इंदौर में जलसंकट की आहट, सामान्य से 14 इंच कम बारिश ने बढ़ाई परेशानी

इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में इस साल मानसून के दौरान सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज किए जाने के कारण आने वाले महीनों में गंभीर जलसंकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। शहर में निर्बाध पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के लिए नगर निगम ने अभी से कमर कस ली है और कई सख्त तथा जरूरी कदम उठाने की योजना तैयार की है।

सामान्य से 14 इंच कम हुई बारिश

इस मानसून सीजन में इंदौर में महज 23 इंच बारिश ही रिकॉर्ड की गई है, जो कि सामान्य औसत से लगभग 14 इंच कम है। इस कम बारिश का सीधा असर शहर के मुख्य जलस्रोतों पर पड़ा है, जिसके चलते यशवंत सागर और बिलावली तालाब अपनी पूरी क्षमता तक नहीं भर सके हैं। यशवंत सागर, जिससे शहर की छह बड़ी पानी की टंकियों में जलापूर्ति की जाती है, उसकी कुल क्षमता 19 फीट है, लेकिन इस बार वह अधूरा ही रह गया है। इस वजह से आने वाली सर्दियों यानी दिसंबर और जनवरी के महीनों से ही शहर में पानी की भारी किल्लत शुरू होने की आशंका जताई जा रही है।

नर्मदा के पानी से दो बार भरे जाएंगे तालाब

इस संभावित जलसंकट से निपटने के लिए नगर निगम ने एक ठोस कार्ययोजना बनाई है। योजना के तहत यशवंत सागर और बिलावली तालाब को नर्मदा नदी के पानी से दो बार भरा जाएगा। इस संबंध में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से चर्चा हो चुकी है और उनकी सैद्धांतिक सहमति भी मिल गई है। निगम का मुख्य प्रयास यह रहेगा कि नवंबर से अप्रैल के बीच दोनों तालाबों में पर्याप्त पानी का भंडारण किया जाए, ताकि गर्मियों के दिनों में शहरवासियों को पेयजल की समस्या का सामना न करना पड़े।

नए बोरिंग पर प्रतिबंध और बढ़ेंगे पानी के टैंकर

शहर में लगातार गिरते भूजल स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए नगर निगम ने नए बोरिंग के निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली है और इसके लिए जिला प्रशासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों और सड़क निर्माण के दौरान धड़ल्ले से बोरिंग किए जा रहे हैं, जिससे भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इसके अलावा, यदि जलसंकट की स्थिति विकट होती है तो प्रभावित क्षेत्रों में पानी पहुंचाने के लिए टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। पिछले साल जहां 700 से अधिक टैंकर चलाए गए थे, वहीं इस बार 800 से ज्यादा टैंकरों को मैदान में उतारने की तैयारी है।

लीकेज रोकने और पानी की बर्बादी पर रहेगा जोर

जल प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए नगर निगम जलापूर्ति व्यवस्था की साप्ताहिक समीक्षा करेगा। पाइपलाइनों में होने वाले लीकेज को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाएगा ताकि पानी की हर एक बूंद की बर्बादी को रोका जा सके। इसके साथ ही, निर्माण कार्यों और अन्य गैर-पेयजल आवश्यकताओं के लिए ट्रीटेड वाटर के इस्तेमाल को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे शुद्ध पेयजल की बचत की जा सके।

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