दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाने पर परिवार को ऐतराज क्यों? CBI जांच के बीच कैसे मिला क्लिन चिट?

Ankita Bhandari case : अंकिता भंडारी के माता-पिता का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या के मामले में कथित VIP की भूमिका की पूरी सच्चाई अब तक सामने नहीं आई है. 12 अक्टूबर 2026 को दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद परिवार की चिंता बढ़ गई है. परिवार चाहता है कि CBI जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति पर रोक लगाई जाए. 14 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली के इंडिया गेट पर परिवार के विरोध प्रदर्शन को समर्थन दिया.

Ankita Bhandari case
दिल्ली :अंकिता के माता पिता को समर्थन देने पहुंचे राहुल गांधी

Ankita Bhandari case : सबसे बड़ा सवाल !

क्या राज्यपाल बनने के बाद दुष्यंत गौतम से जांच एजेंसी पूछताछ नहीं कर सकती? क्या अंकिता के माता-पिता के सवालों का जवाब मिलने से पहले ही मामले में एक संवैधानिक पेचीदगी खड़ी हो गई है? इस विवाद को समझने के लिए हत्याकांड, VIP एंगल, CBI जांच और राज्यपाल पद से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों को समझना जरूरी है.

अंकिता भंडारी हत्याकांड क्या है?

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में सितंबर 2022 में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी. वह ऋषिकेश के पास वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं. इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और दो अन्य आरोपियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई.

पुलकित आर्य, भाजपा के पूर्व नेता विनोद आर्य का बेटा है. मामले में दो लोगों को सजा तो हुई लेकिन इस हत्या को लेकर  अंकिता के परिवार के पास और भी सवाल हैं .परिवार की मांग है कि हत्या के पीछे की पूरी साजिश और VIP की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए.

मामले का VIP एंगल उस आरोप से जुड़ा है कि जिसमें अंकिता पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति को विशेष सेवाएं देने का दबाव बनाया जा रहा था. परिवार और आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि इस पहलू की जांच अधूरी है. हालांकि पुलिस का कहना है कि उसकी जांच में किसी VIP की संलिप्तता सामने नहीं आई थी. पुलिस ने कथित VIP के रूप में नोएडा के धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान का उल्लेख किया था.

दुष्यंत गौतम का नाम कैसे आया?

दिसंबर 2025 के आखिर में सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ कथित ऑडियो और वीडियो के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया. इन रिकॉर्डिंग से जुड़े दावों में भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम आया था.दुष्यंत गौतम उस समय भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री रह चुके थे और उत्तराखंड में पार्टी के प्रभारी भी रहे थे.

पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर से जुड़े बयानों और रिकॉर्डिंग के बाद उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए. इसके बाद मामले में CBI जांच की मांग तेज हो गई.

दुष्यंत गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को लेकर कानूनी कार्रवाई भी की. जून 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट से जुड़े एक मामले में अदालत के सामने यह सवाल आया कि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को हत्या और यौन अपराध जैसे गंभीर आरोपों से जोड़ने वाली सामग्री के पीछे क्या कोई साजिश थी.

यही इस पूरे विवाद में जांच पक्ष की तरफ से जो कुछ सामने आया है उसमें अहम बात ये है कि पूरी जांच के दौरान कहीं भी यानी आरोप पत्र या दूसरी किसी गवाही में दुष्यंत गौतम का नाम नहीं आय़ा है.

जनवरी 2026 में CBI जांच की सिफारिश क्यों हुई?

नए आरोपों और प्रदेशव्यापी विरोध के बीच उत्तराखंड सरकार ने जनवरी 2026 में मामले की CBI जांच की सिफारिश की. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीड़ित परिवार की मांग के बाद केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने का फैसला किया. परिवार चाहता है कि जांच सिर्फ हत्या तक सीमित न रहे, बल्कि कथित VIP एंगल और उससे जुड़े सभी सवालों का भी जवाब मिले.

इस बीच पुलिस ने कथित VIP के बारे में अपना पक्ष रखा था. हरिद्वार के ग्रामीण पुलिस अधीक्षक ने कहा था कि पुलिस की जांच में कोई VIP शामिल नहीं मिला और जिस व्यक्ति का उल्लेख हुआ, वह नोएडा का धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान था. दूसरी ओर, परिवार और प्रदर्शनकारियों ने इस निष्कर्ष पर सवाल उठाते हुए व्यापक जांच की मांग जारी रखी.
फोन और कॉल डिटेल को लेकर क्या हैं सवाल?

