हरियाणा में बिजली इंजीनियरों ने खोला मोर्चा, पैरेलल बिजली लाइसेंस रद्द करने पर अड़े

चंडीगढ़। हरियाणा में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के विरोध में कर्मचारियों और इंजीनियरों की चल रही व्यापक हड़ताल के बीच ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है। फेडरेशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से विशेष कैबिनेट बैठक बुलाकर प्रदेश भर में निजी कंपनियों को समानांतर बिजली वितरण का लाइसेंस न देने संबंधी स्पष्ट नीतिगत फैसला लेने का आग्रह किया है। इसके साथ ही गुरुग्राम और नूंह जिलों में एक निजी कंपनी को प्रदान किए गए लाइसेंस को रद्द कराने के लिए आवश्यक वैधानिक एवं प्रशासनिक कदम उठाने की अपील की गई है।

बिजली नियामक आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

पंचकूला स्थित उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम के मुख्यालय पर आयोजित विरोध सभा के दौरान फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे और राज्य स्तर के प्रमुख पदाधिकारियों ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने निजी कंपनी को लाइसेंस प्रदान करने की प्रक्रिया की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की पुरजोर मांग की। संगठन के नेताओं का कहना है कि संबंधित कंपनी की तकनीकी क्षमता, वित्तीय स्थिति तथा बिजली वितरण क्षेत्र में उसके पूर्व अनुभव का सही तरीके से मूल्यांकन सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

सार्वजनिक बिजली कंपनियों और किसानों पर असर की चिंता

फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने आशंका व्यक्त की है कि समानांतर व्यवस्था लागू होने से राज्य की सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के राजस्व पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिसका सीधा नुकसान भविष्य में किसानों और आम उपभोक्ताओं को झेलना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की यह हड़ताल केवल अपने अधिकारों के लिए नहीं बल्कि सार्वजनिक बिजली ढांचे और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही इस संवेदनशील विषय का सर्वमान्य समाधान नहीं निकाला और आंदोलनरत कर्मचारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई की, तो यह प्रदर्शन पूरे देश में फैल सकता है।

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