ITBP चीफ के अरुणाचल ‘फेस-ऑफ’ वाले बयान पर विवाद, कांग्रेस ने सरकार से पूछा-किस तरह का राष्ट्रवाद है?

इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के चीफ शत्रुजीत कपूर के इस कथित कमेंट पर शुक्रवार को पॉलिटिकल बवाल मच गया कि फोर्स की एक एलीट यूनिट शौर्य प्लाटून, “अरुणाचल प्रदेश Arunachal Pradesh में फेस-ऑफ” से सफलतापूर्वक निपट रही है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार पर “इस गंभीर मुद्दे पर चुप रहने” का आरोप लगाया. हलांकि अभी तक सरकारी अधिकारियों या सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की तरफ से तुरंत कोई रिएक्शन नहीं आया है.

ITBP के चीफ ने Arunachal Pradesh को लेकर अपने बयान में क्या कहा

गुरुवार को राजस्थान के अलवर में एक सम्मान समारोह में सैनिकों को संबोधित करते हुए, ITBP के डायरेक्टर जनरल कपूर ने कथित तौर पर कहा: “हाल के दिनों में, अरुणाचल प्रदेश में ऐसी स्थिति थी जहाँ अलग-अलग जगहों पर आमना-सामना हुआ, जो अभी भी जारी है. वहाँ हमारी शौर्य कमांडो टीमों ने सच में बहुत अच्छा काम किया.”

किस से आमना सामना हुआ ये साफ नहीं

उनकी बातों का एक वीडियो क्लिप ऑनलाइन खूब शेयर हो रहा है. सेंट्रल आर्म्ड फोर्स, जिसे भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) की रखवाली और पेट्रोलिंग का काम सौंपा गया है, ने गुरुवार देर रात सोशल मीडिया पर फुटेज जारी किया लेकिन बाद में उसे डिलीट कर दिया.
कपुर ने साफ़ तौर पर यह नहीं बताया कि आमना-सामना किसके साथ हुआ, लेकिन उन्होंने कहा, “ITBP की शुरुआत एक पहाड़ी गुरिल्ला फोर्स के तौर पर हुई थी, लेकिन 2004 से हम भारत-चीन बॉर्डर की रखवाली कर रहे हैं.”

चीन से टकराव की खबरों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने क्या कहा

जुलाई से, ऊपरी सुबनसिरी ज़िले के दूर के टकसिन इलाके में चीनी सैनिकों के साथ टकराव की खबरें आ रही हैं. अगस्त में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बारे में पूछे जाने पर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बॉर्डर के मामलों की स्थिति का असर पूरे भारत-चीन रिश्तों पर पड़ता है, और कहा कि दोनों पक्ष बॉर्डर पर “गलतफ़हमी और गलत अंदाज़े से बचने” के लिए मौजूदा डिप्लोमैटिक और मिलिट्री सिस्टम का इस्तेमाल करने पर सहमत हुए हैं.

चीन के प्रति यह नरमी और बढ़ती आर्थिक निर्भरता किस तरह का राष्ट्रवाद है?-कांग्रेस

कपूर की बातों के कुछ हिस्से ऑनलाइन आने के बाद, कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर हमला तेज कर दिया.
कांग्रेस नेता रमेश ने X पर एक लंबी पोस्ट में कहा, “एक तरफ, चीन के आगे झुकने वाले प्रधानमंत्री रियायतें देने की कहानी जारी रखे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ, ITBP के डायरेक्टर जनरल ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय इलाके में चीनी PLA के साथ हाल ही में हुई झड़पों में फोर्स के काम की तारीफ की है, जो बिल्कुल सही है.”
उन्होंने पूछा, “…चीन के प्रति यह नरमी और बढ़ती आर्थिक निर्भरता किस तरह का राष्ट्रवाद है?” उन्होंने सरकार पर इस मामले में “चुप” रहने का आरोप लगाया.

सरकार पहले भी चीन के साथ झड़प से इनकार करती रही है

सरकार ने पहले भी बीजिंग के आगे झुकने के कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह भारत की सीमाओं की रक्षा के लिए कमिटेड है.
साथ ही, BJP के नेताओं ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है. उन्होंने विपक्षी पार्टी पर भी पलटवार करते हुए कहा है कि जवाहरलाल नेहरू ने चीन को जमीन दे दी थी.
भारत और चीन ने अक्टूबर 2024 में लद्दाख में चार साल से ज़्यादा चले मिलिट्री स्टैंडऑफ को खत्म करने के लिए एक समझौते पर पहुंचने के बाद अपने रिश्ते फिर से बनाने की कोशिश की है, जिससे रिश्ते छह दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे. चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को BRICS समिट में शामिल होने के लिए सात साल में पहली बार भारत आए और रिश्तों का रिव्यू करने के लिए PM मोदी के साथ बाइलेटरल मीटिंग की.

सितंबर के आखिर में न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक इवेंट में बोलते हुए, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत-चीन के रिश्ते आज कुछ साल पहले के मुकाबले बेहतर हैं.

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