दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान फूट-फूटकर रोईं अंकिता भंडारी की मां,बोलीं- बताइए, न्याय के लिए कहां जाएं?

Ankita Bhandari Mother दिल्ली : उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत गौतम की नियुक्ति का विरोध कर रहे अंकिता के माता-पिता दिल्ली पहुंचे और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में अपनी बात रखी. प्रेस वार्ता के दौरान अंकिता की मां सोनी देवी भावुक हो गईं और फफक-फफक कर रोने लगीं. उन्होंने भरी आवाज में सवाल किया कि आखिर वे अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए कहां जाएं. उन्होंने कहा कि बेटी की याद हर समय उनके साथ रहती है और न्याय की आस में वे दर-दर भटक रहे हैं.

सोनी देवी ने कहा कि अगर उनकी कोई गलती थी तो उन्हें सजा दी जाती, लेकिन उनकी बेटी का क्या कसूर था? परिवार का कहना है कि अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर अब भी कई सवाल अनुत्तरित हैं. इसी वजह से वे चाहते हैं कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर रोक लगाई जाए.

‘आप ही बताइए, हम न्याय के लिए कहां जाएं?’ मां सोनी देवी का छलका दर्द

प्रेस वार्ता के दौरान सोनी देवी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं. बेटी को खोने का दर्द और न्याय की लंबी लड़ाई का जिक्र करते हुए वह रोने लगीं. उन्होंने मीडिया से अपील की कि कोई उन्हें बताए कि आखिर वे अपनी बेटी के लिए इंसाफ मांगने कहां जाएं.

सोनी देवी ने कहा, “हम न्याय के लिए कहां जाएं? हमेशा मुझे मेरी बेटी दिखाई देती है. मैं कैसे जीती हूं, मुझे खुद पता है. मुझे कहीं से न्याय नहीं मिल रहा, इसलिए मैं यहां आई हूं. आप ही बताइए, हम कहां जाएं? आखिर मेरी बेटी का क्या कसूर था? अगर मेरा कोई कसूर था तो मुझे सजा देते.”

उनके इस बयान ने एक बार फिर अंकिता भंडारी हत्याकांड में पीड़ित परिवार की न्याय की मांग को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. परिवार का कहना है कि मामले में दोषियों को सजा मिलने के बावजूद कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला है.

अंकिता के पिता ने उठाए जांच पर सवाल, चैट और कॉल डिटेल्स का मुद्दा

अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि वह अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए दिल्ली आए हैं. उन्होंने जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अंकिता ने अपने संदेशों में वीआईपी का जिक्र किया था, लेकिन जांच के दौरान एक साल की चैट कथित तौर पर हटा दी गई. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले में एक आरोपी के फोन को रिकवर करने की दिशा में पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई.

परिवार ने सवाल उठाया कि पुलकित आर्य की कॉल डिटेल्स अब तक सार्वजनिक रूप से सामने क्यों नहीं आई हैं. उनका कहना है कि मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना के पीछे कौन-कौन लोग थे और कथित वीआईपी की भूमिका क्या थी.

वीरेंद्र सिंह भंडारी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के एक पुराने ट्वीट का भी जिक्र किया. उनके आरोप के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने अंकिता के भाई और पिता को सरकारी नौकरी दिए जाने की बात कही थी. जब परिवार ने पूछा कि उन्हें किस विभाग में नौकरी दी गई है, तो कथित तौर पर ट्वीट हटा दिया गया। इस आरोप पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना जरूरी है.

परिवार ने मांग की कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए और इसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश से कराई जाए. उनकी दलील है कि इस व्यवस्था से जांच की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान करने में मदद मिल सकती है.

दुष्यंत गौतम को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

अंकिता भंडारी हत्याकांड सितंबर 2022 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में सामने आया था. 19 वर्षीय अंकिता वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं. रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों पर हत्या का आरोप लगा था. इस मामले में तीनों आरोपियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

हालांकि, मामले में कथित वीआईपी की भूमिका का सवाल समय-समय पर उठता रहा है. परिवार का आरोप है कि अंकिता पर एक वीआईपी को विशेष सेवाएं देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था और इस पहलू की पूरी जांच होनी चाहिए.

विवाद उस समय फिर तेज हो गया, जब पूर्व भाजपा नेता और उत्तराखंड में पार्टी के प्रभारी रहे दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया. राष्ट्रपति भवन की 12 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति में उनकी नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा की गई थी.

अंकिता के परिवार ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर आपत्ति जताई है. परिवार ने उर्मिला सांवर के कथित बयान का हवाला देते हुए गौतम का नाम कथित वीआईपी के संदर्भ में उठाया है. परिवार की मांग है कि जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति पर रोक लगाई जाए.

