श्री राम की रावण पर विजय एक ऐसी विजय है, जिसने सदियों से लोगों के बीच इस विश्वास को बढ़ाया है कि सच के साथ खड़ा रहकर भी कैसे बलशाली से बलशाली राक्षस पर विजय पाई जा सकती है. इसी पाठ को याद रखने और पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुंचाने के लिए ही हर साल दशहरे का त्योहार मनाया जाता है. आज दशहरा है और आज के दिन ही श्री राम ने वानर सेना के साथ लंकापति रावण को हराया था. लेकिन रावण की लंका पर अपनी विजय पताका फेहरान से पहले श्रीराम ने भी अपनी कुलदेवी यानी शक्ति की आराधना की थी. आज दशहरे के इसी मौके पर हम आपको भगवान श्रीराम और माता सीता की कुलदेवी के बारे में बता रहे हैं, जिनकी पूजा श्रीराम भी हर बड़े काम को करने से पहले करते थे.
अयोध्या में है श्रीराम की कुलदेवी का मंदिर
देवी भागवत और कृतवास रामायण के अनुसार, रावण पर विजय प्राप्त करने और शक्ति प्राप्त करने के लिए भगवान श्रीराम ने लंका युद्ध से पहले शरद ऋतु (आश्विन/शारदीय नवरात्रि) में अकाल बोधन करते हुए शक्ति की विशेष पूजा की थी. कुलदेवी, हर परिवार या वंश की एक विशेष देवी होती हैं. मान्यता है कि यही देवी इस कुल की रक्षा करती हैं और वंश की उन्नति-प्रगति के लिए भी शक्ति देती हैं. भगवान श्रीराम ने भी दिव्य नगरी अयोध्या में अपनी कुलदेवी की बाल्यावस्था से लेकर आजीवन पूजा की है. भगवान राम अयोध्या के सूर्यवंश (रघुकुल) में जन्मे थे. रघुवंशी क्षत्रियों की कुलदेवी बड़ी देवकाली, जिन्हें चंडिका भी कहा जाता है, मानी जाती हैं.
विद्वानों के अनुसार, भगवान श्रीराम और भरत खुद गुह्य काली के उपासक थे. जबकि श्रीसीता द्वारा पूजित जनकपुर की सर्वमंगला पार्वती अयोध्या में छोटी देवकाली के रूप में पूजित है. यानी प्राचीन काल से ही अयोध्या में शक्ति की उपासना का प्रचलन रहा है. श्रीराम की कुलदेवी माता बड़ी देवकाली मंदिर में महाकाली,महासरस्वती और महालक्ष्मी के दर्शन एक मूर्ति में गर्भगृह में होते हैं.
श्रीराम के पूर्वज रघु ने की थी स्थापना
उनकी कुलदेवी हैं बड़ी देव काली माता, जिनका मंदिर आज भी अयोध्या में है. अयोध्या के इस मंदिर के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि भगवान श्री राम जी के पूर्वज महाराज रघु जी एक समय युद्ध करने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन वह युद्ध को लेकर कुछ चिंतित थे. रघु जी ने मां शक्ति की पूजा आराधना और आह्वान किया. मां शक्ति प्रसन्न हुई और रघु जी को दर्शन देकर मां ने आज्ञा दी कि तुम मेरा एक महाशत्र यज्ञ यहां करना. तुम्हे जरूर विजय मिलेगी. महाराज रघु ने युद्ध के लिए प्रस्थान किया और फिर युद्ध में विजय होकर इसी स्थान पर मां त्रिगुणा अर्थात तीनों रूपों में मां शक्ति की स्थापना की. इसलिए मां बड़ी देवी काली श्री रघु जी महाराज के द्वारा स्थापित हैं और इसीलिए यह भगवान श्री राम जी की कुलदेवी हैं.

