Bihar MLC Election Result 2026 पटना: बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में कई बड़े बदलाव दर्ज किए हैं. सबसे अधिक चर्चा पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की रही, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पांच बार विधान परिषद सदस्य रह चुके नवल किशोर यादव को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के डॉ. संजीव कुमार सिंह ने हरा दिया. इस नतीजे के साथ पटना शिक्षक सीट पर भाजपा का करीब 30 साल पुराना कब्जा समाप्त हो गया.
इन चुनावों में केवल भाजपा और राजद के बीच मुकाबला ही चर्चा में नहीं रहा. प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज कर विधान परिषद में पहली बार प्रवेश किया. वहीं, तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार बंशीधर ब्रजवासी ने जदयू के अभिषेक झा को बड़े अंतर से हराकर सबको चौंका दिया. सारण शिक्षक सीट पर भी निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज ने जीत दर्ज की.
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों में भाजपा को तीन, जनता दल यूनाइटेड (JDU) को एक, राजद को एक, जन सुराज को एक और निर्दलीय उम्मीदवारों को दो सीटें मिलीं. इस तरह एनडीए के खाते में कुल चार सीटें आईं, जबकि विपक्षी राजद को एक सीट पर सफलता मिली. बाकी तीन सीटों पर जन सुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की.
पटना शिक्षक सीट: नवल किशोर यादव की हार सबसे बड़ी चर्चा
बिहार एमएलसी चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में हुआ. भाजपा के वरिष्ठ नेता नवल किशोर यादव इस सीट का करीब तीन दशक तक प्रतिनिधित्व करते रहे थे. वह पांच बार विधान परिषद सदस्य चुने जा चुके थे. इस बार उन्हें राजद के डॉ. संजीव कुमार सिंह ने पराजित कर दिया.
डॉ. संजीव कुमार सिंह ने नवल किशोर यादव को 1,057 मतों से हराया. शुरुआती मतगणना में भाजपा उम्मीदवार कुछ समय तक आगे भी रहे, लेकिन बाद के चरणों में वरीयता मतों की गिनती ने मुकाबले का रुख बदल दिया. अंततः राजद उम्मीदवार ने जीत दर्ज की.
यह परिणाम भाजपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी ने इस सीट पर लंबे समय तक अपना प्रतिनिधित्व बनाए रखा था. नवल किशोर यादव की हार से पटना, नालंदा और नवादा क्षेत्र के शिक्षक मतदाताओं के बीच भाजपा की स्थिति को लेकर चर्चा शुरू हुई है.
आठों सीटों पर किसने दर्ज की जीत?
बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 में चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे सामने आए. सभी आठ सीटों पर विजयी उम्मीदवारों और जीत के अंतर का विवरण इस प्रकार है.
| निर्वाचन क्षेत्र | विजयी उम्मीदवार | पार्टी/स्थिति | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|
| कोसी स्नातक | डॉ. एन.के. यादव | भाजपा | 10,026 वोट |
| सारण शिक्षक | राहुल राज | निर्दलीय | 1,815 वोट |
| पटना शिक्षक | डॉ. संजीव कुमार सिंह | राजद | 1,057 वोट |
| तिरहुत शिक्षक | नरेंद्र प्रसाद सिंह | भाजपा | 594 वोट |
| दरभंगा शिक्षक | डॉ. सुरेश प्रसाद राय | जन सुराज | 324 वोट |
| पटना स्नातक | नीरज कुमार | जदयू | 4,655 वोट |
| तिरहुत स्नातक | बंशीधर ब्रजवासी | निर्दलीय | 9,147 वोट |
| दरभंगा स्नातक | सर्वेश कुमार | भाजपा | लगभग 1,500 वोट |
नोट: जीत के अंतर के आंकड़े प्रकाशित चुनाव परिणामों पर आधारित हैं. दरभंगा स्नातक सीट के लिए उपलब्ध रिपोर्ट में अंतर को लगभग 1,500 वोट बताया गया है.
दरभंगा शिक्षक सीट: जन सुराज ने पहली बार खोला खाता
बिहार एमएलसी चुनाव का एक और बड़ा घटनाक्रम दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में देखने को मिला. यहां प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को 324 मतों के बेहद कम अंतर से हरा दिया.
