रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य आज अपना 26वां स्थापना दिवस अत्यंत हर्षोल्लास और गौरव के साथ मना रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्य निर्माण के वे पल पुनः जीवंत हो उठे हैं, जिन्होंने 26 वर्ष पूर्व इस वनांचल क्षेत्र की तकदीर और तस्वीर बदल दी थी। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के गठन में देश के पूर्व प्रधानमंत्री 'भारत रत्न' स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका निर्णायक रही, जिन्होंने क्षेत्रीय जनभावनाओं का सम्मान करते हुए एक नए राज्य के निर्माण का संकल्प पूरा किया था। आज भी प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर उनके इस ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय का प्रभाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।
सप्रे शाला मैदान से अटल जी का ऐतिहासिक संकल्प
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद उपासने के अनुसार, ढाई दशक पूर्व जब छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश का ही एक भाग था, उस समय क्षेत्र में राजनीतिक हलचलें तेज थीं। वर्ष 1998-99 के आम चुनावों के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी रायपुर स्थित सप्रे शाला मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे। वहां उन्होंने जनता से सीधा संवाद करते हुए ऐतिहासिक वादा किया था कि यदि क्षेत्र की जनता भाजपा को 11 में से अधिकतम सीटें जिताती है, तो केंद्र सरकार पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण करेगी। जनता ने इस आह्वान का समर्थन किया और 10 सीटों पर विजय प्रदान की, जिसके उपरांत अगस्त 2000 में संसद से विधेयक पारित कर 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ को स्वतंत्र राज्य का दर्जा दे दिया गया।
प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी और जल संरक्षण की 'जोगी डबरी' पहल
राज्य गठन के पश्चात वर्ष 2000 से 2003 तक छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में अजीत जोगी ने बागडोर संभाली। उस दौर में संपूर्ण क्षेत्र भीषण सूखे और जल संकट की गंभीर समस्या से जूझ रहा था। इस प्राकृतिक आपदा से निपटने और भूजल स्तर सुधारने के उद्देश्य से उन्होंने ग्रामीण अंचलों में लघु तालाबों और गड्ढों के निर्माण का व्यापक अभियान चलाया। जनसामान्य के बीच जल संरक्षण की यह अनूठी पहल 'जोगी डबरी' के नाम से अत्यंत प्रसिद्ध हुई, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत को दूर करने में महती भूमिका निभाई।
डॉ. रमन सिंह की जनकल्याणकारी राशन योजना और 'चाउर वाले बाबा' की ख्याति
वर्ष 2003 से 2018 तक लगातार 15 वर्षों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन सिंह को उनके द्वारा शुरू की गई ऐतिहासिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए याद किया जाता है। उनकी सरकार ने निर्धन परिवारों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करते हुए मात्र 1 और 2 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल उपलब्ध कराना शुरू किया था। इस क्रांतिकारी और संवेदनशील योजना के कारण ही उन्हें आम जनता के बीच 'चाउर वाले बाबा' के नाम से अत्यधिक लोकप्रियता और स्नेह प्राप्त हुआ।
भूपेश बघेल का ग्रामीण विकास मॉडल और 'गोधन न्याय योजना'
वर्ष 2018 से 2023 के दौरान मुख्यमंत्री पद पर रहे भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और कृषकों की आय में वृद्धि करने पर विशेष बल दिया। उनकी सरकार द्वारा शुरू की गई 'गोधन न्याय योजना' राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत सरकार ने 2 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गोबर क्रय करने की शुरुआत की, जिससे जैविक खेती को बढ़ावा मिला और ग्रामीण अंचलों में पशुपालकों व महिलाओं के लिए आय के नए साधन सृजित हुए।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की 'महतारी वंदन योजना' से महिला सशक्तीकरण
वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से मार्च 2024 में 'महतारी वंदन योजना' का शुभारंभ किया। इस योजना के माध्यम से प्रदेश की पात्र विवाहित महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह 1,000 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे हस्तांतरित की जा रही है। यह पहल राज्य की नारी शक्ति को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

