Barapullah Phase-3 Traffic Jam नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में लंबे इंतजार के बाद शुरू हुआ बारापुल्ला फेज-3 कॉरिडोर शुरुआती दिनों में ही ट्रैफिक प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. परियोजना से उम्मीद थी कि मयूर विहार से INA तक का सफर करीब 15 मिनट में पूरा किया जा सकेगा, लेकिन कॉरिडोर खुलने के शुरुआती दो दिनों में ही कई वाहन चालक दो घंटे से ज्यादा समय तक जाम में फंसे रहे.
सबसे ज्यादा परेशानी सराय काले खां के पास सूर्यघड़ी मर्जिंग पॉइंट और मयूर विहार की ओर जाने वाले हिस्से में सामने आई. सड़क का नया नेटवर्क शुरू होने के बाद अलग-अलग दिशाओं से आने वाला ट्रैफिक कुछ स्थानों पर सीमित लेन वाले हिस्से में मिल रहा है. इससे वाहनों का दबाव बढ़ते ही बॉटलनेक बन रहा है और ट्रैफिक की रफ्तार अचानक धीमी हो जा रही है.
Barapullah Phase-3 Traffic Jam:ड्रोन से होगी ट्रैफिक की निगरानी
अचानक बढ़े ट्रैफिक दबाव को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने मौके की स्थिति का अध्ययन शुरू कर दिया है. इसके लिए ड्रोन सर्वे की मदद ली जा रही है.
ड्रोन से अलग-अलग समय पर ट्रैफिक फ्लो की निगरानी कर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि जाम वास्तव में किन बिंदुओं पर शुरू हो रहा है और किस दिशा से आने वाले वाहनों के कारण दबाव सबसे ज्यादा बढ़ रहा है.
अधिकारियों की नजर खास तौर पर इन बिंदुओं पर है:
- अलग-अलग हिस्सों में लेन की संख्या
- वाहनों के मर्ज होने वाले स्थान
- ट्रैफिक के अचानक धीमा होने वाले पॉइंट
- सराय काले खां और सूर्यघड़ी के आसपास का फ्लो
- मयूर विहार की तरफ वाहनों का दबाव
- कॉरिडोर से बाहर निकलने और दूसरे मार्गों पर जुड़ने वाले स्थान
कई लेन का ट्रैफिक कम लेन में मिलना बना समस्या
अधिकारियों के शुरुआती आकलन के अनुसार समस्या का एक प्रमुख कारण लेन मर्जिंग है. कॉरिडोर के कुछ हिस्सों में कई लेन से आने वाला ट्रैफिक आगे जाकर कम लेन वाले हिस्से में प्रवेश करता है.
ऐसे में वाहन चालकों को अचानक लेन बदलनी पड़ती है. खासकर पीक ऑवर में जब वाहनों की संख्या काफी ज्यादा होती है, तब यह मर्जिंग प्वाइंट ट्रैफिक के लिए बॉटलनेक बन सकता है.
एक वाहन को लेन बदलने में लगने वाला अतिरिक्त समय पीछे आने वाले वाहनों की कतार को और लंबा कर देता है. यही स्थिति लगातार बनी रहने पर कुछ ही समय में कई किलोमीटर लंबा जाम बन सकता है.
15 मिनट का सफर क्यों बन रहा है मुश्किल?
बारापुल्ला फेज-3 को शुरू करने का प्रमुख उद्देश्य पूर्वी दिल्ली और दक्षिण दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना और यात्रा समय कम करना है. मयूर विहार से INA तक सीधा और तेज संपर्क मिलने की उम्मीद है.
लेकिन किसी नए कॉरिडोर का फायदा सिर्फ मुख्य सड़क की क्षमता पर निर्भर नहीं करता. उससे जुड़े एंट्री-एग्जिट पॉइंट, मर्जिंग लेन, चौराहे और आसपास की सड़कों की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है.