यह जीत जन सुराज के लिए खास है, क्योंकि पार्टी ने विधान परिषद में पहली बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. विधानसभा चुनावों और दूसरे राजनीतिक अभियानों के बाद अब पार्टी को परिषद में भी प्रतिनिधित्व मिल गया है.
इस सीट पर मुकाबला बेहद करीबी रहा. जीत का अंतर केवल 324 वोट होने से साफ है कि शिक्षक मतदाताओं के बीच दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा थी. परिणाम ने कांग्रेस के लिए भी चुनौती खड़ी की, क्योंकि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा.
दरभंगा शिक्षक सीट के नतीजे के बाद जन सुराज के सामने अब विधान परिषद में अपने प्रतिनिधित्व को राजनीतिक गतिविधियों और शिक्षक समुदाय से जुड़े मुद्दों के साथ आगे बढ़ाने की चुनौती होगी.
तिरहुत स्नातक सीट: निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी की बड़ी जीत
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार बंशीधर ब्रजवासी ने जदयू के अभिषेक झा को 9,147 मतों से हराया. इस सीट का नतीजा इसलिए भी अहम रहा, क्योंकि जदयू उम्मीदवार को एनडीए का समर्थन हासिल था, लेकिन इसके बावजूद निर्दलीय प्रत्याशी जीतने में सफल रहे.
बंशीधर ब्रजवासी को 31,832 वोट मिले, जबकि अभिषेक झा को 22,685 मत प्राप्त हुए. राजद की रश्मि विनायक गौतम 15,606 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। जन सुराज के उम्मीदवार विमोहन कुमार को 2,380 वोट मिले.
जदयू के लिए यह सीट इसलिए चर्चा में रही, क्योंकि पार्टी ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की, लेकिन तिरहुत स्नातक सीट पर उसके उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा.
पटना स्नातक सीट: नीरज कुमार ने दिलीप कुमार को हराया
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जदयू के नीरज कुमार ने राजद के दिलीप कुमार को 4,655 मतों से हराकर जीत दर्ज की. नीरज कुमार को कुल 19,930 वोट मिले, जबकि दिलीप कुमार को 15,275 मत प्राप्त हुए.
जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह 11,278 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. कांग्रेस उम्मीदवार असद उल्लाह खान को 971 वोट मिले.
यह सीट जदयू के लिए महत्वपूर्ण रही, क्योंकि यहां मुकाबला राजद और जन सुराज की मौजूदगी के बीच भी था. नीरज कुमार की जीत ने पार्टी को स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अपना प्रतिनिधित्व बनाए रखने में मदद की.
हालांकि, तिरहुत स्नातक सीट पर अभिषेक झा की हार के कारण जदयू का प्रदर्शन मिश्रित रहा. एक ओर पटना में पार्टी ने जीत दर्ज की, दूसरी ओर तिरहुत में उसे निर्दलीय उम्मीदवार से हार मिली.
कोसी स्नातक सीट: भाजपा के एन.के. यादव की सबसे बड़ी जीत
कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के डॉ. एन.के. यादव ने 10,026 मतों के अंतर से जीत दर्ज की. आठों सीटों में यह सबसे बड़े जीत अंतर में शामिल रहा.
इस सीट पर भाजपा को बड़ी सफलता मिली. जहां पटना शिक्षक सीट पर पार्टी को लंबे समय से चली आ रही बढ़त गंवानी पड़ी, वहीं कोसी स्नातक क्षेत्र में डॉ. एन.के. यादव ने बड़े अंतर से जीत हासिल की.
यह अंतर बताता है कि अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की पसंद और चुनावी परिस्थितियां अलग हो सकती हैं. इसलिए बिहार एमएलसी चुनाव के नतीजों को केवल किसी एक दल की जीत या हार के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी.
तिरहुत शिक्षक सीट: भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह की वापसी
तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने जीत हासिल की. उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार भूषण कुमार झा को 594 मतों से पराजित किया. नरेंद्र प्रसाद सिंह को 2,945 वोट मिले, जबकि भूषण कुमार झा को 2,351 मत प्राप्त हुए. इस सीट पर वर्तमान एमएलसी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के उम्मीदवार संजय कुमार सिंह तीसरे स्थान पर रहे.
नरेंद्र प्रसाद सिंह की जीत भाजपा के लिए शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता रही. पार्टी को पटना शिक्षक सीट गंवानी पड़ी, लेकिन तिरहुत में उसने जीत दर्ज की.
