नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिवाली के त्यौहार से पहले ही वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। हवा की गुणवत्ता खराब होने और वायु गुणवत्ता सूचकांक के दो सौ पैंतालीस तक पहुंचने के बाद ग्रेप का पहला चरण लागू कर दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद शहर के कई प्रमुख और भीड़भाड़ वाले बाजारों में नियमों को ताक पर रखकर पटाखों की खुलेआम अवैध बिक्री हो रही है। चांदनी चौक, जामा मस्जिद, लाल किला और सदर बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में दुकानों और रेहड़ियों पर बिना किसी उचित अनुमति या अग्नि सुरक्षा मानकों के पटाखों के बक्से सजे नजर आ रहे हैं।
बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहे प्रतिबंधित पटाखे
जामा मस्जिद के गेट नंबर तीन और चांदनी चौक के प्रसिद्ध भागीरथ पैलेस इलाके में विभिन्न प्रकार के बम, लड़ियां, रॉकेट और फाउंटेन पटाखे खुलेआम बेचे जा रहे हैं। हालांकि कई पैकेटों पर ग्रीन पटाखे होने का दावा अंकित है, लेकिन उन पर छपे क्यूआर कोड या तो गायब हैं या स्कैन करने योग्य नहीं हैं, जिससे उनकी प्रामाणिकता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा होता है। खरीदार भी बिना किसी रोक-टोक के इन बाजारों से खरीदारी कर रहे हैं, जबकि संकरी गलियों और फुटपाथों पर इस तरह विस्फोटक सामग्री का खुले में रखा जाना किसी बड़े खतरे को दावत दे रहा है।
प्रशासनिक कार्रवाई और कारोबारियों की मांग
बढ़ते प्रदूषण और अवैध बिक्री पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन लगातार छापेमारी कर रहा है और पिछले दिनों कई जगहों से भारी मात्रा में अवैध पटाखे बरामद भी किए गए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली फायरवर्क्स शॉपकीपर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर स्थायी लाइसेंस प्राप्त दुकानदारों को तय नियमों के तहत अधिकृत ग्रीन पटाखे बेचने की अनुमति दिए जाने की गुहार लगाई है, जिस पर आगामी उनतीस अक्टूबर को सुनवाई तय है। कारोबारियों का मानना है कि अधिकृत दुकानों को अनुमति मिलने से पड़ोसी राज्यों से आने वाले गैर-मानक पटाखों की अवैध आवक पर स्वतः रोक लग सकेगी।

