नई दिल्ली। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने भारतीय निर्वाचन आयोग के कामकाज और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल उसके हालिया हलफनामे को लेकर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने निर्वाचन आयोग के हलफनामे को पूरी तरह से भ्रामक, छलपूर्ण और दोहरी मानसिकता वाला करार दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने फॉर्म-6 के प्रावधानों में कथित अवैध बदलावों, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के स्तर पर लिए गए एकतरफा फैसलों और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया की वैधानिकता पर कड़े सवाल खड़े करते हुए आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह व्यक्त किया है।
फॉर्म-6 के नियमों में फेरबदल और कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग ने फॉर्म-6 के साथ जोड़े गए नए घोषणा-पत्र के मुद्दे पर जनता और न्यायपालिका को भ्रमित करने का प्रयास किया है। पार्टी का कहना है कि आयोग ने पहले यह दावा किया था कि इस नए घोषणा-पत्र को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सही ठहराया गया है, किंतु बाद में स्थिति इसके विपरीत पाई गई। अब आयोग यह तर्क दे रहा है कि यह घोषणा-पत्र एक स्वतंत्र फॉर्म है और फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिसे कांग्रेस ने सरासर धोखा बताया है। पार्टी का तर्क है कि इस अनिवार्य घोषणा-पत्र को भरे बिना ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म-6 जमा करना संभव नहीं था, जो कि सीधे तौर पर मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियमों का खुला उल्लंघन है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के एकतरफा निर्णयों और आंतरिक असहमति पर सवाल
जयराम रमेश ने आयोग के इस दावे को भी खारिज किया कि एसआईआर से जुड़े तमाम प्रमुख आदेशों को तीनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण सहमति से मंजूरी मिली थी। कांग्रेस का दावा है कि अन्य चुनाव आयुक्तों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा लिए जा रहे एकतरफा और गैरकानूनी फैसलों पर आधिकारिक रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। इसके अलावा, मतदाता सूचियों पर केंद्रीकृत नियंत्रण स्थापित करने के लिए 'ईसीआईनेट' प्रणाली के उपयोग से वैधानिक शक्तियां रखने वाले निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों के अधिकारों को दरकिनार किए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है।
एसआईआर प्रक्रिया का दुरुपयोग और कार्यक्रम की अनुमति रोके जाने का दावा
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि देश के विभिन्न राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 का गंभीर दुरुपयोग किया गया है। दूसरी ओर, पार्टी ने यह भी दावा किया कि आगामी एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली विशाल रैली से ठीक पहले विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ आयोजित किए जाने वाले एक कार्यक्रम की अनुमति को प्रशासन द्वारा दबाव डालकर रद्द करा दिया गया। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, अशोक होटल में तय इस कार्यक्रम के लिए शुरुआती मंजूरी मिलने के बाद पुलिस और सरकारी तंत्र के हस्तक्षेप के कारण इसे रोक दिया गया, जो विपक्षी दलों की आवाज को दबाने का एक सुनियोजित प्रयास है।