हालांकि, दुष्यंत गौतम को कथित वीआईपी बताने और मामले में उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता. इस मामले में किसी व्यक्ति की भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होना चाहिए.-

वीआईपी कौन था, इसकी जांच क्यों नहीं हुई?- योगिता भयाना

अंकिता के परिवार के साथ दिल्ली पहुंचीं सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने भी प्रेस वार्ता में जांच को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि परिवार को लोगों का समर्थन तो मिला, लेकिन उनकी नजर में न्याय की लड़ाई अभी पूरी नहीं हुई है.

योगिता भयाना ने आरोप लगाया कि मामला दर्ज होने के 48 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि वनंतरा रिजॉर्ट पर बुलडोजर चला दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि जब अंकिता ने अपने दोस्त को संदेश भेजकर कथित वीआईपी के लिए दबाव बनाए जाने की बात कही थी, तो इस पहलू की जांच को पर्याप्त महत्व क्यों नहीं दिया गया.

उन्होंने कहा कि कथित वीआईपी की पहचान और भूमिका की जांच की जानी चाहिए थी. योगिता ने इस मामले को केवल हत्या तक सीमित न रखकर महिलाओं की सुरक्षा, कथित यौन शोषण और संभावित मानव तस्करी के आरोपों की जांच से भी जोड़कर देखने की मांग की.

उनका कहना था कि अंकिता के माता-पिता को अपनी बात रखने के लिए दिल्ली में उचित जगह तक नहीं मिल रही है. योगिता ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन संबंधी पाबंदियों और रामलीला मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने के खर्च का भी जिक्र किया.

ये आरोप और सवाल परिवार तथा उनके समर्थकों की ओर से उठाए जा रहे हैं. इनकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.

इंडिया गेट पर रातभर प्रदर्शन, सुबह करीब 4 बजे पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली में अंकिता के माता-पिता और उनके समर्थकों ने 14 अक्टूबर को इंडिया गेट के पास धरना दिया था. उनकी मांग थी कि दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति को सीबीआई जांच पूरी होने तक रोक दिया जाए.

प्रदर्शन के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी अंकिता के परिवार से मिलने पहुंचे. राहुल गांधी ने परिवार की न्याय की मांग का समर्थन किया.

15 अक्टूबर की सुबह करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट के पास चल रहे प्रदर्शन के दौरान अंकिता के माता-पिता और कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया. समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार को सुबह करीब 5 बजे छोड़ दिया गया. पुलिस की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेताओं ने विरोध जताया और सवाल उठाए कि न्याय की मांग कर रहे पीड़ित परिवार के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया.

 

योगिता भयाना ने बताया कि पुलिसकर्मी उन्हें और परिवार के सदस्यों को तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन ले गए . उनके अनुसार, पुलिस ने उनसे अनुरोध किया और बाद में उन्हें जाने दिया गया.

इस घटनाक्रम के बाद अंकिता के परिवार ने दिल्ली में अपनी बात रखने का सिलसिला जारी रखा और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस वार्ता कर अपनी मांगें दोहराईं.

राष्ट्रपति से दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग

योगिता भयाना ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति रद्द करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि परिवार को उम्मीद है कि राष्ट्रपति उनकी मांग पर विचार करेंगी.

योगिता ने नियुक्ति रद्द करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम देने की बात भी कही. उन्होंने चेतावनी दी कि मांग नहीं मानी गई तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगी.

वहीं, अंकिता के पिता ने भी केंद्र सरकार से नियुक्ति रद्द करने की मांग की है पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने चेतावनी दी है कि मांग स्वीकार नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जा सकता है.

राहुल गांधी के समर्थन का भी किया जिक्र

अंकिता के माता-पिता ने कहा कि उन्हें राहुल गांधी का समर्थन मिला है. वे अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए दिल्ली आए हैं और चाहते हैं कि राजनीतिक दलों के साथ-साथ संबंधित संस्थाएं भी उनकी मांगों पर ध्यान दें.

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का इंडिया गेट पहुंचना इस मामले को राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा में भी ले आया है. कांग्रेस नेताओं ने परिवार के साथ एकजुटता दिखाई और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए.

हालांकि, परिवार की मांगों पर अंतिम निर्णय जांच एजेंसियों, संबंधित संवैधानिक संस्थाओं और कानून के तहत सक्षम प्राधिकारियों की प्रक्रिया के आधार पर ही होगा.

क्या है अंकिता भंडारी केस का सबसे बड़ा सवाल?

अंकिता भंडारी हत्याकांड में आरोपियों को सजा मिलने के बावजूद कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर परिवार की असंतुष्टि बनी हुई है. माता-पिता चाहते हैं कि जांच के दौरान सामने आए संदेशों, कॉल डिटेल्स और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की गहराई से पड़ताल की जाए.

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