दिए गए विवरण में आरोप लगाया गया है कि जांच के दौरान पुलकित आर्य और अंकिता भंडारी के फोन नहीं मिले थे तथा अंकिता की डुप्लीकेट सिम के जरिए कॉल डिटेल और व्हाट्सऐप संदेशों की जानकारी हासिल की गई, जबकि पुलकित के मामले में ऐसी जांच नहीं हुई.

दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाने पर आपत्ति क्यों?

12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया. इस फैसले के बाद अंकिता के माता-पिता ने मांग की कि CBI जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति को रोक दिया जाए. परिवार का तर्क है कि जब मामले से जुड़े गंभीर सवालों की जांच चल रही है, तो संबंधित विवाद में नाम आने वाले व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नियुक्त करना उचित नहीं है.

अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने सार्वजनिक रूप से इस नियुक्ति का विरोध किया और राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील की. परिवार चाहता है कि राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर अपनी आशंकाएं बताई जाएं और जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए.

यह विरोध सिर्फ किसी राजनीतिक नेता की नियुक्ति का मामला नहीं है. परिवार की मूल मांग यह है कि उनकी बेटी की हत्या से जुड़े सभी अनुत्तरित सवालों की निष्पक्ष जांच हो और किसी प्रभावशाली व्यक्ति को लेकर संदेह होने पर भी जांच बिना दबाव के आगे बढ़े.

क्या राज्यपाल बनने के बाद दुष्यंत गौतम से पूछताछ नहीं हो सकती?

यह विवाद का सबसे संवेदनशील कानूनी प्रश्न है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 361 राष्ट्रपति और राज्यपालों को कुछ विशेष संवैधानिक संरक्षण देता है. इसके तहत राज्यपाल के पद पर रहते हुए उनके खिलाफ अदालत में आपराधिक कार्यवाही शुरू करने या जारी रखने पर रोक है. अदालत से गिरफ्तारी या कारावास की प्रक्रिया जारी करने पर भी संवैधानिक प्रतिबंध है.

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि राज्यपाल बनने वाला व्यक्ति हर प्रकार की जांच से हमेशा के लिए बाहर हो जाता है. अनुच्छेद 361 का संरक्षण मुख्य रूप से पद पर रहते हुए कानूनी कार्यवाही और गिरफ्तारी से संबंधित है. किसी भी परिस्थिति में जांच एजेंसी किसी मामले की जांच नहीं कर सकती या संबंधित साक्ष्यों की पड़ताल नहीं कर सकती. विशेष परिस्थिति में उनसे पूछताछ या जांच की क्या प्रक्रिया हो सकती है, इसका निर्धारण संबंधित संवैधानिक प्रावधानों, लागू कानून और न्यायिक व्याख्या के आधार पर होगा.

परिवार की चिंता फिर इस बाच को  लेकर है कि जब जांच जारी है, तो नियुक्ति से पहले मामले से जुड़े आरोपों और आशंकाओं की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई?

14 अक्टूबर को इंडिया गेट पर धरना, राहुल-प्रियंका ने दिया समर्थन

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के विरोध में अंकिता के माता-पिता 14 अक्टूबर को दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरने पर बैठे. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने उनसे मुलाकात की और उनके न्याय के संघर्ष को समर्थन दिया.

परिवार की मांग थी कि CBI जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाई जाए. इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने भी मामले में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग उठाई.

इसके बाद 15 अक्टूबर की सुबह करीब चार बजे दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता और प्रदर्शन में शामिल कुछ कांग्रेस नेताओं तथा अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें बाद में छोड़ दिया गया. इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेताओं ने पुलिस के रवैये की आलोचना की. अंकिता की मां ने न्याय की मांग जारी रखने और जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल करने की चेतावनी भी दी.

इस घटनाक्रम ने अंकिता मामले को फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है .

राष्ट्रपति से क्या चाहते हैं अंकिता के माता-पिता?

अंकिता के माता-पिता की मांगों का केंद्र तीन बातें हैं:

  • दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर CBI जांच पूरी होने तक रोक लगाने पर विचार किया जाए.

  • कथित VIP एंगल की निष्पक्ष और विस्तृत जांच हो तथा परिवार को जांच की प्रगति के बारे में जानकारी मिले.

  • डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल, संदेशों और अन्य अहम पहलुओं को लेकर उठे सवालों का तथ्यों के आधार पर जवाब दिया जाए.

इन मांगों पर अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक अधिकारियों और जांच एजेंसी के अधिकार क्षेत्र के अनुसार ही हो सकता है. राज्यपाल की नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग को परिवार का पक्ष समझना चाहिए, न कि इसे पहले से स्वीकृत कानूनी निर्णय मानना चाहिए.

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