पुणे। महाराष्ट्र के पुणे डिवीजन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में आगामी विधान परिषद चुनाव के मद्देनजर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर सियासी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अलग-अलग रुख अपनाते हुए अपने-अपने उम्मीदवारों को समर्थन देने का ऐलान किया है, जिससे यह चुनाव पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बन गया है। भाजपा ने जहां इस सीट से कौस्तुभ गावडे को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है, वहीं शिंदे गुट की शिवसेना ने निर्दलीय उम्मीदवार और प्रोफेसर सचिन सानप को पार्टी का समर्थन देने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
महायुति में मतभेद और शिवसेना का पक्ष
शिवसेना के सचिव संजय भाऊराव मोरे ने प्रोफेसर सचिन सानप को पार्टी समर्थित उम्मीदवार घोषित करते हुए आधिकारिक पत्र जारी किया है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस सीट से जयंत आसगावकर को मैदान में उतारा है, जिसके चलते पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अब भाजपा, कांग्रेस और शिंदे सेना समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के बीच एक दिलचस्प त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है।
कोल्हापुर में अंबाबाई देवी के दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री शंभूराज देसाई ने इस फैसले की वजह स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि शिवसेना ने इस क्षेत्र से अपना उम्मीदवार उतारने की मांग की थी और स्थानीय पदाधिकारियों व शिक्षक संगठनों ने काफी काम किया है। वरिष्ठ स्तर के निर्देश पर शिवसेना नेता मंगेश चिवटे ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर सचिन सानप को समर्थन देने का भारी दबाव था। मंत्री देसाई ने दावा किया कि सानप के जीतने के बाद वे महायुति के साथ ही रहेंगे, इसलिए इससे गठबंधन को कोई नुकसान नहीं होगा।
कौन हैं सचिन सानप और क्या है उनका एजेंडा?
पुणे के वाडिया कॉलेज में राजनीति विज्ञान के सहायक प्रोफेसर और मॉडर्न एजुकेशन सोसायटी के ट्रस्टी सचिन सानप इससे पहले महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। शिवसेना का समर्थन मिलने के बाद उन्होंने शिक्षकों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का संकल्प लिया है।
सानप ने आरोप लगाया कि पुणे डिवीजन के 62 हजार से अधिक रजिस्टर्ड शिक्षकों और प्राध्यापकों के बीच राजनीतिक दलों को कोई योग्य शिक्षक उम्मीदवार नहीं मिला और उन्होंने संस्था चालकों को मैदान में उतार दिया। उन्होंने इस चुनाव को 'संस्था चालक बनाम आम शिक्षक' की लड़ाई करार देते हुए कहा कि निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व ऐसा व्यक्ति करना चाहिए जो शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं से भली-भांति परिचित हो।
पांच जिलों में फैला है दायरा और सीएम फडणवीस का लक्ष्य
पुणे डिवीजन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत पुणे, सातारा, सांगली, कोल्हापुर और सोलापुर कुल पांच जिले आते हैं। इस महत्वपूर्ण सीट के लिए 23 अक्टूबर को मतदान संपन्न होना है, जबकि वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को की जाएगी। एक ही गठबंधन के दो प्रमुख घटकों द्वारा अलग-अलग उम्मीदवारों को समर्थन दिए जाने से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।
इस बीच, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधान परिषद की सभी पांचों सीटों को जीतने का बड़ा लक्ष्य तय किया है और महायुति के तीनों सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होकर काम करने का स्पष्ट संदेश दिया है। बहरहाल, भाजपा और शिवसेना के इस अंतर्विरोध का चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा, यह तो आने वाले परिणाम ही तय करेंगे।

