देहरादून में पांचवीं मंजिला से कूदे कारोबारी,बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर लगे गंभीर आरोप;फिर चर्चा में आया साहनी केस

Dehradun Builder Death : देहरादून में रियल एस्टेट कारोबारी पंकज मित्तल की मौत ने प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े विवादों और कथित आर्थिक दबाव को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. 26 अक्टूबर 2026 को रायपुर थाना क्षेत्र में एटीएस कॉलोनी के पास एक निर्माणाधीन इमारत के नीचे उनका शव मिला. प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई कि वह इमारत की पांचवीं मंजिल से नीचे गिरे थे. मामले में उनके परिजनों ने व्यापारिक लेन-देन को लेकर एक अन्य बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

क्या है पंकज मित्तल की मौत का मामला?

पुलिस के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब छह बजे आपातकालीन हेल्पलाइन 112 के जरिए निर्माणाधीन इमारत में एक व्यक्ति के मृत पड़े होने की सूचना मिली थी. मौके पर पहुंची पुलिस को मृतक के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें मिलीं. उनकी पहचान पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के मंडी गोबिंदगढ़ निवासी 52 वर्षीय पंकज मित्तल के रूप में हुई.

पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए. शुरुआत में उनकी मौत पांचवीं मंजिल से गिरने के कारण होने की आशंका जताई गई, लेकिन घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी पुष्टि जांच के आधार पर की जानी है.

मामले में एक सुसाइड नोट मिलने की भी खबर सामने आई है.मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नोट में व्यापारिक लेन-देन को लेकर दूसरे बिल्डर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. हालांकि, नोट की प्रामाणिकता और उसमें दर्ज आरोपों की पुष्टि जांच के जरिए ही हो सकेगी.

पुनीत अग्रवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज

पंकज मित्तल के भाई अजय मित्तल की शिकायत के आधार पर देहरादून के रायपुर थाने में बिल्डर पुनीत अग्रवाल के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत मामला दर्ज किया है.

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कारोबारी लेन-देन को लेकर पंकज मित्तल को मानसिक रूप से परेशान किया गया और उन पर दबाव बनाया गया. परिजनों ने इस मामले में कार्रवाई की मांग की है.

मई 2024 में भी सामने आया था ऐसा ही मामला

पंकज मित्तल की मौत ने मई 2024 में देहरादून में हुई रियल एस्टेट कारोबारी सतिंदर सिंह साहनी, जिन्हें बाबा साहनी के नाम से भी जाना जाता था, की मौत की यादें ताजा कर दी हैं. उस मामले में भी कारोबारी विवाद और कथित दबाव के आरोप सामने आए थे.

24 मई 2024 को सतिंदर सिंह साहनी की राजपुर क्षेत्र स्थित पैसिफिक गोल्फ एस्टेट की आठवीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी. उनके बेटे रणवीर सिंह की शिकायत और कथित सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने अजय गुप्ता और अनिल गुप्ता के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था. दोनों को गिरफ्तार भी किया गया था.

उस समय साहनी के परिवार ने आरोप लगाया था कि कारोबारी साझेदारी और प्रोजेक्ट से जुड़े विवादों के चलते उन पर दबाव बनाया जा रहा था. हालांकि, आरोपों का होना अपने आप में अपराध साबित होने का प्रमाण नहीं है.

सतिंदर साहनी केस में क्या हुआ था?

इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रही. नवंबर 2025 में आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने लगभग डेढ़ साल की जांच के बाद अजय गुप्ता और अनिल गुप्ता के खिलाफ मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी. पुलिस का कहना था कि आरोपियों की भूमिका साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले.

इसके बाद फरवरी 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी दोनों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी निरस्त कर दी. इस तरह, जिस मामले में शुरुआत में गिरफ्तारी हुई थी, उसमें बाद की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ी.

इस घटनाक्रम से यह सवाल जरूर उठता है कि गंभीर आरोप सामने आने के बाद जांच किस तरह आगे बढ़ती है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी निष्कर्ष तक कैसे पहुंचा जाता है. हालांकि, सतिंदर साहनी और पंकज मित्तल के मामले अलग-अलग हैं. एक मामले के परिणाम के आधार पर दूसरे मामले की जांच या उसके संभावित नतीजे के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा.

अब पंकज मित्तल मामले में जांच पर नजर

पंकज मित्तल की मौत के मामले में पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं. इनमें घटना के समय की परिस्थितियां, सुसाइड नोट की प्रामाणिकता, व्यापारिक लेन-देन का वास्तविक स्वरूप और परिजनों की शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि शामिल है.

जांच में यह भी स्पष्ट करना होगा कि कारोबारी विवाद और मौत के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं. इसके लिए पुलिस को दस्तावेजों, संबंधित लोगों के बयानों, फॉरेंसिक साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध तथ्यों की पड़ताल करनी होगी.

फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर पंकज मित्तल की मौत को लेकर सभी सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं. इसलिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने या मामले को पहले से हुई घटना का दोहराव बताने के बजाय जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है.

देहरादून के दोनों मामलों ने कारोबारी विवादों में लगाए जाने वाले गंभीर आरोपों और उनकी निष्पक्ष जांच के महत्व को सामने रखा है. पंकज मित्तल के मामले में आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिस की जांच में कौन-से तथ्य और साक्ष्य सामने आते हैं.

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