हरिद्वार का ऐसा सिद्धपीठ जहां इंद्रदेव ने मांगी थी देवी से मदद, जानिए सुरेश्वरी देवी मंदिर की मान्यता

धर्मनगरी हरिद्वार केवल हर की पौड़ी और गंगा के घाटों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां कई ऐसे सिद्धपीठ और पौराणिक स्थल भी हैं, जिनका वर्णन धार्मिक ग्रंथों में मिलता है. इन्हीं में से एक देवी भगवती को समर्पित प्राचीन सुरेश्वरी देवी मंदिर है. यह मंदिर हर की पौड़ी से करीब 10 किलोमीटर दूर रानीपुर क्षेत्र में राजाजी टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच सुरकूट पर्वत पर स्थित है. स्कंद पुराण के केदारखंड में भी इस सिद्धपीठ का विशेष उल्लेख मिलता है.

मान्यता है कि हरिद्वार में देवी भगवती का यह ऐसा चमत्कारी स्थान है, जहां सच्चे मन और पवित्र भाव से की गई आराधना का फल माता रानी शीघ्र प्रदान करती हैं. चैत्र और शारदीय नवरात्रि में देशभर से श्रद्धालु यहां देवी मां की पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. मंदिर के पुजारी त्रिलोचन तिवारी ने बातचीत के दौरान स्कंद पुराण के केदारखंड में वर्णित पौराणिक कथा का उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि जब राजा रजी के पुत्रों ने इंद्रलोक पर कब्जा कर लिया था, तब देवराज इंद्र भयभीत होकर भटक रहे थे.
सुरकूट पर्वत पर पर इंद्र ने की थी तपस्या
भगवान विष्णु के कहने पर इंद्र ने हरिद्वार में गंगा के पश्चिमी भाग में स्थित सुरकूट पर्वत पर एक साधारण मानव के रूप में देवी की कठोर तपस्या की. देवी भगवती ने प्रसन्न होकर उन्हें सिंहासन वापस मिलने का वरदान दिया. सुर यानी देवताओं की देवी होने के कारण यह धाम सुरेश्वरी देवी कहलाया. पुजारी त्रिलोचन तिवारी के अनुसार, माता ने इंद्र को वरदान दिया था कि इस स्थान पर सच्चे मन से की गई पूजा का फल शीघ्र प्राप्त होगा. शारदीय नवरात्रि में देशभर से श्रद्धालु संतान, धन और पारिवारिक सुख की मन्नत लेकर यहां आते हैं. उन्होंने बताया कि यदि भक्त यहां नहीं आ सकते, तो घर पर बैठकर सच्चे भाव से देवी मां का ध्यान करने से भी उनके मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं.

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श्रद्धालुओं को है मां सुरेश्वरी पर अटूट विश्वास
सुरेश्वरी देवी मंदिर में दर्शन करने पहुंचीं दिल्ली की महिला श्रद्धालु सुगंध से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि धर्मनगरी हरिद्वार केवल हर की पौड़ी और गंगा के घाटों तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरकूट पर्वत पर स्थित सुरेश्वरी देवी का धाम भी बेहद चमत्कारी माना जाता है. उन्होंने कहा कि जिस तरह देवराज इंद्र की कठोर तपस्या के बाद उनकी मनोकामना पूरी हुई थी, उसी तरह यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं भी जल्द पूरी होती हैं. उन्होंने बताया कि वह दिल्ली से आई हैं और मां की असीम कृपा से उनकी और उनके दोस्तों की मनोकामनाएं पूरी हुई हैं. मन्नत पूरी होने के बाद वह दोबारा सुरेश्वरी देवी के दर्शन करने और पूजा-अर्चना के लिए पहुंची हैं. महिला श्रद्धालु के अनुसार, स्कंद पुराण में वर्णित इस स्थल पर सच्चे भाव से मांगी गई इच्छा देवी मां जल्द पूरी कर देती हैं.

 

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