यही वजह है कि नया कॉरिडोर शुरू होने के बाद कुछ हिस्सों में ट्रैफिक का दबाव अपेक्षा से ज्यादा दिखाई दे रहा है. यदि मुख्य कॉरिडोर पर वाहनों की आवाजाही तेज है, लेकिन आगे जाकर उन्हें कम क्षमता वाली सड़क पर उतरना पड़ता है, तो जाम बनने की संभावना बढ़ जाती है.
बैरिकेडिंग और मैनुअल ट्रैफिक रेगुलेशन पर विचार
ट्रैफिक व्यवस्था को सामान्य करने के लिए अधिकारियों की ओर से कई तत्काल उपायों पर विचार किया जा रहा है. इनमें बैरिकेडिंग में बदलाव, मैनुअल ट्रैफिक रेगुलेशन और जरूरत के अनुसार डायवर्जन शामिल हैं.
पीक ऑवर में ट्रैफिक पुलिस के जवानों की तैनाती बढ़ाकर वाहनों को व्यवस्थित तरीके से मर्ज कराने की कोशिश की जा सकती है. इसके अलावा कुछ स्थानों पर बैरिकेड की स्थिति में बदलाव करके वाहनों को पहले से सही लेन में लाने की व्यवस्था पर भी काम किया जा सकता है.
इसका उद्देश्य यह है कि वाहन चालक आखिरी समय पर लेन बदलने के बजाय मर्जिंग पॉइंट से पहले ही अपनी निर्धारित दिशा में आ जाएं.
नेविगेशन ऐप्स पर भी अपडेट जरूरी
बारापुल्ला फेज-3 के खुलने के बाद ट्रैफिक पैटर्न में बदलाव आया है. ऐसे में Google Maps और अन्य नेविगेशन प्लेटफॉर्म पर रूट अपडेट भी महत्वपूर्ण हो गया है.
यदि किसी नए मार्ग को नेविगेशन सिस्टम में सही तरीके से अपडेट नहीं किया गया या पुराने मार्गों के आधार पर वाहन भेजे जाते रहे, तो कुछ सड़कों पर अचानक ट्रैफिक का दबाव बढ़ सकता है.
अधिकारियों की ओर से नेविगेशन अपडेट को भी ट्रैफिक सुधार के संभावित उपायों में शामिल किया जा रहा है.
सराय काले खां और मयूर विहार पर सबसे ज्यादा नजर
फिलहाल सराय काले खां-सूर्यघड़ी मर्जिंग पॉइंट और मयूर विहार की ओर जाने वाला हिस्सा ट्रैफिक प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है.
इन इलाकों में ट्रैफिक की निगरानी कर यह पता लगाया जा रहा है कि किस समय वाहनों का दबाव सबसे अधिक होता है. इसके आधार पर पीक ऑवर के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन या मैनुअल रेगुलेशन जैसे उपाय लागू किए जा सकते हैं.
आने वाले समय में क्या उम्मीद है ?
बारापुल्ला फेज-3 के शुरू होने के बाद शुरुआती दिनों में ट्रैफिक व्यवस्था में दिक्कत आना इस बात का संकेत है कि नए कॉरिडोर को आसपास के पूरे सड़क नेटवर्क के साथ बेहतर तरीके से समन्वित करने की जरूरत है.
अभी ट्रैफिक पुलिस और PWD का फोकस जाम के वास्तविक कारणों की पहचान और तत्काल समाधान पर है. ड्रोन सर्वे से मिलने वाले डेटा के आधार पर लेन व्यवस्था और मर्जिंग पॉइंट में बदलाव किए जा सकते हैं.
अगर बॉटलनेक वाले स्थानों की पहचान कर समय रहते लेन व्यवस्था, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक रेगुलेशन को ठीक किया जाता है, तो बारापुल्ला फेज-3 से अपेक्षित यात्रा समय में कमी हासिल करने की संभावना बढ़ सकती है.

