विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), अंतरिक्ष अनुसंधान, क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज), एयरोस्पेस तकनीक, जनजातीय स्वास्थ्य, कंप्यूटेशनल मैकेनिक्स तथा सतत ऊर्जा जैसे आधुनिक और भविष्योन्मुख क्षेत्रों में उच्चकोटी के शोध कार्यों को अभूतपूर्व गति मिलेगी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष अनुसंधान के नए द्वार

इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज संपूर्ण विश्व में भारत अपनी आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक नवाचार के बल पर एक मजबूत और अग्रणी वैश्विक पहचान स्थापित कर रहा है। देश के प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में अनुसंधान, स्टार्टअप और तकनीकी विकास के मोर्चे पर निरंतर अभूतपूर्व प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी की भूमिका सबसे केंद्रीय रहेगी, और देश की युवा प्रतिभाएं इस ऐतिहासिक बदलाव की मुख्य वाहक बनेंगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब मात्र भविष्य की कल्पना नहीं रह गई है, बल्कि यह शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, औद्योगिक विकास और सुशासन के प्रत्येक क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुकी है।

उन्नत तकनीक और ग्रामीण-जनजातीय स्वास्थ्य को बढ़ावा

एनआईटी रायपुर में स्थापित किए गए ये सातों उत्कृष्टता केंद्र देश के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के दिग्गजों को एक साझा और सशक्त मंच प्रदान करेंगे। जिन प्रमुख सात केंद्रों का लोकार्पण किया गया है, उनमें एमईआईटीवाई इंडिया एआई छत्तीसगढ़ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन क्रिटिकल मिनरल्स, और सेंटर ऑफ स्पेस एंड इंटरप्लेनेटरी एक्सप्लोरेशन प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एयरोस्पेस एंड ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजीज, ग्रामीण तथा जनजातीय स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार के लिए मैराल सेंटर, कंप्यूटेशनल मैकेनिक्स तथा नैनोसाइंस और सस्टेनेबल एनर्जी टेक्नोलॉजीज के केंद्रों की भी शुरुआत की गई है। ये सभी केंद्र समाज की व्यावहारिक समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान खोजने और नए तकनीकी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होंगे।

खनिजों के वैज्ञानिक दोहन से आत्मनिर्भरता की ओर कदम

छत्तीसगढ़ की प्रचुर खनिज संपदा का विशेष उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के प्रसार, आधुनिक उद्योगों की स्थापना और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के इस दौर में महत्वपूर्ण खनिजों की मांग में भारी वृद्धि हुई है। इन खनिजों के वैज्ञानिक और विवेकपूर्ण उपयोग पर केंद्रित शोध कार्य देश को आर्थिक और तकनीकी दोनों ही दृष्टियों से पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण एवं जनजातीय स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जाने वाले तकनीकी नवाचार सुदूर अंचलों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराने में मददगार साबित होंगे। इन केंद्रों की स्थापना से अकादमिक संस्थानों और उद्योग घरानों के बीच आपसी समन्वय और अनुसंधान का दायरा और अधिक विस्तृत होगा। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने युवा शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उद्यमिता की भावना को अपनाकर विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।

Latest news

Related news