ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नगला पदम सिंह गांव में संपत्ति के विवाद, जमीन के मुआवजे और पारिवारिक कलह के चलते एक हंसता-खेलता पूरा परिवार असमय उजड़ गया। इस सनसनीखेज मामले में महेश, उनकी पत्नी ललिता और उनके तीन मासूम बच्चों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के पीछे करोड़ों रुपये की संपत्ति का बड़ा विवाद मुख्य रूप से जांच के दायरे में आया है।
करोड़ों की संपत्ति और आपसी खींचतान
मृतक महेश की मां चंद्रवती के पास दिल्ली, रबूपुरा, बिलासपुर और खुर्जा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में करोड़ों रुपये की भारी-भरकम संपत्ति होने की बात सामने आई है। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा यह गंभीर आरोप लगाया जा रहा है कि परिवार की इस अचल संपत्ति और उससे मिलने वाली लाखों-करोड़ों की रकम पर अधिकार को लेकर लंबे समय से पारिवारिक खींचतान चल रही थी। आरोप है कि मृतक की दोनों बहनों ने कथित तौर पर दबाव बनाकर पुश्तैनी जमीन और सरकारी मुआवजे से मिली भारी-भरकम रकम आपस में ही बांट ली, जबकि दोनों भाइयों को उनके हिस्से से वंचित रखा गया। पुलिस के हाथ लगी एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि संपत्ति के बंटवारे को लेकर परिवार में भारी तनाव और विवाद चल रहा था।
मकानों, जमीन की बिक्री और मुआवजे का पूरा विवरण
ग्रामीणों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, चंद्रवती की संपत्ति का दायरा कई इलाकों में फैला हुआ है। दिल्ली के खेड़ा कलां इलाके में उनके दो मकान बताए जाते हैं, जिनमें से एक में बेटी सपना रहती थी जबकि दूसरा मकान अमूमन बंद रहता था। इसके अलावा, रबूपुरा के नगला पदम सिंह वाला मकान दूसरी बेटी सुनीता के नाम स्थानांतरित किए जाने की बात भी सामने आई है। इस मकान के बिजली के बिल में बहन सुनीता का नाम छपा देखकर महेश ने उस पर कड़ी आपत्ति भी जताई थी।
इसके अतिरिक्त, बिलासपुर क्षेत्र में स्थित एक प्लॉट को लगभग छह महीने पूर्व करीब 80 लाख रुपये में बेचे जाने की जानकारी मिली है, जिसकी राशि भी दोनों बहनों में बांटे जाने का आरोप है। खुर्जा के कनैनी गांव के पास लगभग चार बीघा पैतृक जमीन मौजूद थी, जिसमें से दो बीघा जमीन बेचकर करीब 40 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। वहीं, रबूपुरा इलाके में अधिग्रहीत की गई जमीन का सवा करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा और उस पर मिलने वाला सात प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान भी कथित तौर पर दोनों बहनों को दे दिया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दिल दहला देने वाला पहलू
शवों के पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों को शरीर में जहरीले पदार्थ (पॉइजनिंग) के सेवन से जुड़े स्पष्ट लक्षण मिले हैं, जिसके बाद पुलिस ने सभी मृतकों का विसरा सुरक्षित कर रासायनिक परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है। विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का आधिकारिक खुलासा हो सकेगा। इस पूरी त्रासदी के बीच सबसे मर्मस्पर्शी पहलू यह रहा कि महज 12 वर्ष के छोटे से बच्चे ऋतिक को अपने चाचा महेश, चाची ललिता और उनके तीन छोटे बच्चों की अर्थियों को एक साथ मुखाग्नि देनी पड़ी। करीब आठ वर्ष पूर्व ऋतिक ने अपने पिता राहुल को भी खो दिया था, और अब चाचा का साया भी उठ जाने के बाद इस मासूम के कंधों पर अकल्पनीय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
ऑडियो रिकॉर्डिंग से खुला राज और तीन गिरफ्तारियां
मामले की जांच कर रही पुलिस ने मृतक महेश के मोबाइल फोन से एक महत्वपूर्ण ऑडियो रिकॉर्डिंग बरामद की है, जिसमें उसने अपनी मौत और पूरे परिवार के इस हस्र के लिए अपनी बड़ी बहन सुनीता, बहनोई शेखर और छोटी बहन सपना को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। इसके अलावा आसपास खंगाले गए सीसीटीवी फुटेज में भी घर के भीतर किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश करने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर पुलिस ने रविवार को तीनों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ललिता के भाई की लिखित शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का संगीन मामला दर्ज किया गया है और पुलिस उनसे कड़ाई से पूछताछ कर रही है।

