Shivraj Singh Chouhan : मध्य प्रदेश में आदिवासी परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने का मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी ही पार्टी की सरकार के अधिकारियों की कार्रवाई से नाराज हो गए. प्रभावित परिवारों से मिलने गांव पहुंचे शिवराज ने इसे अन्याय की हद बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. उन्होंने मौके से ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को फोन कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई. शिवराज ने भरोसा दिया कि जिन परिवारों के मकान तोड़े गए हैं, उनके लिए नए घर बनवाने और तब तक रहने-खाने की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा.
Shivraj Singh Chouhan: कहां हुई बुलडोजर कार्रवाई, क्यों नाराज हुए शिवराज?
मामला मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव का है. यह गांव शिवराज सिंह चौहान के लोकसभा क्षेत्र विदिशा में आता है. यहां वन विभाग और मध्य प्रदेश वन विकास निगम की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान आदिवासी परिवारों के घर गिराए जाने की खबर सामने आई.
रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई में बरेला आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों के मकान तोड़े गए. प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उनके घरों के साथ खेतों में खड़ी मक्का और तुअर की फसल भी नष्ट कर दी गई. इसके अलावा पीने और सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं को भी मिट्टी से भर दिया गया.
रविवार, 11 अक्टूबर को घटना की जानकारी मिलने के बाद शिवराज सिंह चौहान कोसमी गांव पहुंचे. वहां उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं. घर टूटने के बाद महिलाओं और बच्चों की परेशानी देखकर वह अधिकारियों की कार्रवाई पर नाराज नजर आए. उन्होंने पीड़ित परिवारों के साथ बैठकर उनकी बात सुनी और मौके से ही वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया.
‘जुल्म की पराकाष्ठा हो गई’,अधिकारियों पर भड़के शिवराज
शिवराज सिंह चौहान ने कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि गरीब आदिवासी परिवारों को बेघर करना, उनकी फसलें नष्ट करना और पानी के कुएं को मिट्टी से भर देना बेहद गंभीर मामला है. उन्होंने सवाल उठाया कि कार्रवाई करने वाले अधिकारियों ने परिवारों, खासकर महिलाओं और बच्चों की स्थिति के बारे में क्यों नहीं सोचा.
उन्होंने कहा कि जिन घरों में बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब रोने-बिलखने की स्थिति है. उनके मुताबिक, परिवारों के मकान ही नहीं टूटे, बल्कि उनकी वर्षों की मेहनत और भविष्य भी प्रभावित हुआ है.
शिवराज ने इस कार्रवाई को अन्याय बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की पूरी जानकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव तक पहुंचाई जाएगी.
मुख्य सचिव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को फोन
गांव में निरीक्षण के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से फोन पर बात की और घटना पर नाराजगी जताई. उन्होंने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी.
शिवराज के मुताबिक, वह पहले भी अधिकारियों से इन परिवारों के मकान नहीं गिराने का अनुरोध कर चुके थे. उनके कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कुछ महीने पहले भी ऐसी कार्रवाई की कोशिश हुई थी, तब उन्होंने हस्तक्षेप किया था. इसके बावजूद दोबारा कार्रवाई होने पर उन्होंने सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री मोहन यादव से व्यक्तिगत रूप से चर्चा कर मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे. मौके पर वन विभाग और जिला प्रशासन के किसी वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी नहीं होने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई.
पीड़ित परिवारों को नए घर और अस्थायी व्यवस्था का भरोसा
शिवराज सिंह चौहान ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मकान तोड़े गए हैं, उनके लिए नए पक्के घर बनवाने का प्रयास किया जाएगा. स्थायी आवास की व्यवस्था होने तक उनके रहने और खाने-पीने का इंतजाम कराने की बात भी कही.
फसलें नष्ट होने और कुएं को मिट्टी से भरने के आरोपों ने परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. मकानों के टूटने से आवास का संकट पैदा हुआ है, वहीं खेती को नुकसान पहुंचने से आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका है. शिवराज ने इन सभी पहलुओं पर कार्रवाई की जरूरत जताई.
हालांकि, इन आश्वासनों के बाद प्रभावित परिवारों को वास्तविक राहत कब और किस रूप में मिलेगी, इस पर आगे सरकार और प्रशासन के कदम अहम होंगे।
वन विभाग का क्या कहना है?
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, वन विभाग के सूत्रों ने कार्रवाई को वन भूमि से कथित अवैध कब्जा हटाने का अभियान बताया है. विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2021 में वहां सरकारी पौधरोपण किया गया था. आरोप है कि कुछ परिवारों ने पौधरोपण को नुकसान पहुंचाकर जमीन पर खेती शुरू की और वहां झोपड़ियां बना लीं. रिपोर्ट के मुताबिक, वन अपराध के मामले दर्ज किए गए थे और बेदखली के नोटिस भी जारी किए गए थे.
यहां प्रभावित परिवारों और विभाग के दावों में अंतर है. जहां परिवारों की ओर से अपने घर और खेती उजड़ने की बात कही जा रही है, वहीं वन विभाग की ओर से कार्रवाई को वन भूमि पर कथित अतिक्रमण हटाने से जोड़कर देखा जा रहा है. रिपोर्टों में 12 मकान तोड़े जाने की बात है, जबकि वन विभाग के सूत्रों के हवाले से 10 परिवारों का उल्लेख भी किया गया है. इसलिए कार्रवाई के कानूनी आधार, नोटिस और प्रभावित परिवारों की स्थिति की पूरी जानकारी सामने आना जरूरी है.
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल, सरकार पर साधा निशाना
कोसमी गांव की घटना पर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार के भीतर कथित खींचतान का खामियाजा गरीब आदिवासी परिवारों को भुगतना पड़ रहा है.
सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल किया कि जब शिवराज सिंह चौहान जैसे वरिष्ठ नेता कार्रवाई पर आपत्ति जता रहे हैं, तो प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे. उन्होंने इस मामले को सरकार के भीतर कथित अंतर्विरोध से जोड़कर पेश किया.
शिवराज की नाराजगी से सरकार पर बढ़ा दबाव
कोसमी गांव की घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कार्रवाई पर सवाल उठाने वाले शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हैं और वर्तमान में केंद्र सरकार में कृषि मंत्री हैं. उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है.
अब निगाहें मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिक्रिया, प्रशासनिक जांच और प्रभावित परिवारों को मिलने वाली राहत पर रहेंगी. शिवराज ने नए मकान और अस्थायी व्यवस्था का भरोसा दिया है, लेकिन इस आश्वासन को जमीन पर लागू करना राज्य सरकार और प्रशासन के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी.

