Protests in France : फ्रांस में महंगाई और बढ़ती जीवनयापन लागत के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया है. शनिवार, 17 अक्टूबर को देश के कई शहरों में हजारों प्रदर्शनकारियों की भीड़ सड़कों पर उतरी. इस दौरान तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आईं. सबसे बड़ा नुकसान लिमोज (Limoges) शहर की ऐतिहासिक टाउन हॉल इमारत को हुआ, जो भीषण आग की चपेट में आने के बाद बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त हो गई. अधिकारियों के मुताबिक, इमारत की छत ढह गई और उसका बड़ा हिस्सा आग से नष्ट हो गया.
प्रदर्शनों में लोगों की भागीदारी को लेकर फ्रांस सरकार और ट्रेड यूनियन के आंकड़ों में अंतर है. सरकार ने करीब 5.5 लाख लोगों के प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही, जबकि CGT ट्रेड यूनियन ने यह संख्या लगभग 8 लाख बताई. हिंसा के बाद गिरफ्तारी का आंकड़ा भी बढ़ा है. फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने 18 अक्टूबर को बताया कि देशभर में करीब 1,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
लिमोज का ऐतिहासिक टाउन हॉल आग की भेंट चढ़ा
फ्रांस के लिमोज शहर में स्थित टाउन हॉल की इमारत को 19वीं सदी की ऐतिहासिक धरोहर माना जाता था. लगभग 143 साल पुरानी इस इमारत का उद्घाटन 1883 में हुआ था. स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान नकाबपोश लोगों के एक समूह ने पहले टाउन हॉल के बाहर खड़ी नगरपालिका पुलिस की गाड़ी में आग लगाई. इसके बाद इमारत की खिड़कियां तोड़ी गईं और अंदर घुसकर आग लगा दी गई.
आग इतनी भीषण थी कि इमारत की छत निचली मंजिलों पर गिर गई.स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, पश्चिमी हिस्से को छोड़कर इमारत का बड़ा भाग बुरी तरह प्रभावित हुआ और बाहरी हिस्से का लगभग दो-तिहाई हिस्सा नष्ट हो गया. दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाने के लिए देर रात तक अभियान चलाया.
हौट-विएन क्षेत्र के प्रीफेक्ट मौरिस बारात ने इस नुकसान को ऐतिहासिक विरासत के लिए बड़ी त्रासदी बताया. घटना के बाद इमारत को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है. इस आग ने फ्रांस में सार्वजनिक संपत्ति और ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
फ्रांस के किन शहरों में भड़की हिंसा?
लिमोज के अलावा पेरिस, ल्योन, मार्सिले, लिले, बोर्डो, टूलूज और कई अन्य शहरों में भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाएं सामने आईं. कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में तोड़फोड़ की, सामान लूटा और सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया.
पेरिस: राजधानी में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर झड़पें हुईं। गाड़ियों में आग लगाने, दुकानों के शीशे तोड़ने और लूटपाट की घटनाएं दर्ज की गईं। पेरिस की डिप्टी मेयर लामिया एल अराजे ने हिंसा के स्तर पर चिंता जताई।
ल्योन: शहर के प्रमुख पर्यटन कार्यालय में आग लगने की घटना सामने आई। यहां भी सार्वजनिक संपत्ति और दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया।
मार्सिले और लिले: प्रदर्शनकारियों ने नगरपालिका भवनों में प्रवेश किया और कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
बोर्डो: कई दुकानों में लूटपाट और नुकसान की खबरें सामने आईं।
अन्य शहर: रेनेस, मोंटपेलियर, वैलेंस और टूलूज सहित विभिन्न शहरों में भी प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सार्वजनिक संपत्ति पर हमलों और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन किया। सरकार ने कहा है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने वाले लोगों के अधिकारों और हिंसा फैलाने वालों की गतिविधियों के बीच अंतर किया जाना चाहिए।
पुलिस ने आंसू गैस-वॉटर कैनन का किया इस्तेमाल,1,800 लोग गिरफ्तार
फ्रांस में शनिवार को हुए प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तारियों की संख्या लगातार बढ़ी. शुरुआत में अधिकारियों की ओर से करीब 1,200 गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई थी, लेकिन 18 अक्टूबर को गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने यह आंकड़ा लगभग 1,800 बताया.
एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले पेरिस में 855 लोगों को गिरफ्तार किया गया. हिंसक घटनाओं में करीब 150 पुलिसकर्मियों और जेंडरमेरी के जवानों के घायल होने की भी खबर है. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया.
हालांकि, प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों को हिंसा के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग शांतिपूर्ण तरीके से भी सड़कों पर उतरे थे. हिंसा कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों के समूहों और पुलिस के बीच टकराव के दौरान बढ़ी.
आखिर क्यों सड़कों पर उतरे फ्रांस के लोग?
फ्रांस में मौजूदा विरोध प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा बढ़ती महंगाई, जीवनयापन का खर्च और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति है. लोगों की नाराजगी केवल रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों तक सीमित नहीं है. शिक्षा व्यवस्था में समस्याएं, शिक्षकों की कमी, वेतन और पेंशन से जुड़े सवाल भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं.
ट्रेड यूनियनों और छात्र संगठनों ने इन मुद्दों को उठाते हुए प्रदर्शन में भागीदारी की. प्रदर्शनकारियों की मांगों में बेहतर वेतन, पेंशन से जुड़ी राहत और सार्वजनिक सेवाओं के लिए पर्याप्त सरकारी संसाधन उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे शामिल रहे.
इस आंदोलन में 2018 के ‘येलो वेस्ट’ यानी पीली जैकेट वाले आंदोलन की यादें भी दिखाई दीं. उस आंदोलन में ईंधन की कीमतों और आर्थिक नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था. मौजूदा प्रदर्शनों में भी आर्थिक दबाव और सामाजिक असमानता को लेकर नाराजगी सामने आई है.
फ्रांस की राजनीतिक स्थिति भी इस समय अहम है। राष्ट्रपति चुनाव से कुछ महीने पहले बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि, आंदोलन में शामिल विभिन्न संगठनों की मांगें एक जैसी नहीं हैं और सभी प्रदर्शनकारियों को किसी एक राजनीतिक विचारधारा से जोड़ना सही नहीं होगा।
जेडी वेंस ने पश्चिमी उदारवादियों पर साधा निशाना
फ्रांस में हिंसा के बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की प्रतिक्रिया भी चर्चा में है. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी टिप्पणी में पश्चिमी उदारवादी नेताओं की आव्रजन नीतियों पर सवाल उठाए और फ्रांस की मौजूदा स्थिति के लिए उनकी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया.
वेंस का तर्क था कि विविधता और करुणा के नाम पर दूसरे देशों से लोगों को बसाने की नीतियां बनाते समय सामाजिक एकीकरण और सांस्कृतिक अनुकूलता जैसे मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया. उन्होंने दावा किया कि इस विषय पर पहले भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया.
उन्होंने फ्रांस के लोगों के प्रति समर्थन जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि देश इस स्थिति से बाहर निकलेगा. वेंस ने अमेरिकी राजनीति का संदर्भ देते हुए डेमोक्रेट्स पर भी निशाना साधा.
हालांकि, वेंस की टिप्पणी को राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए. फ्रांस में मौजूदा प्रदर्शन के प्रमुख घोषित मुद्दे महंगाई, जीवनयापन की लागत, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाएं हैं. उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर हिंसा को सीधे आव्रजन से जोड़ना उचित नहीं होगा. किसी भी हिंसक घटना के लिए जिम्मेदारी संबंधित जांच और सबूतों के आधार पर तय की जानी चाहिए.
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
फ्रांस की सरकार के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां हैं. पहली, बढ़ती महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर लोगों की नाराजगी का समाधान निकालना. दूसरी, हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर रोक लगाना.
लिमोज के ऐतिहासिक टाउन हॉल को हुआ नुकसान इस संकट का सबसे प्रतीकात्मक उदाहरण बन गया है. एक ओर हजारों लोग आर्थिक समस्याओं के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आगजनी और लूटपाट जैसी घटनाओं ने आंदोलन की दिशा पर सवाल खड़े किए हैं.