इस परिणाम के साथ सीपीआई का बिहार विधान परिषद में अकेला प्रतिनिधित्व भी समाप्त हो गया। इससे वाम दलों के लिए परिषद में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखने की चुनौती सामने आई है.
सारण शिक्षक सीट: निर्दलीय राहुल राज ने मारी बाजी
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज ने जीत दर्ज की. उन्होंने जदयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर को हराया. राहुल राज को 4,965 वोट मिले, जबकि आनंद पुष्कर को 3,150 मत प्राप्त हुए. जन सुराज के उम्मीदवार अफाक अहमद को 2,454 वोट मिले.
राहुल राज पहले भाजपा से जुड़े रहे थे, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा. उनकी जीत ने एनडीए के लिए एक और चुनौती खड़ी की.
इस नतीजे से पता चलता है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में दलों के समर्थन के बावजूद निर्दलीय उम्मीदवार भी मजबूत चुनौती पेश कर सकते हैं. हालांकि, जीत के पीछे उम्मीदवार की स्थानीय पकड़, मतदाताओं से संपर्क और चुनावी समीकरणों की भूमिका को अलग-अलग समझना जरूरी है.
चारों शिक्षक सीटों पर मौजूदा एमएलसी हारे
इस चुनाव की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि चारों शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मौजूदा विधान परिषद सदस्यों को हार का सामना करना पड़ा. पटना में भाजपा के नवल किशोर यादव, दरभंगा में कांग्रेस के मदन मोहन झा, सारण में मौजूदा प्रतिनिधि और तिरहुत में सीपीआई के संजय कुमार सिंह चुनाव हार गए.
यह परिणाम शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव की ओर संकेत करता है. शिक्षकों के वेतन, पदोन्नति, स्थानांतरण, सेवा शर्तों और अन्य पेशेवर मांगों जैसे मुद्दे इन चुनावों में अहम हो सकते हैं. हालांकि, किसी उम्मीदवार की हार के पीछे इन मुद्दों की वास्तविक भूमिका का निर्धारण विस्तृत क्षेत्रीय आंकड़ों और मतदाताओं की प्रतिक्रिया से ही किया जा सकता है.
दूसरी ओर, चारों स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मौजूदा प्रतिनिधियों ने अपनी सीटें बरकरार रखीं. इस तरह शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणामों में स्पष्ट अंतर देखने को मिला.
शिक्षक सीटों पर मतदान अधिक, स्नातक क्षेत्रों में कम
23 अक्टूबर 2026 को हुए मतदान में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 82.85 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत 53.42 रहा.
दोनों श्रेणियों के मतदान में यह अंतर उल्लेखनीय है. शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी अधिक रही, जबकि स्नातक सीटों पर मतदान अपेक्षाकृत कम रहा.
एमएलसी चुनाव आम विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं. इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान के लिए सामान्य मतदाता सूची के बजाय निर्धारित पात्रता वाले शिक्षक और स्नातक मतदाताओं की अलग सूची होती है. इसलिए इन चुनावों के नतीजों की व्याख्या करते समय मतदाता वर्ग और स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखना जरूरी है.
एमएलसी चुनाव के नतीजों का राजनीतिक महत्व
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के परिणामों में एनडीए ने कुल चार सीटें जीतीं. भाजपा ने तीन और जदयू ने एक सीट अपने नाम की. राजद को एक सीट मिली, जबकि जन सुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों ने मिलकर तीन सीटों पर जीत हासिल की.
इन परिणामों से तीन बातें विशेष रूप से सामने आईं. पहली, पटना शिक्षक सीट पर भाजपा का करीब 30 साल पुराना प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया. दूसरी, जन सुराज ने विधान परिषद में पहली बार प्रवेश किया. तीसरी, दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने दिखाया कि इन सीमित मतदाता वर्गों वाले चुनावों में भी स्थानीय समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं.
हालांकि, विधान परिषद की आठ सीटों के नतीजों को पूरे राज्य के राजनीतिक रुझान का सीधा पैमाना नहीं माना जा सकता। इन सीटों पर मतदाता वर्ग सीमित है और चुनावी मुद्दे भी आम विधानसभा चुनावों से अलग हो सकते हैं.

